बारिश के बावजूद देश के 166 बड़े जलाशयों में नहीं बढ़ा जल भंडार, दक्षिण भारत में स्थिति सबसे खराब

एक राहत की बात यह है कि मौजूदा जल स्तर पिछले साल की तुलना में करीब 18 प्रतिशत ज्यादा है और पिछले 10 साल के औसत से 27 प्रतिशत अधिक है. लेकिन इसके बावजूद मौजूदा स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता, क्योंकि क्षेत्रीय असंतुलन और आने वाले गर्मी के महीनों की चुनौती अभी बाकी है.

नई दिल्ली | Published: 11 Apr, 2026 | 10:45 AM

Reservoir storage: देश में एक ओर जहां कई हिस्सों में बेमौसम बारिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर जलाशयों में पानी का स्तर उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रहा है. ताजा आंकड़े एक चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने ला रहे हैं. केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, देश के 166 बड़े जलाशयों में से 10 प्रतिशत से भी कम ऐसे हैं जिनमें 80 प्रतिशत से ज्यादा पानी भरा है. वहीं करीब 55 प्रतिशत जलाशयों में पानी का स्तर 45 प्रतिशत से भी कम रह गया है.

कुल जल भंडारण में आई गिरावट

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है, लेकिन फिलहाल इनमें केवल 82.070 BCM पानी ही मौजूद है. यानी कुल क्षमता का लगभग 44.7 प्रतिशत ही पानी बचा है. यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि गर्मी के मौसम में पानी की मांग तेजी से बढ़ती है, खासकर सिंचाई और पीने के लिए.

बारिश के बावजूद क्यों नहीं बढ़ा जल स्तर

यह सवाल सभी के मन में उठता है कि जब देश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है, तो फिर जलाशयों का स्तर क्यों नहीं बढ़ रहा. दरअसल, मार्च के बाद कई जिलों में सामान्य या अधिक बारिश दर्ज की गई है, लेकिन जनवरी और फरवरी के महीनों में देश के 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सों में कम बारिश हुई थी. इसी कमी का असर अब जलाशयों में दिख रहा है. शुरुआती महीनों में पानी की कमी के कारण जल स्तर पहले ही नीचे चला गया था, जिसे बाद की बारिश पूरी तरह नहीं संभाल पाई.

दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा चिंता

अगर क्षेत्रवार स्थिति देखें, तो दक्षिण भारत में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं. यहां के 47 जलाशयों में पानी का स्तर केवल 33.6 प्रतिशत तक रह गया है, जो पिछले साल से भी कम है. यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में यहां पानी की किल्लत बढ़ सकती है, खासकर खेती और पीने के पानी को लेकर.

पश्चिमी क्षेत्र में स्थिति बेहतर

पश्चिम भारत के जलाशयों की स्थिति बाकी क्षेत्रों के मुकाबले थोड़ी बेहतर है. यहां 53 जलाशयों में पानी का स्तर करीब 53.63 प्रतिशत है, जो अन्य क्षेत्रों से ज्यादा है. हालांकि यह भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कहा जा सकता, लेकिन फिलहाल यह क्षेत्र कुछ हद तक सुरक्षित स्थिति में नजर आ रहा है.

उत्तर, मध्य और पूर्व भारत की स्थिति

उत्तर भारत के 11 जलाशयों में पानी का स्तर करीब 44 प्रतिशत है. वहीं मध्य भारत में 28 जलाशयों में 52 प्रतिशत पानी भरा हुआ है, जो औसत के आसपास है.

पूर्वी भारत के 27 जलाशयों में पानी का स्तर लगभग 42 प्रतिशत है, जो सामान्य से कम माना जा सकता है. इन सभी क्षेत्रों में स्थिति पूरी तरह संतुलित नहीं है और लगातार निगरानी की जरूरत है.

पिछले साल से बेहतर, लेकिन चिंता बनी हुई

एक राहत की बात यह है कि मौजूदा जल स्तर पिछले साल की तुलना में करीब 18 प्रतिशत ज्यादा है और पिछले 10 साल के औसत से 27 प्रतिशत अधिक है. लेकिन इसके बावजूद मौजूदा स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता, क्योंकि क्षेत्रीय असंतुलन और आने वाले गर्मी के महीनों की चुनौती अभी बाकी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की बारिश से जल स्तर में गिरावट की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन इससे स्थिति पूरी तरह नहीं सुधरेगी.

अगर आने वाले समय में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो कई इलाकों में पानी की कमी बढ़ सकती है, जिसका असर खेती, पेयजल और बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है.

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