मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड गेहूं खरीदी, 12 लाख से ज्यादा किसानों से खरीदा गया 90 लाख मीट्रिक टन अनाज

सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खरीदी केंद्रों पर समय भी बढ़ा दिया है. पहले तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे तक था, लेकिन अब इसे रात 10 बजे तक कर दिया गया है. वहीं भुगतान संबंधी देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक बढ़ा दिया गया है. इस फैसले से दूर-दराज के गांवों से आने वाले किसानों को काफी राहत मिली है.

नई दिल्ली | Updated On: 20 May, 2026 | 09:36 AM

Madhya Pradesh wheat procurement: मध्य प्रदेश में इस साल गेहूं खरीदी का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. राज्य सरकार ने किसानों से रिकॉर्ड मात्रा में गेहूं खरीदा है और करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के अनुसार, अब तक 12 लाख 30 हजार 426 किसानों से 90 लाख 8 हजार 469 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है.

सरकार का कहना है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए खरीदी प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान और तेज बनाया गया है. गेहूं उपार्जन केंद्रों पर समय बढ़ाने से लेकर तौल कांटों की संख्या बढ़ाने तक कई फैसले लिए गए हैं, ताकि किसान आसानी से अपनी उपज बेच सकें.

किसानों को मिला 18 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान

राज्य सरकार ने गेहूं बेचने वाले किसानों को बड़ी राशि का भुगतान भी किया है. मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के मुताबिक अब तक किसानों के खातों में करीब 18 हजार 707 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं.

सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल पर गेहूं खरीद रही है. इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जा रहा है. यानी किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिल रहा है.

गेहूं खरीदी का समय बढ़ाया गया

सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खरीदी केंद्रों पर समय भी बढ़ा दिया है. पहले तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे तक था, लेकिन अब इसे रात 10 बजे तक कर दिया गया है. वहीं भुगतान संबंधी देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक बढ़ा दिया गया है. इस फैसले से दूर-दराज के गांवों से आने वाले किसानों को काफी राहत मिली है. कई किसानों ने कहा कि अब उन्हें जल्दी पहुंचने की चिंता कम हो गई है और वे आराम से अपनी उपज केंद्रों तक ला पा रहे हैं.

सप्ताह में 6 दिन हो रही खरीदी

मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि राज्य में सोमवार से शनिवार तक लगातार गेहूं खरीदी की जा रही है. यानी सप्ताह में 6 दिन किसानों की उपज खरीदी जा रही है. सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों से समय पर खरीदी हो सके और किसी किसान को अपनी उपज खुले बाजार में कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े.

बढ़ाई गई तौल कांटों की संख्या

खरीदी केंद्रों पर भीड़ कम करने और प्रक्रिया तेज करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पहले हर केंद्र पर 4 तौल कांटे लगाए जाते थे, लेकिन अब उनकी संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है. इसके अलावा जिलों को जरूरत के अनुसार तौल कांटों की संख्या और बढ़ाने का अधिकार भी दिया गया है. इससे किसानों को लंबी लाइन में खड़े रहने की समस्या कम होगी और खरीदी का काम तेजी से पूरा किया जा सकेगा.

हर घंटे हो रही निगरानी

खाद्य विभाग इस पूरे उपार्जन अभियान पर लगातार नजर बनाए हुए है. अधिकारियों के अनुसार गेहूं खरीदी की हर घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या देरी न हो. सरकार का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों को समय पर भुगतान देने के लिए डिजिटल निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है.

23 मई तक जारी रहेगी खरीदी

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि गेहूं खरीदी का काम 23 मई 2026 तक जारी रहेगा. जिन किसानों की उपज अभी तक नहीं बिक पाई है, वे तय तारीख तक उपार्जन केंद्रों पर जाकर अपना गेहूं बेच सकते हैं. सरकार का मानना है कि इस बार रिकॉर्ड खरीदी से न सिर्फ किसानों को फायदा मिलेगा, बल्कि राज्य के खाद्यान्न भंडारण को भी मजबूती मिलेगी.

किसानों में दिख रहा भरोसा

इस साल बड़ी संख्या में किसानों ने सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचा है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर भुगतान, बोनस और बेहतर व्यवस्था की वजह से किसानों का भरोसा सरकारी खरीदी व्यवस्था पर बढ़ा है. कई किसान मानते हैं कि अगर इसी तरह व्यवस्था बेहतर होती रही तो भविष्य में और ज्यादा किसान सरकारी समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के लिए आगे आएंगे.

 

Published: 20 May, 2026 | 10:10 AM

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