यूरिया को लेकर मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, नई निवेश नीति को मंजूरी से किसानों को राहत मिलेगी

Modi Cabinet Decision: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दे दी है. इस नीति का उद्देश्य देश में नए गैस आधारित यूरिया प्लांट लगाकर उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है. नई व्यवस्था से निवेश को बढ़ावा मिलेगा, हर नए प्लांट पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है.

नोएडा | Updated On: 15 Jul, 2026 | 04:03 PM

National Investment Policy for Urea 2026: देश में यूरिया की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को मंजूरी दे दी है. इस नई नीति का मकसद देश में नए यूरिया कारखाने लगाना, उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है. सरकार का मानना है कि इस पहल से भारत धीरे-धीरे यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा. इससे किसानों को समय पर खाद मिलने में भी आसानी होगी और खेती की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है.

क्या है राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026?

नई नीति के तहत देश में गैस आधारित आधुनिक यूरिया उत्पादन प्लांट की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार चाहती है कि, निजी और सरकारी कंपनियां यूरिया क्षेत्र में निवेश करें, ताकि देश के भीतर ही ज्यादा उत्पादन हो सके. फिलहाल भारत अपनी जरूरत का पूरा यूरिया नहीं बना पाता है. उत्पादन और मांग के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए हर साल बड़ी मात्रा में यूरिया विदेशों से आयात करना पड़ता है. नई नीति का मुख्य उद्देश्य इसी आयात को कम करना है.

नई नीति में क्या बदला गया है?

सरकार ने बताया कि 2012 की पुरानी निवेश नीति की तुलना में नई नीति में कई अहम बदलाव किए गए हैं. अब परियोजनाओं की फिक्स्ड कॉस्ट और वैरिएबल कॉस्ट को अलग-अलग रखा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी. इसके अलावा निवेश करने वाली कंपनियों के लिए 12 से 16 फीसदी तक रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) का प्रावधान किया गया है, ताकि निवेश को बढ़ावा मिल सके. विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव से कंपनियों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भी नई व्यवस्था की गई है. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से हर नए प्लांट पर करीब 250 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हो सकती है.

किसानों को कैसे होगा फायदा?

नई निवेश नीति का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिल सकता है. जब देश में यूरिया का उत्पादन बढ़ेगा तो खाद की उपलब्धता बेहतर होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी. इससे सप्लाई मजबूत होने की उम्मीद है और किसानों को समय पर यूरिया मिलने में आसानी होगी. सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से भविष्य में खाद आपूर्ति से जुड़ी परेशानियां भी कम होंगी.

पहले भी बनी थी निवेश नीति

यूरिया क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने पहली बार 2012 में नई निवेश नीति लागू की थी. उस नीति के तहत देश में 6 नए यूरिया प्लांट लगाए गए. इनमें 4 प्लांट सरकारी कंपनियों के जॉइंट वेंचर और 2 प्लांट निजी कंपनियों द्वारा स्थापित किए गए थे. हालांकि, वह नीति अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी.

क्यों पड़ी नई नीति की जरूरत?

इस समय देश में 33 यूरिया उत्पादन इकाइयां काम कर रही हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन (LMT) है. इसके बावजूद देश की मांग पूरी नहीं हो पा रही है और हर साल यूरिया का आयात करना पड़ता है.

उर्वरक विभाग को नए यूरिया प्लांट लगाने के कई प्रस्ताव भी मिले हैं. ऐसे में सरकार ने निवेश को बढ़ावा देने और उत्पादन बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 लागू करने का फैसला लिया है. सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह नीति भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम साबित होगी.

Published: 15 Jul, 2026 | 04:00 PM

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