खरीफ में खाद की किल्लत रोकने के लिए ओडिशा सरकार सख्त, जमाखोरी करने वालों पर होगी बड़ी कार्रवाई
Odisha Fertilizer Supply 2026: खरीफ 2026 में खाद की संभावित कमी को देखते हुए ओडिशा सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती बढ़ा दी है. जिला स्तर पर स्टॉक और बिक्री की निगरानी की जा रही है, जबकि किसानों को यूरिया-डीएपी के विकल्प के तौर पर अमोनियम सल्फेट के इस्तेमाल की सलाह दी गई है.
Kharif Season 2026: खरीफ सीजन 2026 में किसानों को खाद की कमी न हो, इसके लिए ओडिशा सरकार ने तैयारी तेज कर दी है. वैश्विक हालात के चलते कुछ उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने खाद की उपलब्धता और बिक्री पर निगरानी बढ़ा दी है. सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी या जानबूझकर कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. सरकार का कहना है कि किसानों को यूरिया, डीएपी और दूसरे जरूरी उर्वरक समय पर और तय कीमत पर मिलें, इसके लिए जिलों में स्टॉक से लेकर बिक्री केंद्रों तक नजर रखी जा रही है.
खाद की उपलब्धता पर लगातार नजर
ओडिशा सरकार ने किसानों से खाद को लेकर घबराने की अपील नहीं की है. सरकार के मुताबिक खरीफ सीजन के लिए खाद की सप्लाई और वितरण की पहले से योजना बनाई गई है. केंद्र से उर्वरकों का आवंटन मिलने के बाद इन्हें मार्कफेड, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), बड़े आदिवासी बहुउद्देशीय सहकारी समितियों (LAMPCS) और अधिकृत दुकानदारों के जरिए किसानों तक पहुंचाया जा रहा है. जिलेवार स्टॉक की भी लगातार जानकारी ली जा रही है, ताकि किसी इलाके में जरूरत से ज्यादा खाद जमा न हो और जहां किसानों की मांग ज्यादा है, वहां कमी न आए.
मांग के हिसाब से पहुंचेगी खाद
खाद की सप्लाई को बेहतर तरीके से संभालने के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों, उर्वरक कंपनियों और राज्य के अधिकारियों के साथ मिलकर हर महीने की सप्लाई योजना बनाई गई है.
इसके तहत कंपनियों और मार्कफेड को निर्देश दिया गया है कि, खाद का वितरण सिर्फ पुराने आंकड़ों के आधार पर न हो, बल्कि जमीन पर किसानों की वास्तविक मांग और उपलब्ध स्टॉक को देखकर किया जाए. इससे ज्यादा जरूरत वाले इलाकों में समय पर खाद भेजने में मदद मिलेगी.
जमाखोरी और कालाबाजारी पर छापेमारी
सरकार ने खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमें बनाई हैं. इन टीमों में कृषि, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं. ये टीमें खाद के थोक और खुदरा केंद्रों पर अचानक जांच कर रही हैं. अगर कोई दुकानदार तय कीमत से ज्यादा दाम पर खाद बेचता है, स्टॉक छिपाता है या कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा खाद को अवैध तरीके से दूसरे इलाकों में भेजने और राज्य की सीमा के पार गैरकानूनी आवाजाही पर भी निगरानी रखी जा रही है.
यूरिया की जगह अमोनियम सल्फेट का विकल्प
यूरिया और डीएपी की मांग को संतुलित करने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को अमोनियम सल्फेट के इस्तेमाल का विकल्प भी बताया है. इसमें करीब 20.5 फीसदी नाइट्रोजन और 23 फीसदी सल्फर होता है. यानी यह फसल को नाइट्रोजन देने के साथ मिट्टी में सल्फर की कमी पूरी करने में भी मदद कर सकता है. हालांकि, किसानों को इसे या किसी भी दूसरे उर्वरक को बिना जरूरत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के हिसाब से ही खाद का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा.
किसानों को तय कीमत पर खाद दिलाने की कोशिश
ओडिशा सरकार का पूरा फोकस इस समय खरीफ सीजन में खाद की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने पर है. प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सप्लाई से लेकर दुकानों पर बिक्री तक हर स्तर पर निगरानी रखी जाए. सरकार का लक्ष्य साफ है कि खाद की कमी का फायदा उठाकर कोई व्यापारी किसानों से ज्यादा पैसा न वसूल सके और यूरिया, डीएपी समेत जरूरी उर्वरक किसानों को समय पर, उचित कीमत पर और आसानी से मिल सकें.