खरीफ किसानों के पास आखिरी मौका, 31 जुलाई तक करा लें रजिस्ट्रेशन, वरना नहीं मिलेगा बीमा का लाभ
Fasal Bima Yojana: अगर आपने खरीफ फसलों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है, तो 31 जुलाई तक जरूर करा लें. इसके बाद आवेदन का मौका नहीं मिलेगा. फसल खराब होने पर बीमा का लाभ लेने के लिए समय पर आवेदन जरूरी है.
PM Fasal Bima Yojana: अगर आपने इस साल खरीफ फसलों की बुवाई कर दी है और अभी तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में नाम नहीं जुड़वाया है, तो अब देर न करें. सरकार ने योजना में आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई तय की है. इसके बाद किसान इस सीजन के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे और अगर फसल को प्राकृतिक आपदा या खराब मौसम से नुकसान होता है, तो बीमा का लाभ भी नहीं मिलेगा. बदलते मौसम और लगातार बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन के बीच फसल बीमा किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक बड़ा सहारा बनता जा रहा है. यही वजह है कि कृषि विभाग किसानों से समय रहते आवेदन करने की अपील कर रहा है.
क्यों जरूरी है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना?
आज खेती पहले से ज्यादा जोखिम भरा काम बन चुकी है. कभी सूखा पड़ जाता है, तो कभी बेमौसम बारिश या ओलावृष्टि पूरी फसल बर्बाद कर देती है. कई बार बाढ़ और तेज हवाएं भी किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं. ऐसे समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को आर्थिक मदद देती है. अगर प्राकृतिक कारणों से फसल खराब होती है, तो बीमा के जरिए नुकसान की भरपाई की जाती है, जिससे किसान अगली फसल की तैयारी आसानी से कर सके.
किन परिस्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ?
संशोधित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कई तरह की प्राकृतिक परिस्थितियों में किसानों को आर्थिक सहायता मिल सकती है. अगर फसल को बेमौसम बारिश, सूखा, अत्यधिक वर्षा, प्रतिकूल मौसम या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होता है, तो किसान बीमा का दावा कर सकते हैं. इसके अलावा, अगर किसी अधिसूचित क्षेत्र में औसत उत्पादन तय सीमा से कम रहता है, तब भी योजना के तहत मुआवजा मिलने का प्रावधान है.
इन खरीफ फसलों का कराया जा सकता है बीमा
इस योजना के तहत खरीफ सीजन की कई प्रमुख फसलों को शामिल किया गया है. इनमें धान, ज्वार, बाजरा, रागी, मूंग, उड़द, अरहर (तूर), मक्का, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, कपास और प्याज जैसी अधिसूचित फसलें शामिल हैं.
अगर किसान इन फसलों की खेती कर रहे हैं, तो वे योजना का लाभ ले सकते हैं.
कितना देना होगा प्रीमियम?
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना पड़ता है.
- खाद्यान्न, दलहन और तिलहन फसलों के लिए किसान को बीमित राशि का सिर्फ 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है.
- वहीं कपास और प्याज जैसी व्यावसायिक फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम तय किया गया है.
बाकी की पूरी राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं.
31 जुलाई तक ऐसे करें आवेदन
योजना में आवेदन करना काफी आसान है. किसान राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP), नजदीकी बैंक शाखा, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या अन्य अधिकृत ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. सरकार ने किसानों से अपील की है कि, अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन पूरा कर लें.
आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?
फसल बीमा का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखना जरूरी है. इनमें-
- एग्रीस्टैक (AgriStack) पंजीकरण संख्या
- लैंड रिकॉर्ड
- फसल बुवाई घोषणा (Crop Sowing Declaration)
- आधार से लिंक बैंक खाता
- डिजिटल क्रॉप सर्वे शामिल हैं.
दस्तावेज सही और पूरी तरह सत्यापित होने चाहिए, तभी आवेदन स्वीकार किया जाएगा.
कौन किसान उठा सकते हैं योजना का लाभ?
योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनके पास अधिसूचित फसल का कम से कम 0.10 हेक्टेयर क्षेत्र हो. साथ ही आवेदन तय समय सीमा के भीतर किया गया हो और सभी जरूरी दस्तावेज सही हों. अगर कोई किसान गलत या फर्जी जानकारी देकर बीमा का लाभ लेने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. कृषि विभाग ने साफ किया है कि ऐसे किसानों को पांच साल तक विभाग की विभिन्न योजनाओं से वंचित किया जा सकता है.