खेती के साथ बिजली उत्पादन का मौका, सरकार ला रही PM-KUSUM 2.0 योजना, जानें क्या होंगे फायदे

PM KUSUM 2.0 scheme: इस मॉडल में खेतों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे, लेकिन इससे खेती पर कोई असर नहीं पड़ेगा. किसान उसी जमीन पर फसल भी उगा सकेंगे और साथ ही सौर ऊर्जा से बिजली भी बना सकेंगे. सरकार की योजना है कि इस नए मॉडल के तहत करीब 10 गीगावॉट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं विकसित की जाएं.

नई दिल्ली | Updated On: 11 Mar, 2026 | 10:24 AM

भारत में खेती को सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा से जोड़ने के लिए सरकार एक नई पहल की तैयारी कर रही है. केंद्र सरकार जल्द ही पीएम-कुसुम योजना का नया संस्करण ‘PM-KUSUM 2.0’ शुरू करने की योजना बना रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन का अवसर देना है, ताकि उनकी आय बढ़ सके और खेती की लागत कम हो.

द इकॉनोमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सरकार इस योजना के नए संस्करण पर काम कर रही है. इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है.

खेती और सौर ऊर्जा का नया मॉडल

PM-KUSUM 2.0 के तहत एक खास एग्री-सोलर पीवी (Agri-PV) मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा. इस मॉडल में खेतों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे, लेकिन इससे खेती पर कोई असर नहीं पड़ेगा. किसान उसी जमीन पर फसल भी उगा सकेंगे और साथ ही सौर ऊर्जा से बिजली भी बना सकेंगे.

सरकार की योजना है कि इस नए मॉडल के तहत करीब 10 गीगावॉट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं विकसित की जाएं. इससे गांवों में विकेंद्रीकृत ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और बिजली की कमी वाले क्षेत्रों को भी फायदा होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकता है. किसान अपने खेत में बने सोलर प्लांट से बिजली बनाकर उसे ग्रिड में बेच सकते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होगी.

पहले चरण में क्या हासिल हुआ

PM-KUSUM योजना की शुरुआत साल 2019 में लगभग 34,422 करोड़ रुपये के बजट के साथ की गई थी. इसका लक्ष्य मार्च 2026 तक देश में 34,800 मेगावॉट सौर क्षमता जोड़ना था, ताकि कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ सके. इस योजना के तहत अब तक देशभर में बड़ी प्रगति हुई है. लाखों किसानों को सौर ऊर्जा से जुड़े उपकरणों का लाभ मिला है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 10 लाख से अधिक स्टैंडअलोन सोलर कृषि पंप लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 13 लाख से ज्यादा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है. इससे किसानों को डीजल या महंगी बिजली पर निर्भरता कम करनी पड़ी है.

किसानों को कैसे होगा फायदा

PM-KUSUM 2.0 से किसानों को कई तरह के फायदे मिलने की उम्मीद है. सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती और भरोसेमंद बिजली मिलेगी. इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा खेतों में लगे सोलर पैनलों से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को किसान बिजली कंपनियों को बेच भी सकते हैं. इससे उन्हें नियमित आय का एक नया स्रोत मिलेगा.

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता बढ़ने से छोटे उद्योगों और कृषि आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है.

राज्यों की बढ़ती दिलचस्पी

केंद्र सरकार के अनुसार कई राज्य सरकारें भी इस योजना में काफी रुचि दिखा रही हैं. कई राज्यों ने केंद्र से योजना के विस्तार और वित्तीय सहायता की मांग की है. राज्यों का मानना है कि अगर इस योजना को बड़े स्तर पर लागू किया गया तो इससे कृषि क्षेत्र में ऊर्जा संकट काफी हद तक कम हो सकता है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

ग्रामीण ऊर्जा क्रांति की ओर कदम

विशेषज्ञों का कहना है कि PM-KUSUM 2.0 भारत के कृषि क्षेत्र में ऊर्जा और खेती को जोड़ने वाला एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. यह योजना किसानों को केवल खाद्यान्न उत्पादक ही नहीं बल्कि ऊर्जा उत्पादक भी बना सकती है.

अगर यह योजना बड़े स्तर पर सफल होती है तो आने वाले समय में भारत के गांवों में सौर ऊर्जा आधारित एक नई ऊर्जा व्यवस्था विकसित हो सकती है, जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाएगी.

Published: 11 Mar, 2026 | 10:24 AM

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