उपराष्ट्रपति ने लॉन्च किया देश का पहला स्वदेशी हाइब्रिड बीज, पॉपकॉर्न मक्का में भारत ने लगाई लंबी छलांग!
पॉपकॉर्न मक्का की खेती में भारत ने नई शुरुआत की है. उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने देश का पहला गैर-जीएमओ स्वदेशी हाइब्रिड बीज लॉन्च किया. 8 राज्यों के 17,500 से अधिक किसान पहले ही 40 हजार एकड़ में पॉपकॉर्न मक्का उगा रहे हैं.
भारत में पॉपकॉर्न मक्का की खेती को नई दिशा देने की तैयारी है. आंध्र प्रदेश से उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने देश का पहला गैर-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज लॉन्च किया. इसे भारतीय मिट्टी और किसानों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है. इस स्वदेशी बीज से उच्च गुणवत्ता वाले पॉपकॉर्न मक्के के लिए विदेशी तकनीक और आयात पर निर्भरता कम करने की उम्मीद जताई गई है.
भारत में तैयार हुआ पहला गैर-जीएमओ पॉपकॉर्न हाइब्रिड बीज
आंध्र प्रदेश में आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत का पहला गैर-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज देश के सामने पेश किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और कृषि ने भारत के सांस्कृतिक जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने भारतीय कृषि को मजबूत बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और स्वदेशी बीजों के विकास पर जोर दिया. उनके मुताबिक, देश में तैयार किए गए ऐसे बीज किसानों को नई संभावनाएं देने के साथ कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी अहम कदम साबित हो सकते हैं.
विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने की उम्मीद
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाले पॉपकॉर्न मक्के के लिए आयातित तकनीक पर निर्भर रहा है. ऐसे में देश में विकसित यह नया स्वदेशी हाइब्रिड बीज विदेशी निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है. इससे विदेशी मुद्रा की बचत की भी उम्मीद है. उन्होंने भारतीय मिट्टी में तैयार की गई इस पॉपकॉर्न किस्म के विकास के लिए किसानों और गॉरमेट पॉपकॉर्निका की सराहना की. गॉरमेट पॉपकॉर्निका चेन्नई स्थित कंपनी है और इसे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी पॉपकॉर्न मक्का उत्पादक कंपनी बताया गया है. कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश और सात अन्य राज्यों के बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसानों के साथ गॉरमेट पॉपकॉर्निका से जुड़े भागीदारों को भी सम्मानित किया गया.
40 हजार एकड़ में हो रही पॉपकॉर्न मक्के की खेती
पॉपकॉर्न मक्के की खेती से जुड़ा यह मॉडल अब बड़े स्तर पर फैल रहा है. उपराष्ट्रपति ने बताया कि 8 राज्यों के 17,500 से अधिक किसान करीब 40,000 एकड़ जमीन पर पॉपकॉर्न मक्के की खेती कर रहे हैं और गॉरमेट पॉपकॉर्निका की इस यात्रा का हिस्सा हैं. इससे किसानों को बाजार से जोड़ने और उनकी आय के नए अवसर पैदा करने में मदद मिल रही है. उन्होंने एस.बी.पी. पट्टाभि राम राव के योगदान की भी सराहना की. उनके नेतृत्व में गॉरमेट पॉपकॉर्निका ने आंध्र प्रदेश के एक छोटे उद्यम से आगे बढ़कर एक प्रमुख प्रसंस्करण इकाई का रूप लिया है. इससे हजारों किसान परिवारों को बाजार तक पहुंच और कमाई के नए रास्ते मिले हैं.
पीएम-किसान समेत कई योजनाओं की सराहना
कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की किसान-केंद्रित योजनाओं की भी सराहना की. इनमें पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन और नमो ड्रोन दीदी जैसी योजनाएं शामिल हैं. उन्होंने कृषि और ग्रामीण विकास, रायथू बाजार, बागवानी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे कदमों के लिए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की भी प्रशंसा की.
मुसुनुरु पहुंचने पर उपराष्ट्रपति ने गॉरमेट पॉपकॉर्निका की फैक्ट्री और कोल्ड स्टोरेज सुविधा का दौरा भी किया. यहां उन्होंने पॉपकॉर्न मक्के की प्रोसेसिंग, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग और भंडारण की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली. उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण जमीनी स्तर से होगा. इसके लिए किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों और उद्यमियों द्वारा विकसित बीज तथा आत्मनिर्भरता की भावना महत्वपूर्ण होगी. देश का पहला गैर-जीएमओ स्वदेशी पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है.