सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बोले राकेश टिकैत, किसान पंचायत में उठेगा युवाओं का मुद्दा
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर राकेश टिकैत ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की मांगें सुने और 21 जुलाई की किसान पंचायत में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह पुलिस सफदरजंग अस्पताल ले गई. इस कार्रवाई के बाद भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने सरकार से युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुनने की अपील करते हुए कहा कि 21 जुलाई को होने वाली किसान पंचायत में भी इस पूरे मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और युवाओं की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा.
युवाओं की बात सुने सरकार, लोकतंत्र में आवाज दबाना ठीक नहीं
राकेश टिकैत ने फेसबुक लाइव के जरिए कहा कि जंतर-मंतर पर बैठे युवा देश से जुड़े अहम मुद्दों को उठा रहे हैं. उनकी मांगों को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को गंभीरता से सुनना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार का काम लोगों की बात सुनकर समाधान निकालना है. टिकैत ने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनसे संवाद होना चाहिए, तभी हालात बेहतर होंगे.
21 जुलाई की किसान पंचायत में उठेगा युवाओं का मुद्दा
टिकैत ने बताया कि 21 जुलाई को होने वाली किसान पंचायत में भी इस पूरे मामले पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने कहा कि किसान और युवा दोनों देश के भविष्य से जुड़े हुए हैं, इसलिए उनके मुद्दों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) इस आंदोलन के साथ खड़ा है और युवाओं की लोकतांत्रिक मांगों का समर्थन करता है. किसान पंचायत में सरकार के सामने इन मुद्दों को मजबूती से रखने की रणनीति बनाई जाएगी.
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असामाजिक तत्वों से सावधान रहने की सलाह
राकेश टिकैत ने प्रदर्शन में शामिल युवाओं और संगठनों से शांति बनाए रखने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए और किसी भी तरह की हिंसा से बचना जरूरी है. टिकैत ने चेतावनी दी कि कई बार आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहरी और असामाजिक तत्व भी भीड़ में शामिल होने की कोशिश करते हैं. इसलिए प्रदर्शनकारियों को सतर्क रहना चाहिए और ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें आंदोलन से दूर रखना चाहिए.
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसका शांतिपूर्ण स्वरूप होता है. अगर आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा तो उसकी आवाज ज्यादा मजबूती से सरकार तक पहुंचेगी. टिकैत के इस बयान के बाद अब सबकी नजर 20 जुलाई के प्रदर्शन और 21 जुलाई की किसान पंचायत पर टिकी हुई है, जहां युवाओं और किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बड़ा फैसला और रणनीति सामने आ सकती है.