20 साल का इंतजार खत्म! पांचना बांध से नहरों में छोड़ा गया पानी, राजस्थान के किसानों में खुशी की लहर

Rajasthan News: करीब 20 साल के लंबे इंतजार के बाद राजस्थान के पांचना बांध से कमांड एरिया की नहरों में पूरे वेग से पानी छोड़ा गया. जल विवाद, आंदोलनों और तकनीकी बाधाओं के समाधान के बाद करौली और सवाई माधोपुर के हजारों किसानों को सिंचाई की नई उम्मीद मिली है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 Jul, 2026 | 10:21 AM

Panchana Dam: राजस्थान के करौली और सवाई माधोपुर जिले के किसानों के लिए आखिरकार वह दिन आ गया, जिसका वे पिछले करीब 20 साल से इंतजार कर रहे थे. लंबे विवाद, कई आंदोलनों और कानूनी प्रक्रिया के बाद पांचना बांध से कमांड एरिया की नहरों में पूरे वेग से पानी छोड़ा गया. जैसे ही टेस्ट रन के दौरान नहरों में पानी पहुंचा, किसानों के चेहरे खिल उठे. बड़ी संख्या में किसान नहरों के किनारे पहुंचे और इस ऐतिहासिक पल का स्वागत किया.

दो दशक तक क्यों अटका रहा मामला?

पांचना बांध करौली जिले की गंभीर नदी पर बना एक महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना है. इसका मकसद करौली और सवाई माधोपुर के करीब 10 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र तक सिंचाई का पानी पहुंचाना था.

लेकिन साल 2006 के बाद जल बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया. एक ओर बांध के डूब क्षेत्र के गांवों के लोग पहले अपने लिए लिफ्ट सिंचाई की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कमांड एरिया के किसान नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग पर अड़े थे. धीरे-धीरे यह विवाद लंबा खिंच गया और कई बार आंदोलन के साथ धरने भी हुए.

किसानों के संघर्ष के बाद निकला रास्ता

इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए सरकार, प्रशासन और दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई. मई 2026 में हाईकोर्ट ने भी कमांड एरिया की नहरों में जल्द पानी छोड़ने के निर्देश दिए. इसके बाद कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने भी किसानों से मुलाकात कर समाधान का भरोसा दिलाया. बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि, डूब क्षेत्र के गांवों के लिए लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी और कमांड एरिया की नहरों में तय योजना के अनुसार पानी छोड़ा जाएगा. सरकार ने लिफ्ट सिंचाई परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया है.

तकनीकी खराबी बनी थी रुकावट

समझौते के बाद जुलाई के पहले सप्ताह में नहरों में पानी छोड़ा जाना था, लेकिन बांध के एक स्लूस गेट में तकनीकी खराबी आने से काम रुक गया. इसके बाद जल संसाधन विभाग ने सभी गेटों की मरम्मत कराई और दोबारा सफल परीक्षण किया. आखिरकार अब नहरों में पूरे वेग से पानी छोड़ा गया, जिससे किसानों की उम्मीदें फिर से जाग गई हैं.

खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

पिछले कई सालों से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण किसानों को फसल उत्पादन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था. अब नियमित सिंचाई मिलने से धान, गेहूं, सरसों और अन्य फसलों की पैदावार बढ़ने की उम्मीद है. पर्याप्त सिंचाई मिलने से खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी सुधार आएगा. इससे करौली और सवाई माधोपुर के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

आगे क्या है चुनौती?

हालांकि नहरों में पानी पहुंचना किसानों के लिए बड़ी राहत है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस समाधान को स्थायी बनाने के लिए डूब क्षेत्र के गांवों में लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को समय पर पूरा करना होगा. साथ ही नहरों का संचालन पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से करना भी जरूरी होगा, ताकि भविष्य में दोबारा जल विवाद की स्थिति पैदा न हो.

फिलहाल, पांचना बांध से नहरों में पानी पहुंचने के बाद किसानों में नई उम्मीद जगी है. उनका मानना है कि यदि यह व्यवस्था नियमित बनी रही तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की खेती फिर से समृद्ध हो सकती है.

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