RBI की चेतावनी से बढ़ी चिंता, खाने-पीने और ईंधन के बढ़ते दाम बिगाड़ सकते हैं किचन का बजट

RBI Inflation Warning: RBI ने महंगाई को लेकर चेतावनी दी है कि अगर खाने-पीने की चीजों, ईंधन और दूसरी इनपुट लागतों में बढ़ोतरी जारी रही, तो इसका असर दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है. जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई 4.45 फीसदी रही, जो RBI के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर है.

नोएडा | Updated On: 26 Aug, 2026 | 07:42 PM

RBI Bulletin August 2026: महंगाई को लेकर आम लोगों की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. घर का राशन, सब्जियां, ईंधन और रोजमर्रा की दूसरी चीजों की कीमतों में बदलाव सीधे परिवार के बजट को प्रभावित करता है. अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी महंगाई को लेकर एक अहम चेतावनी दी है. केंद्रीय बैंक का कहना है कि अगर खाद्य पदार्थों, ईंधन और दूसरी इनपुट लागतों की कीमतें लंबे समय तक बढ़ी रहती हैं, तो इसका असर धीरे-धीरे दूसरी चीजों और सेवाओं पर भी दिखाई दे सकता है. यानी फिलहाल महंगाई का दबाव बहुत व्यापक नहीं है, लेकिन इसके फैलने का खतरा बना हुआ है.

जुलाई में फिर 4 फीसदी से ऊपर रही महंगाई

RBI की चिंता ऐसे समय सामने आई है, जब देश की खुदरा महंगाई लगातार दूसरे महीने उसके 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर रही है. जुलाई 2026 में CPI आधारित खुदरा महंगाई 4.45 फीसदी दर्ज की गई, जबकि जून में यह 4.38 फीसदी थी. हालांकि एक महीने में बढ़ोतरी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि कीमतों का दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. खासकर खाने-पीने और ऊर्जा से जुड़ी कीमतों पर नजर रखना जरूरी हो गया है.

महंगा खाना बढ़ा सकता है पूरे घर का खर्च

खाद्य महंगाई का असर सबसे पहले आम परिवार की रसोई पर दिखाई देता है. अगर लंबे समय तक सब्जियां, अनाज, दाल, दूध या दूसरी खाने-पीने की चीजें महंगी रहती हैं, तो परिवार का मासिक बजट बिगड़ सकता है. लेकिन RBI की चिंता सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है. खाद्य पदार्थों की कीमतें लगातार बढ़ने पर कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है. इसके बाद कंपनियां अपने सामान के दाम बढ़ा सकती हैं. मजदूरी और दूसरी लागतों पर भी दबाव बन सकता है. यानी खाने-पीने की चीजों से शुरू हुई महंगाई आगे चलकर दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों तक पहुंच सकती है.

पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो हर चीज पर असर

फ्यूल यानी पेट्रोल, डीजल, गैस और दूसरी ऊर्जा लागत भी महंगाई के लिए अहम है. ईंधन महंगा होने पर माल ढुलाई और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ता है. इसका असर खेत से मंडी और मंडी से दुकान तक पहुंचने वाले सामान की लागत पर पड़ सकता है. सब्जियों और अनाज से लेकर पैकेज्ड फूड, ऑनलाइन डिलीवरी और औद्योगिक सामान तक की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है.

RBI फिलहाल स्थिति पर रख रहा है नजर

RBI ने अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दर और पॉलिसी रुख में बदलाव नहीं किया था. हालांकि केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि फूड और फ्यूल की कीमतों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भी आने वाले समय की तस्वीर को कुछ अनिश्चित बनाया हुआ है.

अभी कोर महंगाई दे रही है राहत

महंगाई के बीच एक राहत वाली बात भी है. कोर महंगाई, यानी खाद्य और ईंधन को छोड़कर बाकी चीजों की महंगाई, फिलहाल ज्यादा तेजी नहीं दिखा रही है. यही वजह है कि RBI अभी जल्दबाजी में सख्त कदम उठाने से बच रहा है. केंद्रीय बैंक यह देखना चाहता है कि खाद्य और ईंधन की महंगाई कुछ समय की सप्लाई समस्या है या इसका असर लंबे समय तक रहने वाला है. अगर आने वाले महीनों में खाद्य और ईंधन की बढ़ी लागत का असर दूसरी चीजों की कीमतों में भी साफ दिखाई देने लगा और कोर महंगाई बढ़ने लगी, तो RBI के लिए चिंता बढ़ सकती है.

ऐसे में महंगाई पर काबू पाने के लिए मौद्रिक नीति को और सख्त करने की जरूरत पड़ सकती है. फिलहाल आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि बढ़ती लागत का असर उनकी रसोई और रोजमर्रा के खर्च पर कितना पड़ता है.

Published: 26 Aug, 2026 | 08:22 PM

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