Kosi Mechi River Link Project: बिहार के सीमांचल इलाके के किसानों के लिए कोसी-मेची अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजना काफी अहम मानी जा रही है. इस परियोजना के पूरा होने के बाद अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार की बड़ी कृषि भूमि को अतिरिक्त और भरोसेमंद सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को सुपौल के छातापुर प्रखंड के चैनपुर गांव पहुंचकर निर्माणाधीन परियोजना का जायजा लिया.
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से निर्माण की मौजूदा स्थिति, अब तक हुए काम और आगे की योजना की जानकारी ली. उन्होंने साफ निर्देश दिया कि काम तय समय पर पूरा हो और निर्माण की क्वालिटी से किसी तरह का समझौता न किया जाए.
2.14 लाख हेक्टेयर खेतों को मिलेगा फायदा
सरकार के मुताबिक, कोसी-मेची परियोजना पूरी होने के बाद कुल 2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त और सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिल सकेगी. इसमें अररिया की 69,642 हेक्टेयर, पूर्णिया की 69,970 हेक्टेयर, किशनगंज की 39,548 हेक्टेयर और कटिहार की 35,653 हेक्टेयर जमीन शामिल है. इसका मतलब है कि इन जिलों के किसानों को खेती के लिए सिर्फ बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. खेतों तक पानी की उपलब्धता बेहतर होने से फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
15 हजार से बढ़कर 20 हजार क्यूसेक होगी क्षमता
परियोजना के तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर की पानी ले जाने की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी. अभी यह क्षमता करीब 15 हजार क्यूसेक है, जिसे बढ़ाकर 20 हजार क्यूसेक किया जाना है. इसके लिए मुख्य नहर का विस्तार करने के साथ चार शाखा नहर और छह वितरणी समेत जरूरी नहर प्रणालियां बनाई जाएंगी. परियोजना के आखिरी छोर पर करीब 950 क्यूसेक पानी मेची नदी में पहुंचाने की योजना है. यानी कोसी में उपलब्ध अतिरिक्त पानी को मेची नदी तक पहुंचाकर उसका इस्तेमाल दूसरे इलाके में किया जाएगा.
कोसी-मेची अंतःराज्यीय रिवर लिंक परियोजना से सीमांचल में सिंचाई का विस्तार होगा, किसानों की समृद्धि और जल प्रबंधन को नई गति मिलेगी।
आज सुपौल के छातापुर प्रखंड अंतर्गत चैनपुर ग्राम में निर्माणाधीन परियोजना स्थल का निरीक्षण कर कार्य की प्रगति एवं कार्ययोजना की जानकारी ली तथा… pic.twitter.com/XiqULrlJHe
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) August 19, 2026
2029 तक पूरा करने का लक्ष्य
कोसी-मेची लिंक परियोजना की अनुमानित लागत 6,282.32 करोड़ रुपये बताई गई है. इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. केंद्र सरकार ने परियोजना के बचे हुए काम के लिए 6,143.22 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत में से 3,652.56 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मंजूर की है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण के दौरान किसानों के खेतों और कृषि कार्यों में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने परियोजना की नियमित निगरानी करने और काम की रफ्तार, क्वालिटी और समयसीमा पर खास ध्यान देने को कहा.
सिंचाई के साथ बाढ़ से निपटने में भी मदद की उम्मीद
इस परियोजना का मकसद सिर्फ खेतों तक पानी पहुंचाना नहीं है. सरकार को उम्मीद है कि कोसी के अतिरिक्त पानी को मेची नदी तक ले जाने से जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा. साथ ही कोसी के बाढ़ प्रभाव को कम करने और महानंदा बेसिन में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है. मुख्यमंत्री ने कोसी और गंडक नदियों के बेहतर प्रबंधन के लिए व्यापक योजना तैयार करने का भी निर्देश दिया. उन्होंने ऐसी जल संरचनाएं विकसित करने पर जोर दिया, जिनसे छोटी नदियों में भी सालभर पानी बनाए रखने में मदद मिले.
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
सरकार का मानना है कि, सिंचाई की सुविधा बढ़ने से किसानों को खेती में बड़ा फायदा हो सकता है. पर्याप्त पानी मिलने पर किसान बेहतर तरीके से फसल की योजना बना सकेंगे और उत्पादन बढ़ाने की संभावना भी बनेगी. इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ सीमांचल के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने परियोजना के कैंप कार्यालय में समीक्षा बैठक की. जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें निर्माण कार्य की प्रगति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी दी. अब इस परियोजना पर काम को तय समयसीमा में पूरा करना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, ताकि इसका सीधा फायदा सीमांचल के किसानों तक पहुंच सके.