Fertilizer Black Marketing: बिहार में खरीफ सीजन की खेती लगभग पूरी होने के बाद अब किसानों को खाद की जरूरत बढ़ गई है. लेकिन कई जगहों पर किसानों को सरकारी तय कीमत से ज्यादा दाम पर उर्वरक मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं. इससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है. खाद की बिक्री में मनमानी और दूसरे उत्पादों की जबरन बिक्री की शिकायतों को देखते हुए राज्य सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है.
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को उर्वरक कंपनियों, एजेंसियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा दुकानदारों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगले 15 दिनों के भीतर खाद वितरण से जुड़ी सभी गड़बड़ियां दूर की जाएं. इसके बाद अगर किसी स्तर पर अनियमितता मिली तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.
टैगिंग के नाम पर नहीं बेच सकेंगे दूसरा सामान
बैठक में कृषि मंत्री ने उर्वरक कंपनियों को लेकर भी बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि, कंपनियां टैगिंग के नाम पर किसानों या दुकानदारों को किसी दूसरे उत्पाद की खरीद के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं. अगर किसी कंपनी की ओर से उर्वरक के साथ जिंक, जाइम या किसी अन्य उत्पाद को जबरन बेचने का दबाव बनाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है. इसका सीधा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कई बार खाद लेने के दौरान उन्हें साथ में दूसरे कृषि उत्पाद खरीदने के लिए कहा जाता है. सरकार ने ऐसी व्यवस्था को रोकने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं.
किसान हित सर्वोपरि
माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने आज उर्वरक कंपनियों, एजेंसियों, होलसेलर, रिटेलर एवं विभागीय पदाधिकारियों के साथ बैठक कर खाद की उपलब्धता, निर्धारित मूल्य पर बिक्री एवं किसानों की समस्याओं की समीक्षा की।
बिहार में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है।… pic.twitter.com/tVLiVQRh1E
— Agriculture Department, Govt. of Bihar (@Agribih) August 19, 2026
ज्यादा कीमत पर खाद मिले तो किसान करें शिकायत
कृषि मंत्री ने किसानों से भी अपील की है कि अगर कोई दुकानदार सरकारी तय कीमत से ज्यादा पैसे मांगता है या खाद के साथ कोई दूसरा सामान खरीदने के लिए मजबूर करता है तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग से करें. सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि शिकायत करने वाले किसान की पहचान गुप्त रखी जाएगी. इससे किसान बिना डर के खाद की बिक्री में हो रही मनमानी की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे.
यूरिया का पर्याप्त स्टॉक, DAP पर सरकार की नजर
सरकार का कहना है कि राज्य में फिलहाल उर्वरकों की कुल मिलाकर कमी नहीं है. 19 अगस्त तक बिहार में
- यूरिया की जरूरत 6,73,387 मीट्रिक टन के मुकाबले 7,32,987 मीट्रिक टन उपलब्ध है.
- वहीं, DAP की मांग 1,84,000 मीट्रिक टन है, जबकि उपलब्धता 1,25,000 मीट्रिक टन बताई गई है.
- NPK का करीब 1,59,000 मीट्रिक टन स्टॉक मौजूद है.
- इसके अलावा DAP के विकल्प के तौर पर MOP भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने की बात सरकार ने कही है.
- SSP की 85,807 मीट्रिक टन जरूरत के मुकाबले 74,335 मीट्रिक टन उपलब्ध है.
खाद की बिक्री व्यवस्था में भी होगा बदलाव
बैठक में खाद की बिक्री व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लाइसेंस से जुड़ा एक अहम फैसला भी लिया गया. अब जरूरत के मुताबिक उर्वरक खुदरा विक्रेताओं को थोक विक्रेता और थोक विक्रेताओं को खुदरा विक्रेता के रूप में लाइसेंस देने की व्यवस्था की जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे खाद की सप्लाई और वितरण का नेटवर्क मजबूत होगा. किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में आसानी होगी और उन्हें तय कीमत पर खाद मिलने की संभावना बढ़ेगी.
कृषि मंत्री ने कंपनियों से सक्रिय और अच्छे प्रदर्शन करने वाले विक्रेताओं की सूची भी मांगी है, ताकि लाइसेंस देने की प्रक्रिया में उन्हें प्राथमिकता दी जा सके. अब अगले 15 दिनों में खाद की बिक्री और वितरण व्यवस्था में कितना सुधार होता है, इस पर किसानों की नजर रहेगी.