अल-नीनो से निपटने के लिए सरकार का प्लान तैयार, फसल पैटर्न में भी हो सकता है बदलाव
El Nino Impact India 2026: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सरकार अल-नीनो के संभावित प्रभाव से खरीफ फसलों को बचाने के लिए पूरी तरह तैयार है. इसके लिए कंटिंजेंसी प्लान, वैकल्पिक फसलें और बीज आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है. IMD और अन्य वैश्विक एजेंसियों ने 2026 में सामान्य से कम बारिश और अल-नीनो की संभावना जताई है, जिससे मौसम शुष्क हो सकता है.
Kharif Conference 2026: शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन में कहा कि इस साल अल-नीनो के असर से खरीफ फसलों पर किसी भी तरह के नुकसान से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि किसानों को घबराने की नहीं, बल्कि पहले से तैयारी करने की जरूरत है. सरकार प्रभावित जिलों के लिए पहले ही आपात योजनाएं बनाएगी और जरूरत पड़ने पर फसल पैटर्न में बदलाव भी किया जाएगा.
वैकल्पिक फसलों और बीज आपूर्ति पर जोर
कृषि मंत्रालय ने उन जिलों की पहचान शुरू कर दी है जहां मौसम की वजह से फसलों को नुकसान हो सकता है. ऐसे इलाकों में दूसरी फसलें उगाने को बढ़ावा दिया जाएगा और किसानों को समय पर बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे. सरकार का मकसद है कि मौसम खराब होने पर भी किसानों को ज्यादा परेशानी न हो और खेती का उत्पादन ठीक बना रहे.
IMD और वैश्विक एजेंसियों की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग ने 13 अप्रैल को अपने पहले अनुमान में बताया था कि 2026 में मानसून सामान्य से थोड़ा कम रह सकता है और बारिश करीब 92 फीसदी रहने की संभावना है. इसके अलावा विश्व मौसम संगठन और अमेरिकी एजेंसी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने भी अल-नीनो लौटने की आशंका जताई है. यह असर मई-जून से शुरू होकर साल के अंत तक रह सकता है. अल-नीनो के दौरान मौसम गर्म और सूखा हो सकता है, जिससे खेती और फसलों पर असर पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
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खरीफ बुवाई की शुरुआती स्थिति
देश के कुछ हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो गई है, लेकिन अभी यह शुरुआती चरण में है. जिन इलाकों में पहले बारिश हो चुकी है, वहां किसान जल्दी बुवाई कर रहे हैं. असली बुवाई जून-जुलाई में मानसून आने के बाद तेज होती है. सरकार का कहना है कि, मौसम की चुनौतियों के बावजूद भी भारत 2025-26 में करीब 376.56 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन हासिल कर सकता है.
फसल विविधीकरण और आत्मनिर्भरता पर फोकस
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एम.एल. जाट ने कहा कि भविष्य में चावल उत्पादन का क्षेत्र घटाकर अन्य फसलों पर ध्यान देना जरूरी है.
उन्होंने सुझाव दिया कि:
- धान की खेती का क्षेत्र घटाकर 35 मिलियन हेक्टेयर किया जाए
- 15 मिलियन हेक्टेयर भूमि को दालों और तिलहनों में बदला जाए
- इससे भारत दाल और तेलहन में आत्मनिर्भर बन सकता है
मिट्टी स्वास्थ्य और बीज क्वालिटी पर जोर
ICAR प्रमुख ने यह भी बताया कि 100 से अधिक जिलों में किसान जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है.
उन्होंने सुझाव दिया कि:
- जैविक और प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल बढ़ाया जाए
- मिट्टी की सेहत का खास ध्यान रखा जाए
- बेहतर और पोषक तत्व वाले बीजों को बढ़ावा दिया जाए
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसानों को बेहतर क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराए जाएं, तो उत्पादकता में 15-20 फीसदी तक ग्रोथ संभव है.