गैरहाजिर मंत्रियों पर भड़के शिवराज सिंह, बोले- जिम्मेदारी नहीं निभानी तो पद छोड़ देना चाहिए
शिवराज सिंह चौहान ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि जब देश के कृषि विकास और किसानों के भविष्य को लेकर रणनीति बनाई जा रही हो, तब बैठक से दूर रहना उचित नहीं माना जा सकता. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिम्मेदारी निभाना हर पदाधिकारी का कर्तव्य है और यदि कोई ऐसा नहीं कर पा रहा है तो उसे अपने पद पर बने रहने के बारे में सोचना चाहिए.
National Kharif Conference 2026: देश में खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का सख्त और स्पष्ट रुख देखने को मिला. किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित इस बड़े सम्मेलन में कुछ राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर उन्होंने खुलकर नाराजगी जताई. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर सकता, तो उसे उस पद पर बने रहने का अधिकार भी नहीं होना चाहिए.
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में देशभर के राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करना और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए रणनीति तैयार करना था.
किसानों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता जरूरी
सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि केवल एक विभाग या मंत्रालय का विषय नहीं है, बल्कि यह करोड़ों किसानों, देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है. ऐसे में जब खरीफ सीजन जैसी महत्वपूर्ण तैयारी चल रही हो, तब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की अनुपस्थिति चिंता का विषय है.
उन्होंने कहा कि देश में कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय मजबूत करने और खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा. यदि किसी राज्य का कृषि मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी ऐसे महत्वपूर्ण सम्मेलन में शामिल नहीं होता, तो यह किसानों के प्रति उसकी जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है.
गैरहाजिर मंत्रियों पर जताई नाराजगी
शिवराज सिंह चौहान ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि जब देश के कृषि विकास और किसानों के भविष्य को लेकर रणनीति बनाई जा रही हो, तब बैठक से दूर रहना उचित नहीं माना जा सकता. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिम्मेदारी निभाना हर पदाधिकारी का कर्तव्य है और यदि कोई ऐसा नहीं कर पा रहा है तो उसे अपने पद पर बने रहने के बारे में सोचना चाहिए. उनका यह बयान सम्मेलन का सबसे चर्चित विषय बन गया. कई लोगों ने इसे प्रशासनिक जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में मजबूत संदेश बताया.
खरीफ सीजन की तैयारियों पर हुआ मंथन
सम्मेलन के दौरान खरीफ फसलों की बुवाई से जुड़ी तमाम तैयारियों की समीक्षा की गई. बैठक में बीजों की उपलब्धता, उर्वरकों की आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था, मौसम पूर्वानुमान और किसानों तक योजनाओं की पहुंच जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिए कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले सभी जरूरी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं. उन्होंने कहा कि किसानों को बीज, खाद और सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि मौसम की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए राज्यों को पहले से तैयारी करनी होगी ताकि किसी भी चुनौती का समय रहते सामना किया जा सके.
शिवराज की कार्यशैली भी बनी चर्चा का विषय
सम्मेलन के दौरान शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली भी चर्चा में रही. आमतौर पर मंत्री मंच से संबोधन के बाद कार्यक्रम से निकल जाते हैं, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने अलग अंदाज दिखाया. वे विभिन्न तकनीकी और विशेषज्ञ सत्रों के दौरान हॉल में पीछे बैठकर अधिकारियों और विशेषज्ञों की प्रस्तुतियां सुनते रहे. उन्होंने कृषि विशेषज्ञों के सुझावों को गंभीरता से सुना और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर नोट्स भी लिए. इससे यह संदेश गया कि वे केवल औपचारिक बैठक नहीं कर रहे, बल्कि जमीनी स्तर की चुनौतियों को समझने और समाधान तलाशने पर भी ध्यान दे रहे हैं.
किसानों को केंद्र में रखकर बनेगी रणनीति
सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए. केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा कि वे किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने के लिए पूरी सक्रियता के साथ काम करें.
बीज वितरण, उर्वरक उपलब्धता, मौसम संबंधी जानकारी और फसल सुरक्षा उपायों को लेकर राज्यों को पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए गए. सरकार का उद्देश्य है कि इस वर्ष खरीफ उत्पादन में और बढ़ोतरी हो तथा किसानों की आय मजबूत बने.
जवाबदेही का स्पष्ट संदेश
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान का सख्त रुख केवल अनुपस्थित मंत्रियों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक संदेश था. उन्होंने साफ कर दिया कि किसानों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उनका मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करें, तो कृषि क्षेत्र में और बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं. खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले दिया गया यह संदेश आने वाले दिनों में कृषि प्रशासन की कार्यशैली पर भी असर डाल सकता है.