पराली जलाने पर अब होगी सख्ती! NCR में तैनात होगा ‘पराली सुरक्षा बल’, किसानों के लिए सरकार का बड़ा प्लान
Stubble Burning Management: धान की कटाई के बाद होने वाली पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं. सरकार ने 2026-27 के लिए 544 करोड़ रुपये का बजट रखा है और किसानों को 46 हजार से ज्यादा पराली प्रबंधन मशीनें देने की योजना बनाई है.
Parali Burning: देश में हर साल धान की कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या गंभीर हो जाती है. इससे न सिर्फ वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की क्वालिटी पर भी बुरा असर पड़ता है.
आने वाले धान कटाई सीजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस समस्या से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी सिलसिले में नई दिल्ली के कृषि भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें पराली प्रबंधन और इसके स्थायी समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई.
पराली प्रबंधन के लिए बढ़ाया गया बजट
सरकार ने साल 2026-27 के लिए पराली प्रबंधन योजना के तहत 544.15 करोड़ रुपये का बजट तय किया है. इसमें से 272.07 करोड़ रुपये की पहली किस्त राज्यों को जारी भी की जा चुकी है. इस पैसे का इस्तेमाल किसानों को आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने और पराली के बेहतर प्रबंधन के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार करने में किया जाएगा.
राज्यों ने इस साल 46 हजार से ज्यादा पराली प्रबंधन मशीनें किसानों तक पहुंचाने, 910 कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करने और 141 पराली उपयोग परियोजनाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा है. इससे किसानों को पराली जलाने के बजाय उसका बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी.
धान कटाई के दौरान निकलेगी करोड़ों टन पराली
कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में धान की कटाई के दौरान करीब 2.76 करोड़ टन पराली निकल सकती है. इतनी बड़ी मात्रा में पराली का प्रबंधन करना एक बड़ी चुनौती है. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्यों की तैयारियों और कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई है. सरकार ने बताया कि साल 2018-19 से अब तक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को पराली प्रबंधन के लिए 4,266 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है. इसके जरिए 3.54 लाख से अधिक मशीनें किसानों तक पहुंचाई गई हैं, ताकि पराली जलाने की समस्या को कम किया जा सके.
एनसीआर में बनेगा ‘पराली सुरक्षा बल’
पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी में है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के 14 जिलों की करीब 70 तहसीलों में विशेष ‘पराली सुरक्षा बल’ तैनात किया जाएगा. इसका मकसद पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखना और किसानों को पराली के बेहतर इस्तेमाल के लिए जागरूक करना है. इसके अलावा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को बायोगैस प्लांट, पेलेट और ब्रिकेट बनाने वाली इकाइयों तथा थर्मल पावर प्लांट में पराली के इस्तेमाल की संभावनाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं.
पराली नहीं, कमाई का साधन बन सकती है
सरकार किसानों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि, पराली जलाने के बजाय उसका इस्तेमाल कमाई बढ़ाने के लिए किया जा सकता है. किसान पराली को बायोगैस प्लांट, एथेनॉल प्लांट और बिजली बनाने वाली इकाइयों को बेचकर अतिरिक्त आय कमा सकते हैं. पराली जलाने से मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और फसलों के लिए फायदेमंद जीव भी खत्म हो जाते हैं. वहीं, जिन खेतों में पराली को मिट्टी में मिलाया गया, वहां फसल उत्पादन में सुधार देखने को मिला है.
टिकाऊ खेती की ओर बढ़ते कदम
सरकार कम समय में तैयार होने वाली और कम पानी में उगने वाली धान की किस्मों को बढ़ावा दे रही है. साथ ही, सीधी बुवाई जैसी नई खेती तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है. इससे किसानों को धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच ज्यादा समय मिलेगा, जिससे पराली जलाने की जरूरत कम हो सकती है.
सरकार का मानना है कि इन कदमों से प्रदूषण कम होगा, मिट्टी की सेहत बेहतर बनी रहेगी और किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. यही पराली की समस्या का लंबे समय तक असरदार समाधान साबित हो सकता है.