किसान ध्यान दें! खेत में पड़ी पराली कचरा नहीं बल्कि है खजाना.. सही इस्तेमाल से बढ़ जाएगी पैदावार
Stubble Using Tips: पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट होते हैं और प्रदूषण बढ़ता है, जबकि इसे खेत में मिलाने से यह जैविक खाद बनकर मिट्टी की उर्वरता और नमी बढ़ाती है. वेस्ट डीकंपोजर के उपयोग से पराली जल्दी गलती है, जिससे रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है और फसल की पैदावार बढ़ती है. सही तरीके से पराली का उपयोग करने से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है.
Stubble Burning: खेती में पराली जलाना आज बड़ी समस्या बन चुका है. जल्दी में अगली फसल बोने के चक्कर में किसान अक्सर इसे आग के हवाले कर देते हैं. इससे हवा प्रदूषित होती है और मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. लेकिन सच यह है कि पराली कचरा नहीं, बल्कि खेत के लिए बहुमूल्य संसाधन है. सही तरीके से इसका उपयोग किया जाए तो यही पराली देसी खाद बनकर मिट्टी की ताकत बढ़ा सकती है.
मिट्टी की सेहत के लिए वरदान
जब पराली को खेत में ही जोतकर मिट्टी में मिला दिया जाता है, तो यह धीरे-धीरे सड़कर जैविक खाद में बदल जाती है. इससे मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ती है और उसकी उर्वरता सुधरती है. साथ ही मिट्टी की जल धारण क्षमता भी बेहतर हो जाती है, जिससे सूखे के समय फसल को कम नुकसान होता है.
पराली मिट्टी की ऊपरी सतह को ढककर एक परत बना देती है, जिससे पानी जल्दी नहीं सूखता. इससे खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और सिंचाई की जरूरत भी कम पड़ती है. यह तरीका खासतौर पर गर्मी और कम बारिश वाले क्षेत्रों में बेहद फायदेमंद साबित होता है.
रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाएं
पराली के सड़ने से खेत में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्व उपलब्ध होने लगते हैं. इससे यूरिया और अन्य महंगी रासायनिक खादों की जरूरत कम हो जाती है. लंबे समय में इससे खेती की लागत घटती है और जमीन की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है.
दीमक और बीमारियों का डर क्यों नहीं?
- कई किसानों को लगता है कि पराली छोड़ने से दीमक या बीमारी बढ़ेगी, लेकिन सही तकनीक अपनाने पर ऐसा नहीं होता.
- पराली को जल्दी गलाने के लिए “वेस्ट डीकंपोजर” का इस्तेमाल करें.
- यह पराली को तेजी से खाद में बदल देता है और मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्म जीवों को बढ़ाता है.
- इससे हानिकारक फंगस और कीटों का खतरा कम हो जाता है.
खरपतवार पर भी मिलेगा नियंत्रण
सड़ी हुई पराली मिट्टी के ऊपर एक सुरक्षा परत बना देती है, जिससे खरपतवार (घास-फूस) कम उगते हैं. इससे खेत की सफाई में लगने वाली मेहनत और खर्च दोनों कम हो जाते हैं.
लागत घटेगी, मुनाफा बढ़ेगा
- आज के समय में खेती की लागत तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में पराली का सही उपयोग किसानों के लिए फायदे का सौदा है.
- खाद पर खर्च 20-30 फीसदी तक कम हो सकता है
- उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है
इस तरह किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.
पर्यावरण भी रहेगा सुरक्षित
पराली न जलाकर किसान पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देते हैं. इससे वायु प्रदूषण कम होता है और सरकारी नियमों के तहत लगने वाले जुर्माने से भी बचाव होता है. पराली को जलाना नुकसानदायक है, जबकि उसे खेत में मिलाना फायदे का सौदा है. सही तकनीक और थोड़ी जागरूकता से किसान अपनी जमीन को ज्यादा उपजाऊ बना सकते हैं और लंबे समय तक बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.