नागौरी अश्वगंधा को जीआई टैग मिला, कृषि एक्सपर्ट बोले- किसानों की कमाई और वैश्विक पहचान बढ़ेगी

Nagauri Ashwagandha GI Tag: नागौर की शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी अश्वगंधा की खेती के लिए आदर्श रूप से उपयुक्त है. अन्य क्षेत्रों की तुलना में नागौरी अश्वगंधा की जड़ें लंबी और मोटी होती हैं जो औषधीय एल्कलॉइड से भरपूर होती हैं. इसके फल अपने गहरे, चमकीले लाल रंग के लिए जाने जाते हैं.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 9 Jan, 2026 | 12:32 PM

केंद्र सरकार ने राजस्थान की ‘नागौरी अश्वगंधा’ को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग दिया है. यह अश्वगंधा नागौर जिले की खास तरह की औषधि है, जिसे खाने समेत कई तरह के उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है. यह पहचान मारवाड़ क्षेत्र के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है और सोजत मेहंदी, खेजड़ी के बाद यह कृषि श्रेणी में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि बन गई है. कृषि एक्सपर्ट ने कहा कि जीआई टैग मिलने से अश्वगंधा की खेती करने वाले किसानों को अच्छी कीमत मिलने का रास्ता साफ हो गया है. इससे उनकी कमाई बढ़ेगी.

नागौर की कृषि ब्रांडिंग को बढ़ावा

जीआई टैग मिलना नागौर को हाई क्वालिटी वाली औषधीय फसलों के एक मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में स्थापित करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह टैग नागौरी अश्वगंधा की प्रामाणिकता की रक्षा करेगा, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसके नाम के दुरुपयोग को रोकेगा और निर्यात क्षमता को काफी बढ़ाएगा. उम्मीद है कि यह उपज के लिए प्रीमियम मूल्य निर्धारण और बाजार सुरक्षा सुनिश्चित करके किसानों की आय में सुधार करेगा. इसके साथ ही किसानों की कमाई बढ़ने की संभावनाओं को भी बल मिला है और इसके उत्पादन को भी अब अधिक प्रोत्साहन मिलेगा.

GI मान्यता का वैज्ञानिक आधार

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नागौर की शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी अश्वगंधा की खेती के लिए आदर्श रूप से उपयुक्त है. अन्य क्षेत्रों की तुलना में नागौरी अश्वगंधा की जड़ें लंबी और मोटी होती हैं जो औषधीय एल्कलॉइड से भरपूर होती हैं. इसके फल अपने गहरे, चमकीले लाल रंग के लिए जाने जाते हैं, जो बेहतर क्वालिटी का एक प्रमुख संकेतक हैं. इन अनूठी कृषि जलवायु विशेषताओं ने GI टैग देने का आधार बनाया है.

Nagauri Ashwagandha GI Tag

अश्वगंधा को जीआई टैग का सर्टिफिकेशन.

किसानों और औषधीय फसल क्षेत्र पर प्रभाव

नागौर कृषि कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. विकास पावडिया ने GI टैग को फसल की शुद्धता और गुणवत्ता के लिए केंद्र की अंतिम मंजूरी बताया. उम्मीद है कि यह मान्यता औषधीय खेती में नवाचार, अनुसंधान और युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगी. कानूनी सुरक्षा मिलने से मिलावट पर अंकुश लगेगा, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को अंतरराष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल और आयुर्वेदिक कंपनियों तक सीधी पहुंच मिलेगी.

जीआई टैग मिलने से क्या होता है

जीआई टैग (Geographical Indication) एक कानूनी पहचान है, जो उत्पाद की खासियत के लिए दिया जाता है. जीआई टैग मिलने से उत्पाद की असली पहचान सुरक्षित रहती है और नकली उत्पादों पर रोक लगती है. इससे स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को बेहतर दाम, बाजार और निर्यात के अवसर मिलते हैं, साथ ही उस क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा को भी संरक्षण मिलता है.

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Published: 9 Jan, 2026 | 12:24 PM

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