Gehun Ki Kheti: मार्च का महीना गेहूं की फसल के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस समय अगेती गेहूं में फूल आने की प्रक्रिया शुरू होती है, जो उत्पादन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण चरण है. मौसम में अचानक बदलाव, तापमान में उतार-चढ़ाव और नमी की स्थिति फसल पर प्रतिकूल असर डाल सकती है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार इसी दौरान गेहूं में लूज स्मट नामक बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, जो यदि समय रहते नियंत्रित न की जाए, तो फसल की पैदावार में भारी गिरावट ला सकती है.
लूज स्मट रोग क्या है?
लूज स्मट मुख्य रूप से गेहूं की बालियों को प्रभावित करता है. फसल पकने के समय बालियों में दानों की जगह काले रंग का पाउडर दिखाई देने लगता है. यह पाउडर फफूंद के बीजाणु होते हैं, जो हवा के माध्यम से अन्य स्वस्थ पौधों तक फैल सकते हैं.
डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, इस रोग का प्रमुख कारण स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस नामक फफूंद है, जो बीज के अंदर छिपकर रहता है और पौधे के बढ़ने के साथ सक्रिय हो जाता है. फूल आने के समय यह रोग तेजी से सक्रिय होता है और दानों के निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. प्रभावित बालियां सामान्य से पहले पकती दिखाई देती हैं, लेकिन उनके अंदर दानों की जगह काले चूर्ण जैसा पदार्थ भरा रहता है.
लूज स्मट का प्रभाव
अगर समय पर इस रोग का नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह गेहूं की फसल का 20 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन कम कर सकता है. लूज स्मट हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है और आसपास के स्वस्थ पौधों को भी संक्रमित कर देता है. इससे केवल पैदावार ही नहीं घटती, बल्कि किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. इसलिए, किसानों के लिए समय रहते सतर्क रहना और वैज्ञानिक तरीके से उचित उपाय अपनाना अत्यंत जरूरी है, ताकि फसल सुरक्षित और लाभकारी बनी रहे.
लूज स्मट से बचाव के उपाय
लूज स्मट से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बीज उपचार है. बुआई से पहले प्रमाणित और उपचारित बीज का इस्तेमाल करना चाहिए. यदि किसान बिना बीजोपचार के बुआई कर चुके हैं, तो खेत में स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस का उपयोग कर सकते हैं. यह जैविक नियंत्रण एजेंट फफूंद के प्रभाव को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या मैंकोजेब जैसे फफूंदनाशकों का छिड़काव भी लाभकारी साबित होता है. सही समय पर की गई सावधानी से रोग के फैलाव को रोका जा सकता है.
किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए. खेत में असामान्य बालियों को तुरंत हटा दें और रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें. समय पर वैज्ञानिक उपाय अपनाकर लूज स्मट जैसी खतरनाक बीमारी से फसल को बचाया जा सकता है.