Pest Control In Wheat Farming: रबी सीजन में गेहूं किसानों के लिए सबसे अहम फसल मानी जाती है. कम लागत और अच्छी पैदावार के कारण ज्यादातर किसान गेहूं की खेती करते हैं. बेहतर उत्पादन के लिए किसान 4 से 5 बार सिंचाई करते हैं. साथ ही संतुलित खाद का इस्तेमाल भी करते हैं. लेकिन कई बार फफूंद जनित बीमारियां किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर देती हैं. इन्हीं में से एक खतरनाक बीमारी है कंडुआ रोग, जो पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह एक बीज जनित रोग है, यानी इसका संक्रमण बीज के अंदर ही छिपा रहता है. इसलिए बुवाई के समय इसका पता लगाना मुश्किल होता है और किसान को नुकसान तब समझ में आता है जब फसल में बालियां निकल आती हैं.
कब और कैसे दिखता है कंडुआ रोग?
कंडुआ रोग का असर आमतौर पर फरवरी और मार्च के महीनों में साफ दिखाई देता है. जब गेहूं में बालियां निकलती हैं, तब दानों की जगह काले रंग का चूर्ण जैसा पाउडर दिखाई देता है.
- गर्मी में अचानक घट रहा है दूध? यहां जानें दुधारू पशुओं की ‘परफेक्ट समर डाइट’, वरना होगा बड़ा नुकसान!
- Wheat Farming: दाना भराव का है निर्णायक समय! तीसरे पटवन में नहीं देखा मौसम तो मेहनत पर फिर सकता है पानी
- PM-Kusum के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा! सोलर पंप सब्सिडी के झांसे में न गंवाएं लाखों, सरकार ने जारी की चेतावनी
दरअसल, यह काला पाउडर फफूंद के बीजाणु होते हैं. यही बीजाणु हवा के जरिए स्वस्थ पौधों तक पहुंचकर बीमारी फैलाते हैं. क्योंकि यह रोग बीज के अंदर पहले से मौजूद रहता है, इसलिए शुरुआत में इसकी पहचान नहीं हो पाती. यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी तेजी से पूरे खेत में फैल सकती है और पैदावार को भारी नुकसान पहुंचा सकती है.
एक बार रोग लग जाए तो क्या करें?
कृषि अधिकारियों का कहना है कि यदि फसल में कंडुआ रोग लग जाए तो इसका कोई पक्का इलाज नहीं है. इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है. अगर खेत में संक्रमित बाली दिखाई दे, तो उसे तुरंत सावधानी से तोड़ लेना चाहिए. तोड़ते समय बाली को किसी थैली से ढक लें, ताकि काला पाउडर अन्य स्वस्थ बालियों पर न गिरे. संक्रमित बालियों को खेत में न छोड़ें. इन्हें खेत से दूर ले जाकर जमीन में गहरा दबा दें. ऐसा करने से रोग के फैलने की संभावना कम हो जाती है.
बचाव के लिए सबसे जरूरी कदम: बीज उपचार
कंडुआ रोग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है बुवाई से पहले बीजों का उपचार. विशेषज्ञों की सलाह है कि बीजों को बुवाई से पहले फफूंदनाशक दवाओं जैसे बविस्टिन, कैप्टन या थीरम से उपचारित किया जाए. इसके लिए 2 ग्राम दवा को 1 लीटर पानी में घोलकर बीजों पर छिड़काव करें और अच्छी तरह मिलाएं.
यदि किसान बीज उपचार को अपनी नियमित आदत बना लें, तो वे इस खतरनाक बीमारी से बच सकते हैं और आर्थिक नुकसान से सुरक्षित रह सकते हैं.
स्वस्थ बीज, बेहतर पैदावार
गेहूं की अच्छी फसल के लिए सिर्फ सिंचाई और खाद ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोगों से सुरक्षा भी जरूरी है. कंडुआ रोग जैसी बीमारियों से बचाव के लिए समय पर पहचान और बीज उपचार बेहद जरूरी है. स्वस्थ और उपचारित बीज ही भरपूर पैदावार की गारंटी देते हैं. सही सावधानी अपनाकर किसान अपनी मेहनत और निवेश दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं.