Gehun Ki Kheti: गेहूं की फसल इस समय अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. खेतों में बालियां निकलनी शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में दाने भरकर फसल कटाई के लिए तैयार हो जाएगी. यह समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. सही सिंचाई, संतुलित खाद और समय पर कीटनाशक का उपयोग करके न केवल पैदावार बढ़ाई जा सकती है, बल्कि फसल को खराब होने से भी बचाया जा सकता है.
बाली निकलने के बाद सही सिंचाई का महत्व
जब गेहूं में बाली निकल आती है, तब फसल को हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है. खासकर दूधिया अवस्था में एक बार हल्का पानी देना फायदेमंद रहता है. ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो. पानी रुकने से फसल गिर सकती है, जिससे दाने की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं. इसलिए सिंचाई नियंत्रित और जरूरत के अनुसार ही करें.
यदि आपने अभी तक यूरिया की अंतिम खुराक नहीं दी है, तो दाना बनने से पहले इसका छिड़काव कर सकते हैं. प्रति बीघा लगभग 20 से 25 किलोग्राम यूरिया पर्याप्त माना जाता है. बेहतर परिणाम के लिए हल्की सिंचाई से पहले ही यूरिया डालें. दानों को मोटा और भरपूर बनाने के लिए एक प्रतिशत पोटाश और दो प्रतिशत डीएपी का छिड़काव भी किया जा सकता है. इससे दाने का विकास बेहतर होता है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.
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कीट और रोग नियंत्रण के उपाय
बाली आने के बाद कीटों का खतरा बढ़ जाता है. यदि बालियों में काले या हरे रंग के कीड़े दिखाई दें, तो यह माहू (एफिड) का संकेत हो सकता है. ऐसे में अनुशंसित मात्रा में उचित कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए. इसी तरह करनाल बंट और रतुआ जैसे रोगों से बचाव के लिए फफूंदनाशक दवाओं का प्रयोग लाभकारी होता है. टेबुकोनाजोल, कार्बेन्डाजिम या प्रोपिकोनाजोल जैसी दवाएं फफूंदी से बचाव में सहायक मानी जाती हैं. दवा का प्रयोग हमेशा निर्धारित मात्रा में ही करें.
बाली आने के बाद पौधों का वजन बढ़ जाता है, जिससे तेज हवा या बारिश में फसल गिरने की आशंका रहती है. अनुमानित आंधी या वर्षा से पहले सिंचाई न करें. अत्यधिक नाइट्रोजन और पानी का उपयोग भी फसल को कमजोर कर सकता है. संतुलित पोषण और नियंत्रित सिंचाई से फसल को गिरने से बचाया जा सकता है.
कटाई से पहले रखें इन बातों का ध्यान
बाली निकलने के बाद निराई-गुड़ाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और फसल समय से पहले सूख सकती है. जब दाने सख्त हो जाएं और उनमें लगभग 20 प्रतिशत नमी रह जाए, तभी कटाई करना उचित होता है. समय पर कटाई करने से दानों की गुणवत्ता बनी रहती है और नुकसान की संभावना कम हो जाती है.
गेहूं की फसल में बाली आने के बाद से लेकर कटाई तक का समय बेहद संवेदनशील होता है. सही सिंचाई, संतुलित उर्वरक, समय पर कीट और रोग नियंत्रण तथा सावधानीपूर्वक कटाई से किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. इन सरल उपायों को अपनाकर फसल को सुरक्षित रखते हुए अधिक लाभ कमाया जा सकता है.