Punjab News: पंजाब के चावल मिलों के लिए 100 फीसदी ब्रोकन राइस का बिक न पाना अब आर्थिक चुनौती बन गया है. कारण यह है कि एथेनॉल उद्योग अब चावल की जगह सस्ता मक्का इस्तेमाल कर रहा है. केंद्र ने 100 फीसदी ब्रोकन राइस का रेट 2,370 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, लेकिन एथेनॉल इकाइयां मक्का 1,700 रुपये प्रति क्विंटल में खरीद रही हैं, जिससे चावल महंगा पड़ रहा है. एथेनॉल उद्योग 100 फीसदी ब्रोकन राइस का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन मक्का के अधिक उत्पादन के कारण इसका विकल्प चुनना चावल उद्योग के लिए मुश्किल बना रहा है. वहीं, 100 फीसदी ब्रोकन राइस खुले बाजार में करीब 1,900-2,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रंजीत सिंह जोसन ने मांग की है कि केंद्र 100 फीसदी ब्रोकन राइस की कीमत 1,900 रुपये प्रति क्विंटल कर दें. साथ ही, मिलरों को यह सुविधा दी जाए कि वे अपने पास पहले से मौजूद स्टॉक को सरल रिली ऑर्डर (RO) प्रक्रिया के माध्यम से नए तय रेट पर खरीद सकें. रंजीत सिंह जोसन ने कहा कि अगर मिलरों को उनके पुराने स्टॉक को बिना किसी प्रक्रिया में देरी के बेचने का पहला विकल्प दिया जाए, तो अनावश्यक हैंडलिंग और ट्रांसपोर्टेशन खर्च बचाए जा सकते हैं.
मिलरों की ये है डिमांड
इसके अलावा, एथेनॉल और पशु चारे की इंडस्ट्री को सीधे कुछ मिलों से जोड़ा जा सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि जो भी एथेनॉल या फीड यूनिट ब्रोकन राइस ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत खरीदना चाहती है, उसे मिल-वार और सेंटर-वार मात्रा दी जाए ताकि वितरण सुव्यवस्थित हो. इस तरह की व्यवस्था में इंडस्ट्री सीधे ओपन सेल के जरिए 100 फीसदी ब्रोकन राइस ले सकती है, जिससे मिलरों पर वित्तीय दबाव कम होगा और संचालन सुचारू रहेगा. मिलरों का कहना है कि बिना बिके स्टॉक की वजह से नए अनाज को प्रोसेस करना मुश्किल हो जाएगा. जबकि केंद्र ने स्टॉक के लिए प्रति महीने 1.23 रुपये प्रति क्विंटल का भंडारण शुल्क तय किया है, मिलरों का कहना है कि असली खर्च इससे कहीं ज्यादा है.
मिलों में लगातार बढ़ता जा रहा है ब्रोकन स्टॉक
पंजाब राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन की अध्यक्ष भरत भूषण बिंटा ने कहा कि पिछले दो साल से 10 फीसदी इम्प्रूव्ड राइस की डिलीवरी में सबसे बड़ी समस्या बचा हुआ 15 फीसदी ब्रोकन राइस है, जो मिलरों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है. पिछले सीजन में भी मिलरों को इस 15 फीसदी ब्रोकन राइस को बेचने में काफी मुश्किलें आई थीं और इस साल भी यही स्थिति जारी है. पिछले दो महीने से इम्प्रूव्ड राइस की डिलीवरी हो रही है, लेकिन 15फीसदी ब्रोकन स्टॉक मिलों में लगातार बढ़ता जा रहा है. मिलरों ने ऑनलाइन पोर्टल पर बार-बार कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला, क्योंकि ब्रोकन राइस की ओपन मार्केट कीमतें बहुत कम हैं. 100 फीसदी ब्रोकन राइस की मांग लगभग खत्म हो चुकी है.