खेती में मुनाफा चाहिए तो अपनाएं सेम की खेती, कम खर्च में ज्यादा पैदावार का आसान तरीका

सेम की खेती अब किसानों के लिए कम लागत में अच्छी आमदनी का जरिया बनती जा रही है. यह फसल न ज्यादा पानी मांगती है और न ही ज्यादा मेहनत. सही जमीन, समय पर बुवाई और संतुलित देखभाल से इसकी पैदावार बढ़ाई जा सकती है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 17 Dec, 2025 | 10:20 PM

Sem Farming : खेती में मुनाफा तभी होता है, जब फसल कम खर्च में ज्यादा कमाई दे. आज ऐसे ही एक हरी सब्जी की खेती किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो न ज्यादा पानी मांगती है और न ही ज्यादा मेहनत. सेम की खेती अब किसानों के लिए एक भरोसेमंद आमदनी का जरिया बनती जा रही है. सही तरीका अपनाया जाए, तो यह फसल कम लागत में दोगुना मुनाफा देने की क्षमता रखती है.

सेम की खेती के लिए कैसी हो जमीन और मौसम

सेम की फसल के लिए गर्म और हल्का नम मौसम सबसे बेहतर  माना जाता है. लगभग 20 से 30 डिग्री तापमान में पौधे तेजी से बढ़ते हैं. इस फसल के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है, जिसमें पानी निकासी की सही व्यवस्था हो. अगर खेत में पानी जमा रहता है, तो पौधे खराब हो सकते हैं. इसलिए खेत को समतल और हल्की ढलान वाला रखना फायदेमंद होता है. सही जमीन और मौसम मिलने पर सेम की पैदावार काफी अच्छी होती है.

बुवाई का सही तरीका अपनाएं

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेम की बुवाई  खरीफ और रबी दोनों मौसमों में की जा सकती है. बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना फायदेमंद होता है, इससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. कतार से कतार की दूरी 60 से 75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. खेत की तैयारी के समय 15 से 20 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालने से मिट्टी की ताकत बढ़ती है और फसल मजबूत होती है.

कम पानी में भी अच्छी पैदावार संभव

सेम की फसल को ज्यादा पानी की जरूरत  नहीं होती, लेकिन समय-समय पर हल्की सिंचाई जरूरी होती है. खासकर फूल आने और फल बनने के समय खेत में नमी बनी रहनी चाहिए. ज्यादा पानी देने से फसल को नुकसान भी हो सकता है. इसके साथ ही 2 से 3 बार निराई-गुड़ाई करना जरूरी है, ताकि खरपतवार पोषक तत्व न छीन सकें. संतुलित खाद  और सही सिंचाई से पैदावार में साफ बढ़ोतरी देखी जाती है.

रोग-कीट से बचाव और मुनाफे का गणित

सेम की फसल में माहू, फल छेदक और पत्ती खाने वाले कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं. समय पर जैविक या अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करने से इनसे बचाव किया जा सकता है. जो पौधे ज्यादा बीमार दिखें, उन्हें खेत से निकाल देना चाहिए. कुल मिलाकर, अगर किसान सही तकनीक, समय पर देखभाल और संतुलित खाद का इस्तेमाल करें, तो सेम की खेती कम लागत में अच्छी आमदनी देने वाली फसल साबित हो सकती है. यही वजह है कि आज सेम की खेती किसानों की झोली भरने का मजबूत विकल्प बनती जा रही है.

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Published: 17 Dec, 2025 | 10:20 PM

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