Arhar Ki Kheti: अरहर की फसल में फैल रहा खतरनाक फल भेदक कीट और विल्ट रोग! समय रहते करें ये उपाय

Arhar Ki Kheti: अरहर की खेती किसानों के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन फली बनने के समय कीट और रोग तेजी से फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इनमें फल भेदक कीट और विल्ट रोग सबसे खतरनाक हैं. समय पर पहचान, सही कीटनाशक और बीज-मिट्टी उपचार से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है. सही देखभाल के साथ किसान अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 Jan, 2026 | 02:03 PM

Tips For Farmers: अरहर (तुअर) की खेती देश के कई राज्यों में किसानों के लिए आय का बड़ा सहारा मानी जाती है. कम लागत में अच्छी आमदनी देने वाली यह फसल अगर सही देखभाल के साथ की जाए, तो मुनाफा दोगुना कर सकती है. लेकिन थोड़ी सी लापरवाही, खासकर फली बनने के समय, किसानों को भारी नुकसान में डाल सकती है. इस दौरान कीट और रोग तेजी से फसल को अपनी चपेट में ले लेते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अरहर की फसल में सबसे ज्यादा सतर्कता फूल और फली बनने के समय रखनी चाहिए. यही वह समय होता है जब कीट और रोग सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं. ऐसे में समय पर पहचान और सही उपाय न किए जाएं, तो पूरी मेहनत बेकार जा सकती है.

फल भेदक कीट बना सबसे बड़ा दुश्मन

अरहर की खेती में फल भेदक कीट किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या है. यह कीट फली और पत्तियों में छेद करके अंदर घुस जाता है और दानों को अंदर से खराब कर देता है. शुरुआत में इसका असर कम दिखता है, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे खेत में फैल सकता है. इससे दाने सिकुड़ जाते हैं और पैदावार में भारी गिरावट आती है.

इससे बचाव के लिए खेत की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है. जैसे ही कीट के लक्षण दिखें, तुरंत कीटनाशक दवा का छिड़काव करना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि प्रति एकड़ सही मात्रा में दवा का छिड़काव करने से इस कीट पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.

विल्ट रोग से सूखने लगती है फसल

अरहर में एक और खतरनाक रोग है विल्ट, जो आमतौर पर फली आने के समय दिखाई देता है. इस रोग में पौधों की पत्तियां गुच्छों में मुरझाने लगती हैं, फूल गिर जाते हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा सूखने लगता है. यह रोग मिट्टी के जरिए फैलता है और एक बार खेत में फैल गया, तो नुकसान काफी बढ़ जाता है.

diseases control in pigeon pea farming

अरहर की खेती में रोग से बचाव के टिप्स Photo Credit: Canva)

सही दवाओं से संभव है नियंत्रण

कीट और रोग दोनों पर नियंत्रण के लिए सही दवा और सही मात्रा का इस्तेमाल बेहद जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, क्लोरोपायरीफॉस या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल जैसी दवाओं का 5 से 6 मिली प्रति स्प्रेयर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है. इससे फल भेदक कीट के साथ-साथ अन्य कीटों पर भी असरदार नियंत्रण मिलता है.

बीज और मिट्टी उपचार है सबसे मजबूत हथियार

अरहर की खेती में रोग से बचाव की शुरुआत बीज से ही हो जाती है. विल्ट रोग से बचने के लिए बीज को ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास जैसे जैविक उपचार से जरूर उपचारित करना चाहिए. इसके अलावा खेत की मिट्टी में सड़ी हुई गोबर खाद मिलाने से लाभकारी सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं, जो रोग फैलाने वाले जीवाणुओं को रोकने में मदद करते हैं.

ऐसे पहचानें विल्ट रोग

किसान आसानी से विल्ट रोग की पहचान कर सकते हैं. इसके लक्षण हैं पत्तियों का पीला पड़ना, ऊपर से नीचे की ओर पौधे का सूखना और पौधे को उखाड़ने पर जड़ बाहर से ठीक दिखना. लेकिन जब तने को बीच से चीरकर देखा जाता है, तो अंदर सफेद या मटमैले रंग की फफूंद दिखाई देती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान समय पर इन लक्षणों को पहचान लें और सही उपाय अपनाएं, तो अरहर की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है.

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