कभी गांवों में पानी भरना दिन की सबसे बड़ी चिंता हुआ करता था. सुबह-सुबह महिलाएं और बच्चे दूर-दराज के हैंडपंप, कुएं या तालाब की ओर निकल पड़ते थे. कई बार साफ पानी न मिलने से बीमारियां फैलती थीं और रोजमर्रा का जीवन मुश्किल हो जाता था. लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदल रही है. जल जीवन मिशन ने ग्रामीण भारत में न सिर्फ पानी की उपलब्धता बढ़ाई है, बल्कि लोगों की जिंदगी में सुकून और सम्मान भी जोड़ा है.
मिशन की शुरुआत से अब तक का सफर
भारत सरकार ने अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत की थी. उस समय देश के ग्रामीण इलाकों में केवल 3.24 करोड़ घरों तक ही नल से पानी पहुंच पा रहा था. आज, जनवरी 2026 तक यह संख्या बढ़कर करीब 15.79 करोड़ घरों तक पहुंच गई है. यानी ग्रामीण भारत के लगभग 81 प्रतिशत घरों में अब सुरक्षित और नियमित नल जल कनेक्शन मौजूद है. राज्यसभा में जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह मिशन देश के सबसे बड़े सामाजिक बदलावों में से एक बन चुका है.
महिलाओं और बच्चों की जिंदगी में बड़ा बदलाव
जल जीवन मिशन का सबसे बड़ा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है. पहले महिलाओं को रोज घंटों पानी लाने में लगाना पड़ता था. अब नल से पानी मिलने के बाद यह समय बच रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर के आकलन के मुताबिक, इस मिशन से हर दिन करोड़ों घंटे की बचत हो रही है. इसका मतलब है कि महिलाएं अब उस समय का इस्तेमाल बच्चों की देखभाल, शिक्षा या अपनी आजीविका के लिए कर पा रही हैं. साफ पानी की उपलब्धता से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय कमी आने की संभावना जताई गई है.
रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिला सहारा
जल जीवन मिशन केवल पानी की योजना नहीं है, बल्कि यह रोजगार का भी बड़ा जरिया बन रहा है. आईआईएम बैंगलोर और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने, जल स्रोतों के विकास, रखरखाव और निगरानी में लाखों व्यक्ति-वर्षों का रोजगार पैदा हुआ है. इससे ग्रामीण युवाओं को अपने ही इलाके में काम मिला है और पलायन में भी कमी आई है.
गांव की भागीदारी से मजबूत हुआ सिस्टम
इस मिशन की खास बात यह है कि इसमें गांव की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है. हर गांव में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति या पानी समिति बनाई गई है. इन समितियों में महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लोगों की भागीदारी अनिवार्य रखी गई है. इससे फैसले स्थानीय जरूरतों के हिसाब से लिए जा रहे हैं और लोग खुद अपने पानी के स्रोतों की जिम्मेदारी उठा रहे हैं.
जल संरक्षण और गुणवत्ता पर भी फोकस
केवल नल लगाना ही काफी नहीं था, इसलिए सरकार ने जल संरक्षण पर भी जोर दिया है. जल शक्ति अभियान के तहत “कैच द रेन” जैसी पहल शुरू की गई है, जिससे बारिश के पानी को सहेजने और भूजल स्तर सुधारने का काम हो रहा है. साथ ही जल की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. देशभर में हजारों जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं और लाखों महिलाओं को पानी की जांच का प्रशिक्षण दिया गया है. इससे गांवों में ही पानी की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था मजबूत हुई है.
केंद्रीय बजट 2025-26 में जल जीवन मिशन की समयसीमा को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है. इसका मकसद यह है कि शेष बचे गांवों तक भी नल से सुरक्षित पानी पहुंचाया जा सके और पहले से बनी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा सके. नियमित निगरानी, तकनीकी सहायता और राज्यों के साथ मिलकर काम करने की रणनीति पर सरकार आगे बढ़ रही है.