Winter crops: इस साल रबी सीजन में फसलों की बुवाई का रकबा बढ़ा है. 30 जनवरी तक कुल रबी बुवाई 676.84 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल इसी समय 660.96 लाख हेक्टेयर थी. यानी करीब 15.88 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, इससे उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आमदनी में इजाफा होगा और खाद्य महंगाई पर भी नियंत्रण रहेगा.
आंकड़ों के अनुसार, रबी सीजन 2025-26 में गेहूं की बुवाई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 328.04 लाख हेक्टेयर थी. धान का रकबा भी थोड़ा बढ़कर 45 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है. दालों की कुल बुवाई में 5.03 लाख हेक्टेयर की बढ़त देखी गई है और यह 139.55 लाख हेक्टेयर रही, जिसमें चना और मसूर का योगदान सबसे ज्यादा रहा. चना का रकबा करीब 5 लाख हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि मसूर में मामूली बढ़ोतरी हुई है. हालांकि कुछ दालों जैसे अरहर (फील्ड पी) और कुल्थी में हल्की गिरावट दर्ज की गई है.
श्री अन्न की बुवाई भी बढ़कर 60.93 लाख हेक्टेयर हो गई
मोटे अनाज और श्री अन्न की बुवाई भी बढ़कर 60.93 लाख हेक्टेयर हो गई है. इसमें बाजरा के रकबे में मामूली इजाफा हुआ है, जबकि ज्वार की बुवाई में कमी आई है. खास बात यह है कि मोटे अनाज में (ज्वार, बाजरा, रागी) की बुवाई में 0.94 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि तिलहनों (सरसों और रेपसीड) का क्षेत्र 3.52 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. कुल मिलाकर, रबी सीजन में फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में बढ़ा है, जो बेहतर उत्पादन और किसानों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
रागी की बुवाई बढ़कर 0.97 लाख हेक्टेयर हो गई है
वहीं, रागी की बुवाई बढ़कर 0.97 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 0.70 लाख हेक्टेयर थी. छोटे मिलेट्स में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मक्का की बुवाई में अच्छा इजाफा हुआ है और इसका रकबा 29.16 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि जौ की बुवाई बढ़कर 7.38 लाख हेक्टेयर हो गई है. तिलहनों की कुल बुवाई बढ़कर 97.19 लाख हेक्टेयर रही है. इसमें सरसों और रेपसीड का रकबा सबसे ज्यादा बढ़ा है, जो 89.36 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. मूंगफली, कुसुम, सूरजमुखी और अलसी के रकबे में भी बढ़ोतरी हुई है, जबकि तिल की बुवाई में थोड़ी कमी देखी गई है.
पिछले साल की तुलना में 15.88 लाख हेक्टेयर अधिक बुवाई
कुल मिलाकर, सभी रबी फसलों का कुल रकबा बढ़कर 676.84 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल की तुलना में 15.88 लाख हेक्टेयर अधिक है. बुवाई बढ़ने की बड़ी वजह इस बार अच्छा मॉनसून रहा है, जिससे बिना सिंचाई वाले इलाकों में भी खेती आसान हुई