120 साल पुरानी मेरठ की गजक को जीआई टैग मिला, गुड़ और तिल से बनने वाली मिठाई की विदेशों में भी डिमांड

रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के महामंत्री ने कहा कि मेरठ में गजक का कारोबार 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है. हर सीजन में करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. ड्रायफ्रूट और देसी घी से बनी गजक सर्दियों में खास पसंद की जाती है. मेरठ की गजक अपनी खास खस्ता बनावट, संतुलित मिठास और तिल-गुड़ की सुगंध के लिए जानी जाती है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 8 Jan, 2026 | 05:22 PM

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की मशहूर गुड़ और तिल से बनी गजक को जीआई टैग मिल गया है. मेरठ में गुड़ और तिल से बनी गजक न केवल देश में बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुकी है. अब गजक को GI टैग (Geographical Indication) भी मिलने से इसकी ब्रांड वैल्यू और बढ़ गई है. वहीं, GI टैग मिलने से स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे. गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के महामंत्री ने कहा कि गजक का काम 100 साल से भी पुराना है. उन्होंने कहा कि यह गजक उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धित है.

मेरठ की गजक को मिला जीआई टैग

किसी भी क्षेत्रीय उत्पाद की लोकप्रियता जब देश-दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है, जिसके बाद जीआई टैग दिया जाता है. जीआई टैग यह बताता है कि वह उत्पाद किस जगह पर बना है और उसकी पहचान भी दर्शाता है. अब मेरठ की गजक को भी जीआई टैग से नवाजा गया है. भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत जीआई रजिस्ट्री, चेन्नई की ओर से दो दिन पहले मेरठ की पारंपरिक गजक को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग स्वीकृत किया गया है. यह टैग मेरठ की गजक की विशिष्ट पहचान, पारंपरिक निर्माण पद्धति और क्षेत्रीय विरासत को मान्यता देता है.

100 करोड़ का गजक कारोबार

मेरठ की रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के महामंत्री समीर थापर ने कहा कि मेरठ में गजक का कारोबार 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है. हर सीजन में करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. ड्रायफ्रूट और देसी घी से बनी गजक सर्दियों में खास पसंद की जाती है. मेरठ की गजक अपनी खास खस्ता बनावट, संतुलित मिठास और तिल-गुड़ की सुगंध के लिए जानी जाती है. यह पूरी तरह पारंपरिक तरीके से हाथों से तैयार की जाती है, जिसमें किसी तरह की कृत्रिम मिठास का प्रयोग नहीं होता. सर्दियों में यह स्वाद के साथ-साथ ऊर्जा देने वाली मिठाई मानी जाती है.

मेरठ की गजक की कीमत कितनी है

बाजार में मेरठ की गजक की कीमत आमतौर पर 300 से 500 रुपये प्रति किलो के बीच रहती है. ड्राई फ्रूट गजक या विशेष किस्मों से तैयार की गई गजक की कीमत इससे अधिक भी हो सकती है. मेरठ में गजक बनाने की परंपरा करीब 120 वर्ष से भी अधिक पुरानी मानी जाती है. पीढ़ी दर पीढ़ी यह परंपरा चली आ रही है और यही इसकी पहचान और लोकप्रियता का आधार है.

Meerut Gajak GI tag

गजक को जीआई टैग मिलने के बाद खुशी मनाते एसोसिएशन के पदाधिकारी.

गजक किन चीजों से बनती है और इसे बनाते कैसे हैं

गजक मुख्य रूप से तिल, गुड़, घी और थोड़े से मसालों से बनती है. पहले गुड़ को पकाया जाता है, फिर उसमें भुने हुए तिल मिलाए जाते हैं. इसके बाद मिश्रण को फैलाकर हाथों से पीटा जाता है और पतला किया जाता है, जिससे गजक में खास तरह का खस्तापन आता है. गजक बनाने में कई घंटों की लंबी प्रक्रिया लगती है. बनकर तैयार होने के बाद यह जुबान पर रखते ही घुल जाती है और मुंह को खुशबू और मिठास से सराबोर कर देती है.

जीआई टैग मिलने से क्या होता है

जीआई टैग (Geographical Indication) एक कानूनी पहचान है, जो उत्पाद की खासियत के लिए दिया जाता है. जीआई टैग मिलने से उत्पाद की असली पहचान सुरक्षित रहती है और नकली उत्पादों पर रोक लगती है. इससे स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को बेहतर दाम, बाजार और निर्यात के अवसर मिलते हैं, साथ ही उस क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा को भी संरक्षण मिलता है.

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Published: 8 Jan, 2026 | 05:17 PM

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