भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा हाल ही जारी मौसम अपडेट के बाद अब विश्व मौसम संगठन (WMO) ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है. WMO ने भविष्यवाणी की है कि इस साल के अंत तक अल नीनो का असर फिर से देखने को मिल सकता है. क्योंकि मौजूदा ला नीना धीरे-धीरे कमजोर हो रही है. अगर ऐसा होता है कि औसत से काफी कम बारिश हो सकती है. ऐसे में किसानों के सामने सिंचाई की समस्या खड़ी हो जाएगी.
अनुमान है कि 2026 के मध्य तक ENSO-न्यूट्रल स्थिति बनी रह सकती है, लेकिन मई से जुलाई के बीच तापमान बढ़ने की संभावना ज्यादा है और इसके बाद अल नीनो विकसित हो सकता है. हालांकि पूर्वानुमान पूरी तरह निश्चित नहीं हैं, क्योंकि इस दौरान भविष्यवाणी करना मुश्किल होता है. अगर अल नीनो बनता है तो इसका असर वैश्विक बारिश, तापमान और मौसम पर निर्भर क्षेत्रों पर पड़ सकता है. अल नीनो तब बनता है जब मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसके साथ हवा के रुख, वायुदाब और बारिश के पैटर्न में भी बदलाव आता है.
The recent weak La Niña event is expected to fade into ENSO (El Niño-Southern Oscillation) -neutral conditions which may swing to a warming El Niño episode later this year, according to the latest WMO El Niño/La Niña Update.
Check out the full update 👉 https://t.co/BIPsbctstt pic.twitter.com/YuJ98I7xnZऔर पढ़ें— World Meteorological Organization (@WMO) March 3, 2026
वर्ष 2023 में अल नीनो जून में शुरू हुआ था
अल नीनो का असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर पड़ता है. इससे मॉनसून कमजोर हो सकता है और सूखे जैसी स्थिति बन सकती है. वर्ष 2023 में अल नीनो जून में शुरू हुआ और करीब 11 महीने तक चला. इसका असर धान और दलहन जैसी फसलों के उत्पादन पर पड़ा और पैदावार कम हुई. इसके कारण खाद्य महंगाई भी बढ़ी. दो जापानी वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि इस बार सुपर अल नीनो बनने की संभावना है. साथ ही, इस दौरान हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति भी विकसित हो सकती है, जो मौसम पर अतिरिक्त प्रभाव डाल सकती है
अल नीनो बनने की आशंका लगभग 40 प्रतिशत
विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार मार्च- मई 2026 के दौरान ENSO-न्यूट्रल स्थिति (न अल नीनो, न ला नीना) रहने की संभावना करीब 60 प्रतिशत है. अप्रैल-जून में यह संभावना बढ़कर 70 प्रतिशत हो जाती है. वहीं मई- जुलाई के दौरान न्यूट्रल स्थिति की संभावना 60 प्रतिशत है, जबकि अल नीनो बनने की आशंका लगभग 40 प्रतिशत बताई गई है.
हालांकि लंबे समय के पूर्वानुमान में अनिश्चितता बढ़ जाती है. इसकी वजह ‘बोरियल स्प्रिंग प्रेडिक्टेबिलिटी बैरियर’ है, यानी उत्तरी गोलार्ध के वसंत मौसम में ENSO की सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल होता है. इस दौरान समुद्र और वातावरण के बीच तालमेल कमजोर रहता है और मौसमी बदलाव तेजी से होते हैं, जिससे मॉडल कम भरोसेमंद हो जाते हैं. इसलिए अल नीनो या ला नीना के बारे में पक्की जानकारी आमतौर पर गर्मियों तक ही स्पष्ट हो पाती है.
WMO की ताजा जानकारी के अनुसार, मार्च- मई 2026 में धरती की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा रहने का साफ संकेत है. भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में बारिश के पूर्वानुमान से पता चलता है कि ला नीना जैसी स्थिति अभी बनी हुई है. वहीं दुनिया के बाकी हिस्सों में मौसम के संकेत मिलेजुले और कम स्पष्ट हैं.
पूरे देश में औसत से बहुत ज्यादा गर्म मौसम रह सकता है
बता दें कि इसी हफ्ते IMD ने अपडेट जारी करते हुए कहा था कि इस बार पूरे देश में औसत से बहुत ज्यादा गर्म मौसम रह सकता है. उत्तर-पश्चिम भारत में मार्च का महीना कुछ ज्यादा ही गर्म रहेगा. इससे रबी फसलों के मुकसान पहुंच सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि 31 मई तक देश के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या बढ़ सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक, खासकर गेहूं और तिलहन उगाने वाले राज्यों में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है, जिससे फसल की पैदावार कम हो सकती है. ऐसे में एक्सपर्ट का कहना है कि पैदावार में गिरावट आने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं.