दलहन, तिलहन के मुकाबले MSP का सबसे ज्यादा फायदा उठा रहे धान-गेहूं के किसान, जानें वजह

भारत दाल और तिलहन में आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए भारी आयात करना पड़ता है. सरकार MSP बढ़ाकर और सहकारी संस्थाओं के जरिए खरीद कर इनका उत्पादन बढ़ाना चाहती है.

वेंकटेश कुमार
नोएडा | Updated On: 2 Jun, 2025 | 12:54 PM

केंद्र सरकार दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. क्योंकि दलहन और तिलहन के उत्पादन में देश अभी आत्मनिर्भर नहीं है. घरेलू डिमांड को पूरा करने के लिए भारी मात्रा में दाल और खाने वाले तेलों का आयात करना पड़ता है. हालांकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद जैसे कदमों से भी इनके प्रोडक्शन में सुधार नहीं हुआ है. फिर भी तिलहन और दलहन के मुकाबले धान-गेहूं की खेती करने वाले किसानों को MSP का ज्यादा लाभ मिल रहा है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, MSP का सबसे ज्यादा फायदा अभी भी धान और गेहूं जैसी अधिक पानी खर्च करने वाली फसलों को ही मिल रहा है. हालांकि सरकार ने दालों और तिलहन की खरीद कई गुना बढ़ाई है, लेकिन यह अभी भी गेहूं और चावल की खरीद के मुकाबले काफी कम है. दरअसल, धान और गेहूं की सरकारी खरीद ज्यादा इसलिए होती है, क्योंकि इनका मार्केटेबल सरप्लस बहुत अधिक होता है. साथ ही, सरकार को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) के तहत लगभग 80 करोड़ लोगों को चावल और गेहूं मुफ्त देना होता है, इसलिए भी इसकी खरीद ज्यादा की जाती है.

दालों का होता है आयात

भारत में अनाज तो भरपूर उगता है, लेकिन दालें और तेल का प्रोडक्शन पर्याप्त नहीं हैं, जिससे आयात करना पड़ता है. इससे महंगाई बढ़ती है और विदेशी मुद्रा का भी नुकसान होता है. मोदी सरकार ने किसानों को दालें और तिलहन उगाने के लिए दोतरफा रणनीति अपनाई है. यही वजह है कि इन फसलों के लिए गेहूं और चावल की तुलना में ज्यादा MSP घोषित किया जा रहा है, ताकि किसानों को अच्छा मुनाफा मिले.

सरकार किसानों से MSP पर फसल खरीदती है

इसके अलावा केंद्र सरकार के सहयोग और खाद्य मंत्रालय राज्य-समर्थित सहकारी संस्थाओं को इन फसलों की खरीद बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. भारत की खाद्य नीति में ‘प्रोक्योरमेंट’ (सरकारी खरीद) एक अहम हिस्सा है. इसका मतलब है कि सरकार किसानों से MSP पर फसल खरीदती है.  MSP वह न्यूनतम दाम होता है, जिस पर किसानों को उनकी लागत से कम से कम 50 फीसदी अधिक लाभ सुनिश्चित करने के लिए तय किया जाता है.

कुल 778.6 लाख टन अनाज खरीदा

हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार अभी भी चावल और गेहूं जैसी अनाज की फसलों की खरीद दालों और तिलहनों की तुलना में कहीं ज्यादा कर रही है. कृषि वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार ने कुल 778.6 लाख टन अनाज खरीदा, जिसमें 522.6 लाख टन चावल और 262.6 लाख टन गेहूं शामिल है.

 

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Published: 2 Jun, 2025 | 12:49 PM

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