सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को सलाह, धान-गेहूं की तरह दाल पर भी मिले MSP.. किसान खुद करने लगेंगे खेती
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कृषि नीति में बदलाव कर दालों की खेती को बढ़ावा देने का निर्देश दिया. किसानों के लिए उचित MSP और बिक्री की सुनिश्चित जगह तय करने की सलाह दी गई. ताकि आयोग और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर उत्तरी और मध्य भारत में गेहूं-धान की जगह दालें उगाई जा सकें.
Supreme Court: केंद्र सरकार धान-गेहूं की जगह दूसरी फसल की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. खास कर देश में दलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए दलहन मिशन चलाया जा रहा है. इस मिशन के तहत किसानों को सब्सिडी भी दी जा रही है. वहीं, अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कृषि नीति में बड़ा बदलाव लाने को कहा है. अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह विशेषज्ञों और किसानों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श करे और ऐसा लाभकारी ढांचा बनाए, जिससे किसान परंपरागत गेहूं और धान की जगह दालों की खेती करने के लिए प्रेरित हों. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नीति में दालों के लिए सुनिश्चित मूल्य (MSP) होना चाहिए.
दरअसल, शुक्रवार को यह सुनवाई एक पीआईएल (जनहित याचिका) पर हो रही थी, जिसमें सरकार द्वारा पीली मटर के आयात पर शुरू में कोई आयात शुल्क न लगाने के फैसले पर सवाल उठाया गया था. वर्तमान में इस पर 30 फीसदी आयात शुल्क है. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेङ्कटरमण ने मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पन्चोली की पीठ को बताया कि 2021 से 2024 के बीच दालों के उत्पादन में लगभग 30 लाख टन की कमी के कारण सरकार को कीमतें स्थिर करने और उपभोक्ताओं के हित की रक्षा के लिए पीली मटर का आयात करना पड़ा.
सरकार गेहूं, चावल और बाजरा के लिए MSP देती है
खुद किसान परिवार से आने वाले मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि सरकार गेहूं, चावल और बाजरा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देती है, लेकिन दालों के लिए नहीं. उन्होंने कहा कि जैसे ही आप दालों के लिए किसानों को उचित MSP देंगे, तो उसी क्षेत्र में गेहूं या धान के मुकाबले दालों की पैदावार बढ़ जाएगी. नहीं तो छोटे किसान दाल की खेती करने का जोखिम नहीं लेंगे, क्योंकि उन्हें पता नहीं होगा कि यह उनकी लागत और मेहनत पूरी करेगा या नहीं.
दालों की बिक्री के लिए भी निश्चित जगह दी जानी चाहिए
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि सरकार को कृषि मंत्रालय में उन लोगों से राय लेनी चाहिए जो असली किसानों की जरूरतें समझते हैं, न कि सिर्फ विदेशी डिग्रीधारकों से. उन्होंने यह भी कहा कि नीति में न केवल दालों के लिए सुनिश्चित मूल्य (MSP) होना चाहिए, बल्कि किसानों द्वारा उगाई गई दालों की बिक्री के लिए भी निश्चित जगह दी जानी चाहिए, ताकि दाल की खेती बढ़ सके.
22 फसलों के लिए MSP और गन्ने के लिए FRP की सिफारिश करता है
पीआईएल दाखिल करने वाले पक्ष के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश की यह राय हाल ही में कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की रिपोर्ट में भी बिल्कुल वैसी ही दिखाई दी है. यह आयोग कृषि मंत्रालय से जुड़ा है और 22 फसलों के लिए MSP और गन्ने के लिए FRP की सिफारिश करता है. पीठ ने आदेश में कहा कि केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों को बेहतर तालमेल और समझ विकसित करनी चाहिए और कृषि मंत्रालय के नेतृत्व में ऐसा तंत्र बनाना चाहिए, जिससे उत्तरी और मध्य भारत में गेहूं या धान की जगह दाल उगाई जा सके और दक्षिण भारत में अन्य फसलों के विकल्प के रूप में दाल की खेती को बढ़ावा मिले. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर दालों के लिए प्रोत्साहित MSP नहीं है, तो कम से कम किसानों को इतनी कीमत दी जानी चाहिए कि छोटे किसान अपनी लागत और मेहनत पूरी कर सकें.