अमेरिका से DDGS आयात पर भारत दे सकता है सीमित टैरिफ राहत, पशु चारा उद्योग को मिलेगी राहत

पोल्ट्री और पशुपालन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर DDGS आयात पर कुछ राहत मिलती है, तो इससे चारा कीमतों में स्थिरता आ सकती है. कई बार घरेलू बाजार में मक्का और अन्य चारा सामग्री की कीमत बढ़ने से पशुपालन उद्योग पर दबाव बढ़ जाता है.

नई दिल्ली | Updated On: 11 Mar, 2026 | 09:59 AM

India DDGS imports: भारत सरकार अमेरिका से आने वाले डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स (DDGS) के आयात पर सीमित टैरिफ राहत देने की योजना बना रही है. यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब देश में पशु चारे की लागत लगातार बढ़ रही है और पोल्ट्री तथा पशुपालन उद्योग को सस्ते प्रोटीन स्रोत की जरूरत महसूस हो रही है. सरकार का उद्देश्य यह है कि आयात से घरेलू उद्योग को राहत मिले, लेकिन साथ ही स्थानीय उत्पादकों के हितों को भी नुकसान न पहुंचे.

इंडिया सी ट्रेड न्यूज के अनुसार, इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका से आने वाले DDGS पर कम आयात शुल्क की सुविधा दी जा सकती है, लेकिन यह राहत केवल एक तय सीमा तक ही लागू होगी. यानी सरकार आयात की मात्रा पर सीमा तय करेगी, ताकि घरेलू बाजार में अचानक विदेशी उत्पादों की बाढ़ न आ जाए.

क्या है DDGS और क्यों बढ़ रही है इसकी मांग

DDGS दरअसल एथेनॉल उत्पादन की प्रक्रिया से निकलने वाला एक उप-उत्पाद है, जिसे पशुओं के लिए उच्च प्रोटीन वाले चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और ऊर्जा की अच्छी मात्रा होती है, इसलिए यह खास तौर पर पोल्ट्री, डेयरी और पशुपालन उद्योग में काफी लोकप्रिय है.

भारत में मुर्गीपालन और पशुपालन का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है. इसके साथ ही पशु चारे की मांग भी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में कई बार घरेलू उत्पादन इस मांग को पूरी तरह पूरा नहीं कर पाता. यही कारण है कि सरकार आयात के जरिए इस कमी को पूरा करने की संभावना तलाश रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर DDGS की सीमित मात्रा कम शुल्क पर आयात की जाती है, तो इससे पशु चारे की लागत में कुछ कमी आ सकती है. इससे पोल्ट्री और डेयरी उद्योग को भी फायदा मिलेगा.

आयात सीमा तय कर संतुलन बनाए रखने की कोशिश

सरकार की योजना है कि टैरिफ में छूट केवल एक तय आयात सीमा तक ही दी जाए. जब यह सीमा पूरी हो जाएगी, उसके बाद सामान्य आयात शुल्क ही लागू रहेगा. इस तरह सरकार एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है.

इस नीति का मकसद यह है कि घरेलू चारा उद्योग और किसानों को किसी तरह का नुकसान न हो, जबकि जरूरत पड़ने पर बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति भी उपलब्ध रहे. अधिकारियों का कहना है कि आयात की मात्रा और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी.

भारत-अमेरिका कृषि व्यापार संबंधों को भी मिलेगा बढ़ावा

इस कदम को भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में कृषि और खाद्य उत्पादों के व्यापार में तेजी आई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित टैरिफ राहत देने से भारत अमेरिकी बाजार के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बेहतर बना सकता है, वहीं घरेलू उद्योग के लिए भी संतुलित व्यवस्था बनाए रख सकता है.

चारा कीमतों को स्थिर रखने में मिल सकती है मदद

पोल्ट्री और पशुपालन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर DDGS आयात पर कुछ राहत मिलती है, तो इससे चारा कीमतों में स्थिरता आ सकती है. कई बार घरेलू बाजार में मक्का और अन्य चारा सामग्री की कीमत बढ़ने से पशुपालन उद्योग पर दबाव बढ़ जाता है.

ऐसे समय में DDGS जैसे विकल्प बाजार में उपलब्ध होने से उद्योग को राहत मिल सकती है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सरकार को आयात नीति बनाते समय घरेलू उत्पादकों के हितों का ध्यान रखना होगा.

संतुलित व्यापार नीति की झलक

व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह नीति एक संतुलित रणनीति को दर्शाती है. सरकार एक तरफ खाद्य और चारा सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और घरेलू उद्योग के बीच संतुलन भी बनाए रखना चाहती है.

Published: 11 Mar, 2026 | 09:54 AM

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