PDS में भारी गड़बड़ी का दावा, हर बोरी में 3 किलो कम चावल.. 200 करोड़ के नुकसान की आशंका

तमिलनाडु में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन सामग्री की आपूर्ति में बड़ी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. दावा है कि गोदामों में वैज्ञानिक वजन प्रणाली नहीं होने से हर साल 200 करोड़ रुपये से अधिक का चावल और अन्य राशन सामग्री गायब हो रही है. विशेषज्ञों ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सभी गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक वेटब्रिज लगाने की मांग की है.

नोएडा | Updated On: 29 Jun, 2026 | 03:09 PM

Tamil Nadu News: तमिलनाडु में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन सामग्री की आपूर्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है. आरोप है कि तमिलनाडु सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन (TNCSC) के गोदामों में वैज्ञानिक वजन प्रणाली नहीं होने के कारण हर साल 200 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का चावल, चीनी और अन्य आवश्यक वस्तुएं गायब हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि जिन चावल की बोरियों का वजन रिकॉर्ड में 50.65 किलोग्राम दर्ज किया जाता है, उनका वास्तविक वजन राशन दुकानों तक पहुंचते-पहुंचते केवल 47 से 48 किलोग्राम रह जाता है. चूंकि राशन दुकानों पर बोरियों को स्टोर करने से पहले दोबारा नहीं तौला जाता, इसलिए वजन की कमी का पता तभी चलता है जब बोरी खोलकर उपभोक्ताओं को चावल बांटा जाता है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गोदामों से राशन दुकानों तक भेजी जाने वाली बोरियों का वजन इलेक्ट्रॉनिक मशीनों  से दर्ज नहीं किया जाता, बल्कि कर्मचारियों द्वारा मैन्युअल रूप से लिखा जाता है. इसी वजह से गड़बड़ी की आशंका बढ़ जाती है. इस स्थिति के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर चावल और अन्य खाद्य सामग्री की संभावित चोरी या रिसाव की आशंका जताई जा रही है, जिससे सरकार को हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

हर बोरी का वजन 3 किलो तक कम

आरोप है कि राशन की प्रत्येक बोरी में 1 से 3 किलोग्राम तक वजन कम पाया जा रहा है. ऐसे में स्टॉक रिकॉर्ड को संतुलित करने के लिए राशन दुकानों के कर्मचारियों को कई बार उन लाभार्थियों के राशन कार्ड पर भी चावल वितरण दर्ज करना पड़ता है, जिन्होंने वास्तव में अपना राशन लिया ही नहीं होता. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कुछ राशन दुकान कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब उचित मूल्य की दुकानों (फेयर प्राइस शॉप्स) में पूरी वितरण प्रक्रिया डिजिटल हो चुकी है, तो गोदामों में अभी भी वजन का रिकॉर्ड मैन्युअल तरीके से क्यों रखा जा रहा है.

क्या कहते हैं कर्मचारी

एक कर्मचारी ने कहा कि अब पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीनें वजन मशीनों से जुड़ी हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को वितरित किए गए चावल की सटीक मात्रा का रिकॉर्ड और रसीद तैयार हो जाती है. लेकिन गोदामों से राशन दुकानों तक बोरियां ले जाने वाले ट्रकों के वजन को दर्ज करने के लिए अभी तक कोई इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था नहीं है. कर्मचारियों का कहना है कि यही कमी राशन सामग्री की कथित चोरी और वजन में गड़बड़ी की बड़ी वजह बन रही है.

कम हो जा रहा है बोरी का वजन

राशन दुकानों के कर्मचारियों का कहना है कि गोदाम से चावल भेजते समय हर बोरी का वजन 50 किलो चावल और 650 ग्राम बोरी मिलाकर 50.65 किलो दर्ज किया जाता है. लेकिन जब ये बोरियां राशन दुकानों तक पहुंचती हैं, तो उनका वजन कभी भी 50.65 किलो नहीं होता और उनमें हमेशा कमी पाई जाती है. कर्मचारियों का सवाल है कि जब पूरी राशन वितरण व्यवस्था डिजिटल हो चुकी है, तो गोदाम स्तर पर अभी तक डिजिटलीकरण क्यों नहीं किया गया.

तमिलनाडु में कुल 37,328 राशन दुकानें हैं

तमिलनाडु में कुल 37,328 राशन दुकानें हैं, जिनमें 26,618 पूर्णकालिक और 10,710 अंशकालिक दुकानें शामिल हैं. प्रत्येक दुकान को हर महीने कार्डधारकों की संख्या के आधार पर लगभग 175 से 200 चावल की बोरियां मिलती हैं. कर्मचारियों का दावा है कि एक राशन दुकान में हर महीने औसतन 300 से 400 किलो चावल की कमी सामने आती है. वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या का समाधान गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक वेटब्रिज (डिजिटल कांटा) लगाकर किया जा सकता है.

Published: 29 Jun, 2026 | 03:04 PM

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