अगस्त में बढ़ी थाली की लागत, प्याज 43 फीसदी तक हुआ महंगा..आलू-टमाटर ने दी राहत
अगस्त में घर की शाकाहारी और नॉन-वेज थाली महंगी हुई. क्रिसिल के मुताबिक, प्याज, खाने के तेल, चावल और LPG के बढ़े दाम से लागत बढ़ी. प्याज 43 फीसदी महंगा हुआ, जबकि आलू और टमाटर सस्ते हुए. आने वाले महीनों में प्याज और खाद्य तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं, जबकि आलू और टमाटर में राहत की उम्मीद है.
अगस्त में घर की शाकाहारी और नॉन-वेज थाली का खर्च बढ़ गया. क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले शाकाहारी थाली 1 फीसदी और नॉन-वेज थाली 5 फीसदी महंगी हुई. साथ ही प्याज, खाने के तेल, चावल और LPG के बढ़े दाम ने भी लागत बढ़ाई है, जबकि आलू और टमाटर सस्ते होने से थोड़ी राहत मिली.
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा ने मीडिया से कहा कि प्याज, तेल, चावल और LPG की ऊंची कीमतों के कारण अगस्त में थाली की लागत बढ़ी रही. अगस्त में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने घर की थाली का बजट बिगाड़ दिया. क्रिसिल के मुताबिक, अगस्त 2026 में प्याज का औसत भाव करीब 43 फीसदी बढ़कर 40 रुपये प्रति किलो हो गया, जो एक साल पहले 28 रुपये प्रति किलो था. महाराष्ट्र में देर से तैयार होने वाली फसल और भंडारण में रखे प्याज को नुकसान पहुंचने से सप्लाई कम हुई. रबी प्याज के उत्पादन में 5-6 फीसदी की गिरावट ने भी उपलब्धता पर असर डाला.
खाने का तेल और LPG महंगा, आलू-टमाटर ने दी राहत
खाने के तेल और LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई. अगस्त में इनके दाम सालाना आधार पर क्रमशः 11 फीसदी और 10 फीसदी बढ़े. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई में रुकावट और ऊर्जा की ऊंची कीमतों का असर भी देखने को मिला. हालांकि, थाली की कुछ चीजों ने राहत दी. आलू की कीमत 12 फीसदी और टमाटर की कीमत 28 फीसदी घट गई. रबी आलू का उत्पादन 2-3 फीसदी बढ़ने और रकबा बढ़ने से आलू सस्ता हुआ. वहीं, गर्मियों में टमाटर की बुवाई में देरी के कारण इसकी सप्लाई मई-जून के बजाय जुलाई-अगस्त में बढ़ी. इससे जुलाई-अगस्त में टमाटर की मंडी आवक पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी ज्यादा रही.
प्याज की तेजी से शाकाहारी थाली भी महंगी
नॉन-वेज थाली पर चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी का भी असर पड़ा. क्रिसिल के अनुमान के मुताबिक, ब्रॉयलर चिकन के दाम एक साल में करीब 10 फीसदी बढ़े, जिसकी मुख्य वजह पशु आहार की बढ़ती लागत रही. नॉन-वेज थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर का हिस्सा करीब आधा होता है. वहीं, अगस्त में महीने-दर-महीने भी शाकाहारी थाली की लागत 1 फीसदी बढ़ी. इसकी सबसे बड़ी वजह प्याज रहा. अगस्त में प्याज के दाम करीब 17 फीसदी बढ़ गए. हालांकि, टमाटर की कीमत में 7 फीसदी की गिरावट और दूसरी खाद्य वस्तुओं के दाम स्थिर रहने से थाली की लागत में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई.
अगले 2-3 महीने प्याज के दाम रह सकते हैं ऊंचे
वहीं, नॉन-वेज थाली की लागत महीने-दर-महीने 1 फीसदी घट गई. इसकी वजह ब्रॉयलर चिकन के दाम में करीब 4 फीसदी की गिरावट रही. सावन के महीने में चिकन की मांग कम होने से इसके दाम नीचे आए. क्रिसिल के मुताबिक, अगले 2-3 महीनों में प्याज के दाम ऊंचे रह सकते हैं. रबी प्याज की सीमित सप्लाई और खरीफ प्याज की आवक में देरी के कारण बाजार में प्याज की उपलब्धता पर दबाव बना रह सकता है. इससे आने वाले समय में प्याज की कीमतों में तेजी बनी रहने की आशंका है.
आलू-टमाटर के दाम से लेकर क्या है भविष्यवाणी
आने वाले महीनों में आलू के दाम में बड़ी तेजी की संभावना कम है. बाजार में पर्याप्त स्टॉक और पुराने माल की धीमी बिक्री के कारण कीमतें मोटे तौर पर स्थिर रह सकती हैं. हालांकि, दाम में हल्की बढ़ोतरी संभव है. वहीं, टमाटर के दाम फिलहाल नरम रहने की उम्मीद है. दक्षिण भारत के राज्यों से नई सप्लाई आने से कीमतों पर दबाव बना रहेगा. हालांकि, खरीफ फसल की आवक में देरी हुई और त्योहारों के दौरान मांग बढ़ी तो बाद में टमाटर महंगा हो सकता है.
महंगा रह सकता है खाद्य तेल
दालों के दाम एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है. तुअर दाल में मौसम की स्थिति और सीमित आयात के कारण तेजी का जोखिम है. वहीं, उड़द की नई आवक बढ़ने और आयात पर्याप्त रहने से इसके दाम नरम पड़ सकते हैं. खाने के तेल की कीमतें भी ऊंची बनी रह सकती हैं. क्रिसिल के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से माल ढुलाई और आयात की लागत बढ़ रही है. इसके अलावा, पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर और रेजिन की कीमतें बढ़ने से भी लागत पर दबाव है.