कृषि आय पर टैक्स छूट खत्म करने की तैयारी, छोटे किसानों के लिए टैक्स दायरे में आने वाली रकम तय

Tax on Agricultural Income : असम सरकार ने पिछले छह वर्षों से लागू कृषि आयकर छूट को बड़े करदाताओं के लिए समाप्त करने का फैसला किया है. इस टैक्स से प्राप्त राजस्व का उपयोग चाय बागान समुदायों के कल्याण और विकास के लिए किया जाएगा.

नोएडा | Updated On: 14 Aug, 2026 | 06:21 PM

कृषि से होने वाली कमाई पर टैक्स छूट समाप्त करने की तैयारी की जा रही है. असम सरकार ने कहा है कि राज्य के बड़े कृषि आय करदाताओं पर कृषि आयकर फिर से लागू किया जाएगा. जबकि, सालाना 10 लाख रुपए तक की आय वाले छोटे किसानों और चाय उत्पादकों को इससे पूरी तरह छूट दी जाएगी. वहीं, राज्य सरकार ने चाय उत्पादन सब्सिडी को बढ़ाने के साथ ही प्रीमियम किस्म की चाय उत्पादन के लिए प्रोत्साहन योजना का प्रस्ताव भी दिया है. ताकि, छोटे किसानों और चाय उत्पादकों के विकास को बढ़ावा दिया जा सके.

6 साल से लागू कृषि आयकर छूट समाप्त करने का फैसला

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पिछले छह वर्षों से लागू कृषि आयकर छूट को बड़े करदाताओं के लिए समाप्त करने का फैसला किया है. इस टैक्स से प्राप्त राजस्व का उपयोग चाय बागान समुदायों के कल्याण और विकास के लिए किया जाएगा. सीएम ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से छोटे चाय उत्पादकों और किसानों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि सालाना 10 लाख रुपए तक की कृषि आय वाले छोटे चाय उत्पादकों को कृषि आयकर नहीं देना होगा. उन्होंने बताया कि इस छूट से छोटे स्तर पर काम करने वाले चाय उत्पादकों को राहत मिलेगी.

कृषि आयकर सीमा छूट बढ़ाकर 10 लाख करने का प्रस्ताव

असम बजट 2026-27 में छोटे चाय उत्पादकों के लिए कृषि आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए सालाना करने का प्रस्ताव रखा गया था. वहीं, बड़े करदाताओं के लिए 1 अप्रैल 2026 से कृषि आयकर फिर से लागू करने की घोषणा की गई थी. सीएम ने कहा कि यह अंतर इसलिए जरूरी है क्योंकि कृषि आय उत्पादन, खेती के आकार, बाजार मूल्य और खर्चों के आधार पर काफी अलग-अलग हो सकती है.

आम किसानों पर अतिरिक्त बोझ डालना उद्देश्य नहीं – सीएम

सरकार की नीति के अनुसार टैक्स छूट का उद्देश्य यह पक्का करना है कि छोटे चाय उत्पादक किसी भी तरह से प्रभावित न हों. वहीं, बड़े कृषि और चाय उत्पादन से जुड़े कारोबारी राज्य के राजस्व में योगदान दें. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम किसानों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं है. उन्होंने कहा कि इस कर से मिलने वाली आय का उपयोग चाय बागान समुदायों के कल्याण, सामाजिक योजनाओं और विकास कार्यों पर किया जाएगा.

चाय उत्पादन सब्सिडी बढ़ाई और प्रीमियम किस्म के लिए प्रोत्साहन योजना

दरअसल, यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब असम सरकार चाय उद्योग को मजबूत करने के साथ-साथ चाय बागान श्रमिकों और उनसे जुड़े समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार कर रही है. वहीं, राज्य बजट में ऑर्थोडॉक्स और विशेष किस्म की चाय पर उत्पादन सब्सिडी 10 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 15 रुपए प्रति किलोग्राम करने का भी प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा माचा जैसी प्रीमियम चाय किस्मों को भी प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है.

Published: 14 Aug, 2026 | 06:17 PM

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