किसान फिर सड़कों पर! चंडीगढ़ बॉर्डर पर 7 दिन का धरना, MSP समेत इन मांगों पर आर-पार की तैयारी

Chandigarh Farmers Protest: पंजाब के किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन पर उतर आए हैं. संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 1 से 7 सितंबर तक चंडीगढ़ बॉर्डर पर सात दिन का धरना शुरू किया गया है. किसान MSP की कानूनी गारंटी, पुराने जल समझौतों को रद्द करने, कर्ज राहत और बेहतर फसल बीमा की मांग कर रहे हैं.

नोएडा | Published: 1 Sep, 2026 | 12:51 PM

Punjab Farmers Protest: पंजाब के किसान एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के रास्ते पर हैं. 1 सितंबर से चंडीगढ़ बॉर्डर पर किसानों का सात दिन का धरना शुरू हो गया है. पंजाब के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में किसान चंडीगढ़ बॉर्डर पहुंचे हैं. संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से यह प्रदर्शन 1 से 7 सितंबर तक किया जा रहा है. किसान एयरपोर्ट रोड के पास बैठकर अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर खास इंतजाम किए हैं. बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने के कारण बॉर्डर और आसपास के रास्तों पर आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है.

32 किसान संगठनों ने मिलकर तेज किया आंदोलन

भारतीय किसान यूनियन (BKU) लखोवाल के वरिष्ठ नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि 32 किसान संगठनों के गठजोड़ ने लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला किया है. उनका कहना है कि किसान लंबे समय से अपनी मांगें सरकार के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. ANI की रिपोर्ट के अनुसार लखोवाल का कहना है कि, किसान नेताओं ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, एसडीएम और डीसी समेत कई अधिकारियों को ज्ञापन दिए हैं. उनका दावा है कि करीब साढ़े चार साल से इन मुद्दों को उठाया जा रहा है, लेकिन किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ.

MSP पर कानूनी गारंटी की मांग

किसानों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी शामिल है. किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार जिन 22 फसलों के लिए MSP घोषित करती है, उसकी खरीद और कीमत को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए. किसानों का तर्क है कि केवल MSP घोषित करने से उन्हें पूरी सुरक्षा नहीं मिलती. उनका कहना है कि अगर MSP को कानूनी गारंटी दी जाती है तो फसल बेचते समय किसानों को कम कीमत मिलने की समस्या से राहत मिल सकती है.

पुराने जल समझौतों को रद्द करने की मांग

पंजाब के किसानों ने पानी के मुद्दे को भी आंदोलन का अहम हिस्सा बनाया है. किसान संगठन पुराने जल समझौतों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. हरिंदर सिंह लखोवाल ने पंजाब सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है. उनका कहना है कि पानी के मुद्दे पर राज्य सरकार को विधानसभा में अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए और पुराने समझौतों को खत्म करने की मांग करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर किसान संगठन पिछले कई वर्षों से सरकार के सामने अपनी बात रखते रहे हैं, लेकिन मांगों को लागू करने की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए.

किसानों की कर्जमाफी और फसल बीमा पर भी जोर

किसान संगठनों ने कर्ज का मुद्दा भी उठाया है. लखोवाल ने कहा कि अगर बड़े कॉरपोरेट समूहों के भारी-भरकम कर्ज माफ किए जा सकते हैं तो किसानों के कर्ज को लेकर भी सरकार को राहत देनी चाहिए. किसानों की मांग है कि उनके लिए उचित कर्ज राहत व्यवस्था लागू की जाए. इसके साथ ही एक प्रभावी फसल बीमा योजना लागू करने की भी मांग की गई है, ताकि प्राकृतिक आपदा या फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके.

FTA के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की तैयारी

किसान नेता ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को लेकर भी विरोध तेज करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि किसान संगठन इसके खिलाफ देशभर में आंदोलन करने के लिए तैयार हैं और कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन पहले से चल रहे हैं. किसानों का कहना है कि व्यापार समझौतों का असर सीधे कृषि उपज और किसानों की आय पर पड़ सकता है. ऐसे में सरकार को किसानों के हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए.

7 सितंबर तक जारी रहेगा धरना

चंडीगढ़ बॉर्डर पर शुरू हुआ किसानों का यह धरना 7 सितंबर तक चलेगा. किसान संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन को आगे बढ़ाने के विकल्प खुले हैं. फिलहाल प्रशासन की नजर किसानों के प्रदर्शन और यातायात व्यवस्था पर बनी हुई है. आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर सभी की नजर रहेगी.

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