Punjab Kisan Protest: पंजाब में किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज होने जा रहा है. किसान मजदूर मोर्चा की पंजाब इकाई सोमवार को (आज) राज्य के सभी 22 जिलों में एक दिन का धरना देने जा रही है. किसान संगठन जिला उपायुक्त यानी डीसी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करेंगे और सरकार से लंबे समय से चली आ रही मांगों पर कार्रवाई की मांग करेंगे. इन प्रदर्शनों का सबसे बड़ा केंद्र अमृतसर रहेगा, जहां डीसी कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में किसानों और मजदूरों के जुटने की उम्मीद है. किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि प्रदर्शनकारी दोपहर के आसपास एकत्र होंगे.
22 जिलों में होगा प्रदर्शन
किसान संगठनों के अनुसार, धरना अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, मोगा, लुधियाना, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, संगरूर, मानसा, पटियाला, मलेरकोटला, मोहाली, रूपनगर और फतेहगढ़ साहिब समेत राज्य के सभी 22 जिलों में होगा. संगठन का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल एक दिन का कार्यक्रम है, लेकिन अगर सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा. इसके तहत 14 सितंबर से पंजाब के मंत्रियों के घरों के बाहर पांच दिन तक प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है.
फसलों का उचित भाव और कर्जमाफी बड़ी मांग
किसानों की प्रमुख मांगों में बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू जैसी फसलों की लाभकारी कीमत पर खरीद शामिल है. किसान संगठनों का कहना है कि सिर्फ न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी तय करना काफी नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलना भी जरूरी है. इसके साथ ही किसानों और खेत मजदूरों की पूरी कर्जमाफी की मांग उठाई गई है. कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों और मजदूरों के परिवारों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गई है.
बाढ़, पानी और प्रदूषण पर भी चिंता
पंजाब में बार-बार आने वाली बाढ़, गिरते भूजल स्तर और हवा-पानी के प्रदूषण को लेकर भी किसान संगठन चिंतित हैं. मोर्चे ने इन समस्याओं से निपटने के लिए लंबे समय की ठोस नीति बनाने की मांग की है. नदियों के पानी के बंटवारे में रिपेरियन सिद्धांत यानी नदी के आसपास के क्षेत्रों को प्राथमिकता देने वाले नियम को लागू करने की मांग भी रखी गई है.
केंद्र के कई कानूनों का विरोध
किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से जुड़े कई कानूनों और बदलावों का भी विरोध किया है. इनमें बीज विधेयक/कानून 2025, सहकारी कानूनों में बदलाव, विकसित भारत-जी राम जी कानून 2025 और बिजली संशोधन विधेयक 2025 शामिल हैं. संगठन ने पंजाब में प्रीपेड बिजली मीटर खत्म करने की मांग भी की है. इसके अलावा राज्य की भूमि पूलिंग नीति वापस लेने और किसानों की सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण नहीं करने की मांग की गई है. जमीन लेने की स्थिति में उचित मुआवजे की मांग भी उठाई गई है.
पुराने मुकदमे वापस लेने और सामान लौटाने की मांग
किसान और मजदूर आंदोलनों के दौरान दर्ज पुलिस और रेलवे मामलों को वापस लेने की मांग भी मोर्चे ने की है. पराली जलाने से जुड़े मामलों को खत्म करने की मांग भी इसमें शामिल है. शंभू और खनौरी आंदोलनों के दौरान कथित तौर पर जब्त किए गए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और दूसरे सामान को वापस करने की मांग की गई है. प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग भी रखी गई है.
युवाओं के रोजगार और नशे पर भी जोर
किसान संगठनों ने जमीन पर लंबे समय से बसे किसानों और मजदूरों को मालिकाना हक देने की मांग की है. इसके अलावा पंजाब में नशे की समस्या रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और युवाओं को स्थायी रोजगार देने की मांग भी की गई है. मोर्चे ने ग्रामीण इलाकों की ड्रोन से बिना लोगों की सहमति के मैपिंग का भी विरोध किया है. साथ ही पाकिस्तान के साथ व्यापार गलियारा खोलने की मांग की गई है, ताकि पंजाब के किसानों, व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को नए बाजार मिल सकें. किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के मुताबिक, इन प्रदर्शनों का मकसद किसानों और खेत मजदूरों की समस्याओं को सरकार के सामने मजबूती से रखना और पंजाब सरकार पर उनकी मांगों को लेकर कार्रवाई का दबाव बनाना है.