टमाटर के रेट में भारी गिरावट, किसान नहीं निकाल पा रहे लागत.. 4 रुपये किलो कीमत
महाराष्ट्र में टमाटर किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. पुणे जिले की प्रमुख मंडियों में टमाटर का थोक भाव गिरकर 4-5 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. नारायणगांव मंडी में रोजाना करीब 31 हजार क्रेट की आवक हो रही है. किसानों के मुताबिक, कम कीमत में फसल बेचने से लागत भी नहीं निकल रही है.
Tomato Mandi Rate: महाराष्ट्र के पुणे जिले में टमाटर किसानों की परेशानी बढ़ गई है. राज्य की प्रमुख मंडियों में टमाटर के थोक भाव गिरकर करीब 4 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. इससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. किसानों के मुताबिक, टमाटर की खेती से लेकर तुड़ाई और मंडी तक पहुंचाने में काफी मजदूरी और खर्च आता है. आमतौर पर 20-22 किलो की एक क्रेट 300 से 600 रुपये में बिकती है. लेकिन इस समय इसकी कीमत घटकर 80 से 250 रुपये रह गई है. यानी किसानों को करीब 4-5 रुपये प्रति किलो ही मिल रहे हैं.
जुन्नर तहसील के किसान ईश्वर गायकर ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि मौजूदा भाव में टमाटर बेचने पर लागत भी पूरी नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि किसान लगभग लागत से कम कीमत पर टमाटर बेचने को मजबूर हैं. जुन्नर कृषि उपज बाजार समिति के चेयरमैन संजय काले के मुताबिक, राज्य की अलग-अलग मंडियों में रोजाना करीब 25,000 से 30,000 क्रेट टमाटर पहुंच रहे हैं. वहीं, सिर्फ नारायणगांव मंडी में रोजाना करीब 31,000 क्रेट की आवक हो रही है. यहां टमाटर की सप्लाई मांग के मुकाबले काफी ज्यादा है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया है.
मंडी में ज्यादा आवक से टमाटर के भाव गिरे
किसानों का कहना है कि टमाटर की खेती में लगातार देखभाल और काफी खर्च होता है. फसल में बार-बार दवा का छिड़काव, पौधों को सहारा देना, तुड़ाई, छंटाई और पैकिंग करनी पड़ती है. साथ ही टमाटर को ज्यादा पकने और खराब होने से बचाने के लिए समय पर तुड़ाई जरूरी होती है. जुन्नर तहसील के किसान ईश्वर गायकर ने बताया कि टमाटर की खेती में पौध, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर काफी पैसा खर्च होता है. मौजूदा समय में बाजार में जरूरत से ज्यादा टमाटर पहुंच रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी फसल का सही भाव नहीं मिल रहा है.
फसल न बेचें तो खराब होने का डर
टमाटर जल्दी खराब होने वाली फसल है और इसे लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता. ऐसे में किसानों के पास कम कीमत पर भी फसल बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. किसानों का कहना है कि अगर वे टमाटर नहीं बेचेंगे तो खेत में ही फसल खराब हो जाएगी. खेड़ तहसील के टमाटर किसान अक्षय शिंदे ने कहा कि मौजूदा भाव पर टमाटर बेचने से खेती में किया गया खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों के सामने ऐसी स्थिति है कि फसल बेचें तो लागत नहीं निकलती और नहीं बेचें तो टमाटर खराब होने का खतरा रहता है.
टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट और स्टोरेज सुविधा बनाने की मांग
किसान दीपक उरकिडे ने कहा कि किसानों की मेहनत और खर्च पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि पूरे सीजन में कई बार मजदूर लगाने पड़ते हैं और परिवहन का खर्च भी बढ़ गया है. फसल बेचने के बाद किसानों के पास अगली फसल की तैयारी के लिए बहुत कम पैसा बचता है. व्यापारियों और मंडी अधिकारियों के मुताबिक, छोटे और कम गुणवत्ता वाले टमाटरों को सबसे कम भाव मिल रहा है, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटर अपेक्षाकृत ज्यादा कीमत पर बिक रहे हैं. किसानों ने सरकार से टमाटर की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है. इसके अलावा उन्होंने टमाटर से बने उत्पादों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट और फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए तापमान और नमी नियंत्रित स्टोरेज की सुविधा विकसित करने की मांग की है.