UP-दिल्ली में राशन लेने का बदलेगा तरीका! डिजिटल रुपये से खरीद सकेंगे अनाज, जानें पूरी व्यवस्था
Digital Ration Card: केंद्र सरकार राशन वितरण को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल रुपये आधारित खाद्य सब्सिडी व्यवस्था का विस्तार करने की तैयारी कर रही है. इसके तहत लाभार्थियों को मिलने वाली सब्सिडी डिजिटल रुपये वॉलेट में भेजी जाएगी और इसका इस्तेमाल सिर्फ तय राशन दुकानों से खाद्यान्न खरीदने में किया जा सकेगा.
PMGKAY Digital Rupee: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत राशन वितरण को और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार डिजिटल रुपये का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रही है. इसके तहत खाद्य सब्सिडी की राशि सीधे सामान्य बैंक खाते में भेजने के बजाय लाभार्थी के डिजिटल रुपये वॉलेट में भेजी जा सकती है.
इस डिजिटल राशि का इस्तेमाल सिर्फ तय राशन दुकानों और सूचीबद्ध दुकानदारों से खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जा सकेगा. यानी सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी को दूसरे काम में खर्च नहीं किया जा सकेगा. इस व्यवस्था का मुख्य मकसद राशन वितरण में फर्जीवाड़ा, सब्सिडी की चोरी और कालाबाजारी जैसी समस्याओं को कम करना है.
इन राज्यों में शुरू होगा अगला चरण
CBDC आधारित खाद्य सब्सिडी व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट पहले गुजरात, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली में आजमाया जा चुका है. अब सरकार इसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है. इस व्यवस्था का पहला पायलट 15 फरवरी 2026 को गुजरात में शुरू किया गया था. इसके बाद 26 फरवरी को पुडुचेरी में इसका परीक्षण किया गया. मिले अनुभवों के आधार पर 14 अगस्त को चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली में भी इसे शुरू किया गया.
हर महीने 78.85 करोड़ लोगों को मिलता है राशन
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश में करीब 78.85 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने खाद्यान्न दिया जाता है. इसके लिए केंद्र सरकार करीब 19,000 करोड़ रुपये की खाद्य सब्सिडी खर्च करती है. इतनी बड़ी व्यवस्था में सब्सिडी और राशन की निगरानी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है. डिजिटल रुपये के इस्तेमाल से सरकार को यह पता लगाने में आसानी हो सकती है कि सब्सिडी कब, कहां और किस राशन दुकान पर इस्तेमाल हुई.
स्मार्टफोन और सामान्य मोबाइल दोनों से मिलेगा फायदा
नई डिजिटल व्यवस्था को इस तरह तैयार करने की योजना है कि स्मार्टफोन के साथ सामान्य मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले लोग भी इसका लाभ ले सकें. स्मार्टफोन यूजर्स राशन की दुकान पर लगे QR कोड को स्कैन कर डिजिटल रुपये से भुगतान कर सकेंगे. इसके बाद दुकानदार का तय मार्जिन और सरकार की सब्सिडी सिस्टम में दर्ज हो जाएगी. वहीं, सामान्य मोबाइल फोन वाले लाभार्थियों को SMS के जरिए OTP आधारित डिजिटल वाउचर दिया जा सकता है. राशन दुकानदार सिस्टम में OTP दर्ज करके लेनदेन पूरा कर सकेगा.
फर्जी राशन और कालाबाजारी पर लगेगी रोक
मौजूदा राशन व्यवस्था में फर्जी एंट्री, राशन की कालाबाजारी और सब्सिडी के गलत इस्तेमाल जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं. डिजिटल रुपये की रियल-टाइम निगरानी से सरकार के लिए ऐसे लेनदेन पर नजर रखना आसान हो सकता है. अगर लाभार्थी तय समय में डिजिटल कूपन का इस्तेमाल नहीं करता है, तो कुछ परिस्थितियों में राशि सरकारी खाते में वापस लौटाई जा सकती है. इससे फर्जी रिकॉर्ड बनाकर सब्सिडी का गलत इस्तेमाल करने की गुंजाइश कम हो सकती है.
डिजिटल रुपये से सिर्फ राशन ही खरीद पाएंगे
इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह होगी कि डिजिटल सब्सिडी उद्देश्य आधारित होगी. यानी लाभार्थी इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ तय खाद्यान्न खरीदने के लिए कर सकेगा. इसे नकद में निकालना या मोबाइल रिचार्ज, शराब या दूसरे सामान खरीदने में इस्तेमाल करना संभव नहीं होगा. इससे सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सब्सिडी का पैसा उसी काम में खर्च हो, जिसके लिए उसे दिया गया है.
क्या है CBDC?
CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल मुद्रा है. आसान भाषा में इसे रुपये के डिजिटल रूप की तरह समझ सकते हैं. CBDC और UPI एक जैसी चीजें नहीं हैं. UPI पैसे को एक बैंक खाते से दूसरे खाते में भेजने का माध्यम है, जबकि CBDC खुद एक डिजिटल मुद्रा है. CBDC की एक खासियत यह भी है कि इसे किसी खास उद्देश्य के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है.
राशन व्यवस्था में क्या बदलेगा?
अगर यह व्यवस्था बड़े स्तर पर लागू होती है तो सरकार को राशन वितरण की पूरी प्रक्रिया पर ज्यादा डिजिटल निगरानी मिल सकती है. फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाने, सब्सिडी के लीकेज को कम करने और राशन खरीद का रिकॉर्ड रखने में मदद मिल सकती है. साथ ही, सरकार के पास यह जानकारी भी रहेगी कि सब्सिडी का इस्तेमाल कब और कहां हुआ. हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि गांवों और दूरदराज के इलाकों में डिजिटल सुविधा, मोबाइल नेटवर्क और लोगों की डिजिटल समझ कितनी मजबूत है. ऐसे में पायलट प्रोजेक्ट से मिले अनुभवों के आधार पर आगे की व्यवस्था तय करना अहम होगा.