भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बनाए रखते हुए अल नीनो को एक बड़ा जोखिम बताया. इस चेतावनी ने भविष्य के पॉलिसी फैसलों में मॉनसून से जुड़ी महंगाई और खेती के उत्पादन को अहम बना दिया है. कहा गया है कि खराब या असमान बारिश फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ा सकती है और आखिरकार कुल कंज्यूमर महंगाई को प्रभावित कर सकती है, जिससे RBI के लिए मध्यम अवधि के महंगाई के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है.
RBI ने अल नीनो को सबसे बड़े जोखिमों में से एक बताया
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को भारत के आर्थिक आउटलुक के लिए अल नीनो को सबसे बड़े जोखिमों में से एक बताया. उन्होंने चेतावनी दी कि कम और असमान मॉनसून बारिश खेती को प्रभावित कर सकती है और आने वाले महीनों में महंगाई की स्थिति को मुश्किल बना सकती है.
मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) के रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बनाए रखने के फैसले की घोषणा करते हुए मल्होत्रा ने जियोपॉलिटिकल तनाव, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और ग्लोबल ट्रेड में रुकावटों के साथ-साथ ‘अल नीनो’ को भी एक अहम अनिश्चितता बताया. उनकी बातों से संकेत मिलता है कि मौसम की यह घटना RBI के महंगाई और आर्थिक विकास के आकलन को प्रभावित करने वाला एक अहम कारक बन गई है.
अल नीनो से जुड़े मौसम पैटर्न से खेती का आउटलुक अनिश्चित
RBI गवर्नर ने पॉलिसी की घोषणा में कहा कि ‘अल नीनो’ से जुड़े मौसम के पैटर्न के कारण खेती का आउटलुक अनिश्चित बना हुआ है. RBI गवर्नर ने कहा कि आगे देखते हुए ‘अल नीनो’ की स्थितियों के बीच कम और असमान मॉनसून के कारण खेती की संभावनाएं अनिश्चित हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि आउटलुक चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, लेकिन जलाशयों में पानी का अच्छा स्तर और फसल विविधीकरण (crop diversification), जलवायु-अनुकूल खेती और जल संरक्षण जैसी सरकारी पहल से खेती के सेक्टर को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.
गवर्नर का वक्तव्य : 5 अगस्त 2026
Governor’s Statement: August 5, 2026https://t.co/FIvA24XSVo— ReserveBankOfIndia (@RBI) August 5, 2026
RBI के लिए अल नीनो चिंता का विषय क्यों है
RBI की चिंता सिर्फ बारिश को लेकर नहीं है, बल्कि महंगाई पर इसके असर को लेकर है. गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि सेंट्रल बैंक को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में हेडलाइन महंगाई बढ़ेगी और फिर फाइनेंशियल ईयर के आखिर में कम हो जाएगी. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि मौसम की स्थितियां अनिश्चितता का एक अहम कारण बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि बारिश के समय और जगह के हिसाब से बंटवारे पर अल नीनो का असर एक बड़ा जोखिम बना हुआ है. उन्होंने कहा कि सप्लाई का सही मैनेजमेंट और अनाज का पर्याप्त स्टॉक कुछ दबाव को कम करने में मदद कर सकता है.
महंगाई आउटलुक को और मुश्किल बना सकते हैं ये फैक्टर
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने साफ किया कि अल नीनो उन कई जोखिमों में से एक है जिन पर RBI एक साथ नजर रख रहा है. उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, अल नीनो, जियोपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण आर्थिक आउटलुक धुंधला बना हुआ है. इसके अलावा उन्होंने ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और चल रही जियोपॉलिटिकल घटनाओं को ऐसे कारकों के तौर पर बताया जो महंगाई के आउटलुक को और मुश्किल बना सकते हैं.