रोटी-आटे के बढ़ सकते हैं दाम! घरेलू बाजार में 4 फीसदी तक चढ़े गेहूं के भाव, रूस-यूक्रेन तनाव ने बढ़ाई चिंता

Wheat Price Hike: घरेलू बाजार में गेहूं के दाम में तेजी देखने को मिल रही है. 17 जुलाई से 17 अगस्त के बीच कई प्रमुख मंडियों में गेहूं 4 फीसदी तक महंगा हुआ है. काला सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन से सप्लाई को लेकर चिंता के कारण वैश्विक कीमतों पर भी दबाव है.

नोएडा | Published: 18 Aug, 2026 | 08:22 AM

Wheat Prices in India: गेहूं की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने की चिंता बढ़ा रहा है. घरेलू बाजार में पिछले कुछ समय से गेहूं के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं. 17 अगस्त तक देश की कई प्रमुख मंडियों में गेहूं की कीमतों में 0.5 फीसदी से लेकर करीब 4 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गेहूं की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में आटा और उससे बने उत्पाद महंगे होने की आशंका जताई जा रही है.

कई मंडियों में बढ़े गेहूं के भाव

NCDEX (नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड) के मुताबिक, 17 जुलाई से 17 अगस्त के बीच राजकोट, दिल्ली, कानपुर, कोटा और इंदौर जैसी मंडियों में गेहूं के दाम बढ़े हैं. राजकोट में भाव 2,600 रुपये से बढ़कर 2,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गया. वहीं दिल्ली में गेहूं का भाव 2,782.50 रुपये से बढ़कर 2,870 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया.

मंडी 17 जुलाई का भाव 17 अगस्त का भाव बढ़ोतरी
राजकोट 2,600 रुपये 2,700 रुपये 3.85 फीसदी
दिल्ली 2,782.50 रुपये 2,870 रुपये 3.14 फीसदी
कानपुर 2,620 रुपये 2,700 रुपये 3.05 फीसदी
कोटा 2,657.50 रुपये 2,700 रुपये 1.60 फीसदी
इंदौर 2,695 रुपये 2,708.75 रुपये 0.51 फीसदी

घरेलू बाजार के साथ विदेश में भी तेजी

घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों में तेजी के पीछे सिर्फ देश की मांग नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी बड़ी वजह मानी जा रही है. शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड में गेहूं के वायदा सौदों में हाल के दिनों में तेजी आई है. वहीं, यूरोपीय बाजारों में भी गेहूं के दाम मजबूत हुए हैं. काला सागर क्षेत्र (Black Sea Region) में बढ़ता तनाव इस पूरी स्थिति को और गंभीर बना रहा है. रूस और यूक्रेन दुनिया के बड़े गेहूं निर्यातकों में शामिल हैं. दोनों देशों से जुड़े युद्ध और निर्यात पर असर पड़ने की आशंका से वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. अगर इस क्षेत्र से गेहूं की आपूर्ति प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है.

गेहूं महंगा हुआ तो आटा भी पड़ेगा भारी

गेहूं सिर्फ एक फसल नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की थाली का अहम हिस्सा है. घरों में रोटी से लेकर ब्रेड, बिस्किट और दूसरे खाद्य उत्पादों तक गेहूं का इस्तेमाल होता है. इसलिए गेहूं के दाम बढ़ने का असर धीरे-धीरे दूसरे खाद्य उत्पादों पर भी दिखाई दे सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक महीने में मंडियों में गेहूं की कीमत करीब 3.85 फीसदी तक बढ़ चुकी है. इससे गेहूं से बनने वाले अन्य उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है. इसका सीधा असर खाद्य महंगाई पर पड़ने की आशंका है.

आयात और सप्लाई पर भी नजर

भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव काफी जरूरी है. अगर वैश्विक बाजार में गेहूं महंगा होता है और घरेलू सप्लाई पर भी दबाव बनता है, तो सरकार को कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं. फिलहाल बाजार की नजर काला सागर क्षेत्र के हालात, रूस-यूक्रेन युद्ध और आने वाले दिनों में वैश्विक गेहूं आपूर्ति पर टिकी हुई है. तनाव बढ़ता है तो गेहूं की कीमतों में और तेजी आ सकती है. इसका असर आखिरकार आम आदमी की रसोई के बजट पर पड़ सकता है.

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