बदलते मौसम में पशुपालकों के लिए बड़ा खतरा.. ये 2 रोग कर सकते हैं भारी नुकसान, जानें बचाव के टिप्स

Dairy Farming Tips: मौसम बदल रहा है और सिर्फ हमारे लिए ही नहीं, हमारे पशुओं के लिए भी चुनौती लेकर आया है. खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियां अब आम बात हो गई हैं. अगर हम समय रहते इसपर ध्यान न दें, तो पशु का दूध कम होगा, पशु कमजोर होंगे और सारी मेहनत का फायदा पानी में चला जाएगा.

नोएडा | Updated On: 24 Jan, 2026 | 01:16 PM
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खुरपका और मुंहपका एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से पशुओं के मुंह और खुर में छाले डाल देता है. इसके लक्षणों में तेज बुखार, लार टपकना, लंगड़ापन और खाने-पीने में कमी शामिल हैं. यदि समय पर इलाज न किया जाए, तो पशु कमजोर होकर गिर सकता है.

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इस रोग से प्रभावित पशु का दूध उत्पादन 80% तक घट सकता है. साथ ही, भूख कम लगने और कमजोरी के कारण पशु की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति भी बिगड़ जाती है.

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खुरपका और मुंहपका से बचाव का सबसे असरदार तरीका है नियमित टीकाकरण. पशुपालकों को साल में कम से कम दो बार अपने पशुओं का टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए.

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यदि कोई पशु इस रोग से संक्रमित हो जाए, तो उसे तुरंत अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग करना आवश्यक है. इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है और स्वस्थ पशु सुरक्षित रहते हैं.

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पशुओं के शेड, बार्डर और मुंह-खुर की नियमित सफाई बहुत जरूरी है. साफ-सुथरी जगह और साफ वातावरण में पशु बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं और उनकी उत्पादन क्षमता बनी रहती है.

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गर्भवती पशु इस रोग से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. खुरपका और मुंहपका होने पर उनका बच्चा गिर सकता है और दूध उत्पादन में कमी आ सकती है. इसलिए टीकाकरण और समय पर पशु चिकित्सक से परामर्श बेहद जरूरी है.

Published: 24 Jan, 2026 | 01:16 PM

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