Goat Farming: गलत नस्ल चुनी तो डूब जाएगा पूरा बिजनेस! यहां जानें मांस और दूध के लिए किस नस्ल का करें पालन
Goat Farming Business: आज के समय में किसान बकरी पालन को कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला बिजनेस मानते हैं. गांव से लेकर शहर तक कई लोग इसे कमाई का आसान जरिया समझकर शुरू कर देते हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि सिर्फ बकरी पाल लेना ही सफलता की गारंटी नहीं. अगर आपने अपने बिजनेस के अनुसार सही नस्ल का चुनाव नहीं किया, तो मुनाफे की जगह घाटा आपका इंतजार कर सकता है.
बकरी पालन को कम लागत और ज्यादा मुनाफे वाला व्यवसाय माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह आय का मजबूत सोर्स बन सकता है. लेकिन कई बार पालकों को भारी नुकसान भी उठाना पड़ता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है बिना योजना और सही जानकारी के बकरी पालन शुरू करना.
अक्सर देखा जाता है कि पालक मांस या दूध के व्यवसाय के लिए किसी भी नस्ल की बकरी पाल लेते हैं. हर नस्ल की अपनी विशेषता होती है, कुछ मांस के लिए बेहतर होती हैं तो कुछ दूध उत्पादन के लिए. उद्देश्य से मेल न खाने वाली नस्ल चुनने पर उत्पादन कम होता है.
यदि कोई पालक मांस के व्यवसाय में उतरना चाहता है, तो उसे ब्लैक बंगाल नस्ल का चयन करना चाहिए. यह नस्ल खास तौर पर मांस की गुणवत्ता और स्वाद के लिए जानी जाती है. इसका मांस कोमल और स्वादिष्ट होता है, जिसकी बाजार में अधिक मांग रहती है.
विश्व प्रसिद्ध चम्पारण मटन के लिए भी ज्यादातर ब्लैक बंगाल बकरों का उपयोग किया जाता है. इस नस्ल के मांस का स्वाद और बनावट अलग होती है, जो हांडी मटन जैसी डिश में बेहतरीन परिणाम देती है.
अगर आप दूध उत्पादन के लिए बकरी पाल रहे हैं, तो जमनापारी, सिरोही और बर्बरी नस्ल की बकरियां ज्यादा फायदेमंद मानी जाती हैं. ये नस्लें ब्लैक बंगाल जैसी मांस नस्लों की तुलना में ज्यादा दूध देती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ये बकरियां रोज लगभग ढाई लीटर तक दूध देने में सक्षम होती हैं.
इन नस्लों का दूध बेहद पौष्टिक माना जाता है और कई बीमारियों में लाभकारी बताया जाता है. इसके अलावा, बकरी के दूध से नेचुरल साबुन और अन्य उत्पाद भी बनाए जाते हैं. ऐसे में पालक केवल कच्चा दूध बेचने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वैल्यू एडेड प्रोडक्ट बनाकर अपनी कमाई कई गुना बढ़ा सकते हैं.