सिंचाई की टेंशन खत्म! बाजरा-ज्वार समेत अगस्त में करें इन फसलों की बुवाई, कम पानी में होगी अच्छी पैदावार
Millet Farming: अगस्त का महीना उन किसानों के लिए काफी अहम है, जिनके खेतों में सिंचाई की सुविधा नहीं है और खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती है. ऐसे में कम पानी में तैयार होने वाली मोटे अनाज की फसलें किसानों के लिए अच्छा विकल्प बन सकती हैं. बाजरा, ज्वार, रागी और कोदो जैसी फसलें कम नमी में भी उग सकती हैं और इनकी खेती में लागत भी अपेक्षाकृत कम आती है. अगर किसान सही समय पर खेत तैयार करके अच्छी बारिश के बाद बुवाई करें, तो सीमित पानी में भी बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं.
अगस्त में जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा कम है, वे बाजरा, ज्वार, रागी और कोदो जैसी फसलों की बुवाई कर सकते हैं. इन फसलों को कम पानी की जरूरत होती है. इससे कम बारिश वाले इलाकों के किसानों के लिए खेती का जोखिम कुछ कम हो सकता है.
मोटे अनाज मिट्टी में मौजूद नमी का अच्छी तरह इस्तेमाल कर लेते हैं. इसलिए जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा कम है या किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं, वहां बाजरा, ज्वार, रागी और कोदो जैसी फसलों की खेती अच्छा विकल्प हो सकती है.
खेत की एक-दो बार गहरी जुताई करने के बाद जमीन को अच्छी तरह समतल कर लें. इससे बारिश का पानी पूरे खेत में समान रूप से पहुंचेगा और मिट्टी में नमी ज्यादा समय तक बनी रहेगी. इससे फसल की बढ़वार भी बेहतर हो सकती है.
खेत तैयार करते समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर डालें. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और मिट्टी में नमी ज्यादा समय तक बनी रहती है. इससे फसल को अच्छी बढ़वार के लिए जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं.
अगस्त में अच्छी बारिश होने के बाद जब खेत में पर्याप्त नमी हो जाए, तभी बुवाई करना बेहतर रहेगा. किसान प्रमाणित और अच्छी क्वालिटी के बीज इस्तेमाल करें. साथ ही, बुवाई से पहले बीज का उपचार जरूर करें, ताकि फसल को शुरुआत में ही कीट और बीमारियों से बचाया जा सके.
बीजों को बहुत ज्यादा गहराई में न बोएं और पौधों के बीच सही दूरी रखें. इससे पौधों को हवा, धूप और जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिलेंगे और उनकी बढ़वार अच्छी होगी. इसके अलावा, मोटे अनाज की खेती में पानी, खाद और दूसरी चीजों पर खर्च भी कम आता है.