गुजरात में MSP खरीद के दौरान AI से हो रही जांच, 10 केंद्रों पर मशीन से हो रही क्वालिटी जांच
AI Paddy Testing: गुजरात में MSP पर खरीदी जाने वाली धान की क्वालिटी जांच अब AI की मदद से की जा रही है. KMS 2025-26 के पायलट प्रोजेक्ट में चार जिलों के 10 खरीद केंद्रों पर 6,191 सैंपल की जांच हुई. इनमें 54.6 फीसदी सैंपल ग्रेड A और 45.4 फीसदी कॉमन ग्रेड पाए गए, जबकि 341 सैंपल रिजेक्ट हुए.
Gujarat Paddy Procurement: गुजरात में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जाने वाली धान की जांच अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से की जा रही है. राज्य सरकार ने धान की क्वालिटी जांच को तेज और ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए चार जिलों के 10 खरीद केंद्रों पर AI आधारित ग्रेन एनालाइजर लगाया है. यह व्यवस्था खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) 2025-26 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई. इस दौरान AI मशीनों से हजारों धान के सैंपल की जांच की गई. सरकार का कहना है कि इस तकनीक से धान की क्वालिटी जांच में एकरूपता आएगी और किसानों को भी खरीद प्रक्रिया को लेकर ज्यादा भरोसा होगा.
6,191 सैंपल की AI से हुई जांच
गुजरात स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन के मुताबिक, पायलट प्रोजेक्ट के दौरान कुल 6,191 धान के सैंपल AI सिस्टम से जांचे गए. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 3,379 सैंपल यानी 54.6 फीसदी ग्रेड A पाए गए, जबकि 2,812 सैंपल यानी 45.4 फीसदी कॉमन ग्रेड में रखे गए. जांच के दौरान 341 सैंपल रिजेक्ट भी हुए. यह पायलट प्रोजेक्ट अहमदाबाद, आनंद, महिसागर और पंचमहल जिलों के 10 खरीद केंद्रों पर चलाया गया. इन केंद्रों पर कुल 13,334 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था.
धान में क्या-क्या जांचती है AI मशीन?
AI आधारित ग्रेन एनालाइजर सिर्फ धान को देखकर ग्रेड तय नहीं करता, बल्कि कई जरूरी चीजों की जांच करता है. इसमें धान में मौजूद बाहरी पदार्थ, खराब या रंग बदले हुए दाने, अधपके या सिकुड़े हुए दाने और दूसरी किस्म के अनाज की मिलावट जैसी चीजें देखी जाती हैं. इसके अलावा धान में नमी की मात्रा भी जांची जाती है. ये सभी बातें धान की क्वालिटी तय करने में अहम होती हैं. इस तरह मशीन से जांच होने पर सैंपल की क्वालिटी का आकलन ज्यादा तेजी से किया जा सकता है.
धान रिजेक्ट होने के मामले में भी अंतर
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अलग-अलग खरीद केंद्रों पर रिजेक्शन की स्थिति अलग रही. ढोलका में सबसे ज्यादा 24 फीसदी सैंपल रिजेक्ट हुए. वहीं विरमगाम में एक भी सैंपल रिजेक्ट नहीं हुआ. सरकार के मुताबिक, AI सिस्टम को चलाने के लिए खरीद केंद्र पर लगातार बिजली और एक कर्मचारी की जरूरत होती है. इसके मुकाबले मौजूदा थर्ड पार्टी ग्रेडिंग व्यवस्था में सैंपल लेने और वैज्ञानिक उपकरणों से जांच करने के लिए दो लोगों की जरूरत पड़ती है.
गेहूं और दूसरी फसलों की भी होती है MSP पर खरीद
गुजरात में MSP व्यवस्था के तहत सिर्फ धान ही नहीं, बल्कि गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा और रागी जैसी फसलों की भी खरीद की जाती है. इन फसलों की खरीद सर्वे और ग्रेडिंग एजेंसियों के जरिए तय क्वालिटी मानकों के आधार पर होती है. सरकार का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए लोगों तक पहुंचने वाले खाद्यान्न की क्वालिटी बनाए रखना भी जरूरी है. गेहूं और चावल की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) के तय मानकों के अनुसार की जाती है, जबकि MSP पर खरीदे जाने वाले दूसरे अनाज के लिए केंद्र सरकार की निर्धारित स्पेसिफिकेशन लागू होती हैं.
खाद्य सामग्री की क्वालिटी पर भी सख्त निगरानी
गुजरात स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन के मुताबिक, तूर दाल, चना, खाने का तेल, चीनी और डबल फोर्टिफाइड नमक जैसी चीजों के लिए भी क्वालिटी मानक तय किए गए हैं. इनमें कुछ मानक FSSAI के सामान्य मानकों से भी ज्यादा सख्त हैं. तूर दाल और चने के गोदामों में पहुंचने वाले सैंपल की 100 फीसदी क्रॉस-वेरिफिकेशन फूड रिसर्च लैबोरेटरी और क्वालिटी कंट्रोल शाखा के जरिए की जाती है.