10 दिनों में शुरू होगी खरीफ फसलों की आवक, मक्का-ज्वार के दाम MSP से ऊपर.. किसानों की बंपर कमाई

नई खरीफ फसलों की मंडियों में आवक शुरू होने वाली है. किसानों को अच्छे भाव की उम्मीद है, लेकिन बाजरा और मूंग अभी MSP से नीचे बिक रहे हैं. अल-नीनो के असर से उत्पादन घटने की आशंका भी है. धान की सरकारी खरीद से भाव में सुधार की उम्मीद है, जबकि नई फसल आने पर मक्का के दाम गिर सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 7 Sep, 2026 | 08:17 AM

नई खरीफ फसलों की मंडियों में आवक करीब 10 दिन में शुरू होने वाली है. ऐसे में प्रमुख उत्पादक राज्यों के किसानों को फसलों के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है. हालांकि, बाजरा और मूंग की कीमतें अभी चिंता का कारण बनी हुई हैं. दोनों फसलें अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से क्रमशः 31 फीसदी और 13 फीसदी नीचे बिक रही हैं. एगमार्कनेट के 4 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, जिन 14 खरीफ फसलों के लिए सरकार MSP घोषित करती है, उनमें से 9 फसलों की औसत कीमत MSP के बराबर या उससे ज्यादा रही. इनमें मक्का, ज्वार, अरहर, उड़द और सोयाबीन जैसी फसलें शामिल हैं.

धान खरीफ की प्रमुख फसल है और इसके बाजार भाव पर सरकारी खरीद का भी असर पड़ता है. आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में धान का औसत भाव फिलहाल 1,965 रुपये प्रति क्विंटल रहा. वहीं, अल-नीनो के असर से कुछ फसलों की पैदावार घटने की आशंका के बावजूद कई खरीफ फसलों  के मंडी भाव अगले सीजन के MSP से नीचे चल रहे हैं. बाजरा, धान, मूंग, मूंगफली और सोयाबीन के भाव MSP से 0.6 फीसदी से 31 फीसदी तक कम हैं. वहीं, मक्का, ज्वार, अरहर और उड़द के भाव MSP से 11 फीसदी तक ऊपर हैं.

सरकारी खरीद से धान किसानों को राहत

कृषि मंत्रालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव के मुताबिक, धान को लेकर फिलहाल चिंता की ज्यादा वजह नहीं है. सरकार कुल धान उत्पादन का करीब 40 फीसदी खरीदती है. अलग-अलग राज्यों में सरकारी खरीद शुरू होने के बाद मंडी में धान के भाव भी बढ़ने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि इस साल सोयाबीन के भाव पिछले साल के मुकाबले बेहतर हैं, जबकि सोया तेल का आयात भी मजबूत रहा है. गुजरात, जो देश का सबसे बड़ा मूंगफली उत्पादक राज्य है, वहां इस साल फसल अच्छी रहने की उम्मीद है. ऐसे में मूंगफली के भाव भी आगे बढ़ सकते हैं.

नई फसल की आवक बढ़ने पर मक्का के भाव गिर सकते हैं

विशेषज्ञ के मुताबिक, मक्का के मौजूदा भाव MSP से ऊपर चल रहे हैं, लेकिन नई फसल मंडियों में आने के बाद कीमतों में गिरावट आ सकती है. इसकी वजह पशु चारे की मांग में सोयामील और DDGS जैसी दूसरी चीजों से मक्का को मिलने वाली प्रतिस्पर्धा होगी. नाफेड के पूर्व अतिरिक्त प्रबंध निदेशक एसके सिंह के मुताबिक, पिछले वर्षों के आंकड़ों और अल-नीनो के असर को देखते हुए इस सीजन खरीफ फसलों के उत्पादन में कमी की आशंका है. बाजार में भी इसका असर दिख रहा है और मौजूदा कीमतों में उत्पादन घटने की संभावना को शामिल किया जा चुका है.

सोयाबीन की कीमतों में अचानक गिरावट पर उठे सवाल

उन्होंने कहा कि सोयाबीन के भाव में अचानक आई गिरावट चौंकाने वाली है. यह गिरावट लंबे समय तक टिकने की संभावना नहीं है. उनके मुताबिक, बाजार में कुछ कारोबारियों की मिलीभगत यानी कार्टेल बनने की वजह से भी कीमतों में यह गिरावट हो सकती है. एसके सिंह ने कहा कि कुल मिलाकर ज्यादातर प्रमुख फसलों के FAQ ग्रेड के भाव उनके MSP के आसपास रहने की उम्मीद है. हालांकि, मूंग के मामले में सरकारी एजेंसियों की ओर से स्टॉक बेचने के कारण इसके भाव MSP से नीचे रह सकते हैं.

मक्का और धान की बुवाई का रकबा घटा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मक्का की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 3 फीसदी घटकर 91 लाख हेक्टेयर रह गया है. वहीं, धान का रकबा 4 फीसदी कम होकर 421.82 लाख हेक्टेयर है. सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में करीब 1-1 लाख हेक्टेयर कम हुई है.

Published: 7 Sep, 2026 | 08:06 AM

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