धान से लेकर सोयाबीन तक पिछड़ी बुवाई, खरीफ सीजन में 18.91 लाख हेक्टेयर का अंतर

Kharif Sowing Area 2026: देश में खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार धीमी हुई है. 28 अगस्त तक कुल 1071.10 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई, जो पिछले साल से 18.91 लाख हेक्टेयर कम है. धान, मक्का, सोयाबीन और कपास का रकबा पीछे है, जबकि दलहन और कुछ तिलहन फसलों में बढ़ोतरी हुई है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 29 Aug, 2026 | 06:44 PM

Kharif Sowing 2026: देश में खरीफ फसलों की बुवाई अब धीरे-धीरे अंतिम दौर में पहुंच रही है, लेकिन पिछले एक सप्ताह में इसकी रफ्तार कुछ सुस्त हुई है. बीते सात दिनों में कुल खरीफ फसलों का रकबा करीब 14.40 लाख हेक्टेयर ही बढ़ा है. कृषि मंत्रालय के उपज (UPAJ) पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले इस बार खरीफ फसलों की कुल बुवाई अभी भी पीछे चल रही है. 28 अगस्त तक खरीफ फसलों की बुवाई 1071.10 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 1090.01 लाख हेक्टेयर में खेती हो चुकी थी. यानी इस साल बुवाई करीब 18.91 लाख हेक्टेयर पीछे है. पिछले सप्ताह यह अंतर 1.50 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 1.73 प्रतिशत हो गया है.

धान की बुवाई पिछले साल से पीछे

खरीफ की सबसे प्रमुख फसल धान की बुवाई भी इस बार पिछले साल की तुलना में कम है. अब तक करीब 414.10 लाख हेक्टेयर में धान लगाया गया है. पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 428.46 लाख हेक्टेयर था. हालांकि राहत की बात यह है कि धान का मौजूदा रकबा इसके सामान्य औसत 412 लाख हेक्टेयर से थोड़ा ज्यादा है. यानी लंबी अवधि के औसत के हिसाब से धान की स्थिति बहुत खराब नहीं है.

दलहन की खेती में दिखी सुधार की तस्वीर

दलहन के मामले में तस्वीर थोड़ी बेहतर नजर आ रही है. सभी दलहनों का कुल रकबा पिछले साल के 113.66 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 115.05 लाख हेक्टेयर हो गया है. हालांकि यह अभी भी 123.63 लाख हेक्टेयर के सामान्य औसत से कम है. अरहर की बुवाई 44.31 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 44.59 लाख हेक्टेयर हो गई है. इसी तरह उड़द का रकबा भी पिछले साल के 22.11 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 24.69 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है.

मोटे अनाज में रागी और मक्का पिछड़े

मोटे अनाज की बुवाई में भी पिछले साल के मुकाबले कमी बनी हुई है. एक सप्ताह में यह अंतर 1.92 प्रतिशत से बढ़कर 2.31 प्रतिशत हो गया. रागी की बुवाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. इसका रकबा पिछले साल के 7.86 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार 5.48 लाख हेक्टेयर है. यानी इसमें करीब 30 प्रतिशत की गिरावट है. मक्का भी पीछे है और इसका रकबा 93.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 89.99 लाख हेक्टेयर रह गया है. हालांकि ज्वार, बाजरा और कुछ अन्य छोटे मिलेट का क्षेत्र थोड़ा बढ़ा है.

सोयाबीन की बुवाई भी कम

तिलहन फसलों की बुवाई में भी इस साल मामूली कमी दर्ज की गई है. पिछले सप्ताह जहां अंतर 0.17 प्रतिशत था, अब यह बढ़कर 0.52 प्रतिशत हो गया है. प्रमुख तिलहन फसल सोयाबीन का रकबा पिछले साल के 122.95 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार 121.72 लाख हेक्टेयर है. मूंगफली भी 49.71 लाख हेक्टेयर से घटकर 49.09 लाख हेक्टेयर रह गई है. वहीं तिल और सूरजमुखी की खेती में बढ़ोतरी देखने को मिली है. तिल का रकबा 9.43 लाख से बढ़कर 10.84 लाख हेक्टेयर और सूरजमुखी का क्षेत्र 0.63 लाख से बढ़कर 1.13 लाख हेक्टेयर हो गया है.

गन्ने और कपास की स्थिति

गन्ने की बुवाई का रकबा इस बार 58.46 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 58.87 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है. हालांकि यह फसल के सामान्य औसत 54.20 लाख हेक्टेयर से काफी ज्यादा है. कपास की बुवाई भी पिछले साल से मामूली पीछे है. इस साल अब तक 108.80 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 109.23 लाख हेक्टेयर था. जूट और मेस्ता का रकबा जरूर 6.23 लाख से बढ़कर 6.34 लाख हेक्टेयर हो गया है.

बारिश और मौसम पर टिकी आगे की तस्वीर

कुल मिलाकर इस साल खरीफ बुवाई पिछले साल से पीछे चल रही है. धान, मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी प्रमुख फसलों में कमी दिखाई दे रही है, जबकि कुछ दलहन और तिलहन फसलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है. अब आगे फसल की स्थिति काफी हद तक मौसम और बारिश पर निर्भर करेगी. आने वाले दिनों में मौसम का साथ मिला तो बुवाई के अंतर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़