आंध्र प्रदेश में बारिश की भारी कमी, खरीफ बुवाई 21 फीसदी घटी.. अल नीनो से निपटने की तैयारी शुरू
आंध्र प्रदेश में मॉनसून के दौरान 51 फीसदी बारिश की कमी से खरीफ बुवाई प्रभावित हुई है. इस साल बुवाई का रकबा 21 फीसदी घटा है. सरकार ने अल नीनो के संभावित असर से निपटने के लिए स्थानीय जरूरत के हिसाब से रणनीति बनाई है. पानी की उपलब्धता के अनुसार फसल पैटर्न बदलने और किसानों को राहत देने पर जोर है.
Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश में इस मॉनसून सीजन में अब तक 51 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने अल नीनो के संभावित असर से निपटने के लिए योजना बनाई है. 25 अगस्त तक राज्य में 193 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 393.7 मिमी बारिश होती है. कम बारिश का असर खरीफ की बुवाई पर भी पड़ा है. इस साल अब तक 20.35 लाख हेक्टेयर में फसल बोई गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 25.63 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी. यानी बुवाई का रकबा करीब 21 फीसदी घटा है.
धान की बुवाई का क्षेत्रफल 11.79 लाख हेक्टेयर से घटकर 10.37 लाख हेक्टेयर रह गया है. वहीं, पानी की उपलब्धता को देखते हुए किसानों ने दलहन की ओर रुख किया है. दलहन की बुवाई 2.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.66 लाख हेक्टेयर हो गई है. सरकार के एक अधिकारी ने बिजनेसलाइन से कहा कि बुवाई क्षेत्र में कमी की मुख्य वजह पानी की उपलब्धता के अनुसार फसल पैटर्न में बदलाव है. इसका मतलब यह नहीं है कि खेती में सामान्य गिरावट आई है. सरकार ने 1.29 लाख हेक्टेयर धान की जमीन को दूसरी फसलों में बदलने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से अब तक 36 हजार हेक्टेयर यानी करीब 28 फीसदी लक्ष्य हासिल किया जा चुका है.
अल नीनो का आंध्र पर बढ़ा खतरा
आंध्र प्रदेश उन इलाकों में शामिल है, जहां अल नीनो का असर ज्यादा पड़ने की आशंका है. 1 जून से 25 अगस्त 2026 के बीच देश में सामान्य से करीब 13 फीसदी कम बारिश हुई, जबकि आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी 51 फीसदी रही. यानी राज्य में बारिश की कमी राष्ट्रीय औसत से करीब चार गुना ज्यादा है. राज्य के सभी 28 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है. इनमें 25 जिले बारिश की कमी और 3 जिले बड़ी बारिश की कमी वाली श्रेणी में हैं.
आंध्र सरकार ने 3,434 रायतु सेवा केंद्रों को किया चिन्हित
सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि फरवरी 2026 से ही अल नीनो की स्थिति पर नजर रखी जा रही थी. मौसम को लेकर शुरुआती संकेत मिलने के बाद सरकार ने समय रहते तैयारी शुरू कर दी थी. मार्च तक तैयार की गई पहली रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई थी. इस रिपोर्ट में राज्य के 1,357 रायतु सेवा केंद्रों (RSK) को हाई रिस्क और 2,077 केंद्रों को मध्यम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया. इसके आधार पर सरकार ने संवेदनशील इलाकों में पहले से तैयारी और जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए.
किसानों की जरूरत पर सरकार का फोकस
आंध्र प्रदेश सरकार अल नीनो के संभावित असर से निपटने के लिए सभी इलाकों में एक जैसी रणनीति अपनाने के बजाय स्थानीय जरूरत के हिसाब से कदम उठा रही है. सरकार का फोकस जमीन पर मौजूद हालात के आधार पर योजना बनाने पर है. एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस रणनीति के चार प्रमुख आधार हैं. जहां पानी उपलब्ध है, वहां उसका बेहतर इस्तेमाल करना, पानी की कमी वाले इलाकों में किसानों को इससे निपटने के लिए तैयार करना, पशुपालन जैसे दूसरे कृषि आधारित क्षेत्रों को सुरक्षित रखना और सरकारी व्यवस्था को मजबूत करना. सरकार की इस योजना को ‘रायतन्ना मीकोसम’ अभियान के जरिए जमीन पर लागू किया जा रहा है. इसमें हर किसान और उसके खेत के हिसाब से जरूरतों को ध्यान में रखा जा रहा है. अभियान की रियल टाइम निगरानी भी की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें.