Odisha Agriculture: ओडिशा में खेती-किसानी को ज्यादा आधुनिक, डिजिटल और मौसम के बदलाव के हिसाब से मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने शुक्रवार को कृषि क्षेत्र से जुड़े अलग-अलग संगठनों के साथ 6 समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इन समझौतों का फोकस डिजिटल कृषि, जलवायु के असर से निपटने, किसानों की आय बढ़ाने और गांव-गांव तक कृषि सेवाएं पहुंचाने पर रहेगा.
राज्य के कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग ने ओडिशा पोस्टल सर्किल के साथ एक MoU किया है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्था ICRISAT के साथ चार और एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) के साथ एक समझौता किया गया है.
गांव के डाक सेवक बनेंगे किसानों की डिजिटल मदद
इन समझौतों का सबसे बड़ा फायदा गांवों तक डिजिटल कृषि सेवाएं पहुंचाने में होगा. इसके लिए ग्रामीण डाक सेवकों के बड़े नेटवर्क की मदद ली जाएगी. ग्रामीण डाक सेवक किसानों को एग्रीस्टैक फार्मर रजिस्ट्री में नाम दर्ज कराने और किसान पहचान पत्र बनवाने में मदद करेंगे. इसके अलावा किसान सीएम-किसान में पंजीकरण, पीएम-किसान की ई-केवाईसी और आधार को जोड़ने जैसे जरूरी काम भी ग्रामीण डाक सेवकों की मदद से कर सकेंगे. इससे किसानों के लिए सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं से जुड़ना आसान होगा.
इससे उन किसानों को खास फायदा मिल सकता है, जिन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया समझने या सरकारी पोर्टल पर खुद आवेदन करने में परेशानी होती है. गांव के स्तर पर मदद मिलने से किसानों को इन सेवाओं के लिए बार-बार दूसरे स्थानों पर जाने की जरूरत कम हो सकती है.
ICRISAT के साथ मिलकर कृषि को बनाया जाएगा मजबूत
राज्य सरकार ने कृषि अनुसंधान से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्था ICRISAT के साथ चार समझौते किए हैं. इनका मकसद खेती को बदलते मौसम और जलवायु से पैदा होने वाली चुनौतियों के लिए ज्यादा तैयार करना है. जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश का पैटर्न बदल रहा है और कई जगह सूखे या ज्यादा बारिश जैसी स्थिति किसानों के लिए परेशानी पैदा करती है. ऐसे में नई तकनीक और बेहतर कृषि तरीकों के इस्तेमाल से खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाने पर जोर दिया जाएगा.
बीज व्यवस्था और किसानों की आजीविका पर जोर
इन MoU के जरिए राज्य में बीज व्यवस्था को भी मजबूत करने की योजना है. सरकार का लक्ष्य किसानों को बेहतर और जरूरत के मुताबिक बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था को गांवों तक मजबूत करना है. उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव ने कहा कि इन छह समझौतों से ओडिशा के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा. उनके मुताबिक, डाक सेवकों के नेटवर्क और प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थानों की विशेषज्ञता को जोड़कर छोटे किसानों को ज्यादा मजबूत बनाया जा सकता है.
दाल और तिलहन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
सरकार का एक बड़ा लक्ष्य दाल और तिलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना भी है. इसके लिए किसानों को बेहतर कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा. दाल और तिलहन की खेती बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त आय का मौका मिल सकता है. साथ ही राज्य की इन फसलों के लिए बाहरी निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है.
हर किसान तक पहुंचेगी डिजिटल सुविधा
सरकार का कहना है कि इन समझौतों का उद्देश्य सिर्फ नई तकनीक लाना नहीं, बल्कि उसे किसानों तक पहुंचाना भी है. गांव के स्तर पर डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से किसान सरकारी योजनाओं और जरूरी कृषि सुविधाओं से आसानी से जुड़ सकेंगे. कुल मिलाकर, ओडिशा सरकार के ये छह MoU डिजिटल खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, बेहतर बीज व्यवस्था और किसान सेवाओं को एक साथ मजबूत करने की कोशिश हैं. अगर इन योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो छोटे और सीमांत किसानों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है.