फुटबॉल की खुमारी में डूबने वाली है पूरी दुनिया, शुरू होगा वर्ल्ड कप… जानिए खेल का किसानी कनेक्शन
फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू हो रहा है. क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल का खेती-किसानी से भी गहरा रिश्ता है? सेनेगल के स्टार फुटबॉलर सादियो माने से लेकर स्टेडियम की घास, प्राकृतिक रबर और भारत के ग्रामीण फुटबॉल कल्चर तक, फुटबॉल और खेती के बीच कई दिलचस्प कड़ियां मौजूद हैं.
भारतीय समय के अनुसार 12 जून जब शुरू होगा और देश नींद की आगोश में होगा, उस वक्त दुनिया फुटबॉल के खुमार में डूब जाएगी. दुनिया का सबसे मकबूल खेल. ऐसा खेल, जिसे वाकई ग्लोबल माना जाता है, भारतीय समय से 12 जून की रात 12.30 बजे से शुरू होगा. भारत भले ही क्रिकेट को धर्म की तरह मानने वाला देश हो, लेकिन जुनून या पागलपन की हद तक दुनिया में कोई खेल लोकप्रिय है, तो फुटबॉल है. वर्ल्ड कप 2026 तीन देशों में हो रहा है… अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको. अब जब दुनिया इस खेल के जुनून में डूबने वाली है, हम उन पांच खास बातों को देख लेते हैं, जो फुटबॉल को खेती से जोड़ता है.
खेती–किसानी से निकला स्टार
सबसे पहले एक खिलाड़ी की चर्चा. ये हैं सादियो माने. सेनेगल के फुटबॉलर. माने का जन्म सेनेगल के बंबाली गांव में हुआ था. उनकी कहानी अक्सर “गांव के किसान परिवार से निकलकर विश्व फुटबॉल स्टार बनने” की कहानी के रूप में बताई जाती है. कई रिपोर्टों के अनुसार बचपन में वे खेतों में काम करते थे और परिवार चाहता था कि वे खेती–किसानी से जुड़े रहें. बाद में उन्होंने फुटबॉल को करियर बनाया और दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ियों में शामिल हुए.
माने सात साल के थे, जब पिता की मौत हो गई. एक डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक पिता के पेट में दर्द हुआ. गांव में अस्पताल नहीं था. जब तक दूसरी जगह लेकर जाया जाता, उनकी मौत हो गई. माने अपने चाचा के साथ खेती करने लगे और उसके बाद फुटबॉलर बने. जिस गांव में उनके पिता की मौत हुई, वहां बड़े हॉस्पिटल का उद्घाटन उन्होंने किया. 2019 के एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था के सेनेगल के एक बहुत गरीब गांव में वो हर नागरिक को हर महीने 76 डॉलर देते हैं.
गांव और खेती से जुड़े देशों से कनेक्शन
फुटबॉल की जड़े गांव से ही जुड़ी हैं. माना जाता है कि आदिवासी समाज से फुटबॉल शुरू हुआ. खासतौर पर फसल कटाई के बाद खाली मैदानों में मनोरंजन के तौर पर इस खेल को खेला जाता रहा. खेतों से शुरू हुआ यह खेल आज दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है. ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और कई अफ्रीकी देशों की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है. ये देश फुटबॉल में भी दुनिया के सबसे सफल देशों में गिने जाते हैं.
मैदान की देखरेख में खेती से जुड़े एक्सपर्ट्स की भूमिका
स्टेडियम में दिखने वाली हरी–भरी घास कोई साधारण घास नहीं होती. इसे खास किस्मों के बीजों से उगाया जाता है. इसके लिए मिट्टी कैसी होगी, सिंचाई का क्या तरीका होगा, उसका पोषण और रोग नियंत्रण जैसी कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. नियमित सिंचाई, घास की कटाई, उर्वरक और पेस्टिसाइड्स का भी इस्तेमाल होता है. हर बड़े स्टेडियम में हॉर्टिकल्चर एक्सपर्ट काम करते हैं, जो मैदान की घास का रख–रखाव देखते हैं. ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल भी होता है.
प्राकृतिक रबर से बनती थी फुटबॉल
फुटबॉल के शुरुआती दौर में गेंदों में प्राकृतिक रबर का इस्तेमाल होता था. रबर पेड़ों से प्राप्त होता है, इसलिए फुटबॉल निर्माण का एक हिस्सा सीधे कृषि से जुड़ा रहा है. हालांकि मॉडर्न फुटबॉल पूरी तरह प्राकृतिक रबर से नहीं बनती. आधुनिक फुटबॉल में कई तरह की सिंथेटिक (कृत्रिम) सामग्री का इस्तेमाल होता है. उसका भीतरी हिस्सा अब भी प्राकृतिक रबर से ही बनती है.
भारत में भी दिखता है यह संबंध
भारत में फुटबॉल का पागलपन कभी कम नहीं रहा. खासतौर पर केरल, गोवा, बंगाल और उत्तर पूर्वी इलाकों में. मॉनसून और फुटबॉल का रिश्ता भी गजब है. यही खेल है, जो मॉनसून में और निखरकर आता है. आमतौर पर बरसात फुटबॉल पर असर नहीं डाल पाती. भारत में भी बाकी दुनिया की तरह कटाई के बाद खाली मैदानों में फुटबॉल की परंपरा रही है. कई जगहों पर ये प्रतियोगिताएं ग्रामीण मेलों और स्थानीय उत्सवों का हिस्सा होती हैं.
खेती के बैकग्राउंड से जुड़े तमाम भारतीय खिलाड़ी भी हैं, जिसमें सबसे बड़ा नाम बाइचुंग भूटिया का है. सिक्किम के टिंकिटम गांव में जन्मे भूटिया के मां–बाप खेती करते थे. सिक्किम में मुख्य रूप से मक्का, धान, सब्जियां और बागवानी फसलें उगाई जाती थीं. भूटिया का बचपन भी इसी ग्रामीण माहौल में बीता. उन्होंने कई इंटरव्यू में बताया है कि गांव में खेल सुविधाएं सीमित थीं और वे खुले मैदानों में फुटबॉल खेलते हुए बड़े हुए.