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भारत के इस फ्रूट की जर्मनी और पोलैंड में भारी डिमांड, 1200 रुपये किलो है रेट.. ऐसे होती है खेती
ऐसे अंजीर की खेती में बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. गर्मियों में 7- 8 दिन के अंतराल पर सिंचाई पर्याप्त होती है, जबकि मॉनसून में कम पानी देना पड़ता है. इसके लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली सबसे बेहतर मानी जाती है. अच्छी पैदावार के लिए गोबर की खाद या कम्पोस्ट का उपयोग करना चाहिए.
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Women’s Day 2026: खेत से लैब तक छाई नारी शक्ति! भारत की इन महिलाओं ने अपने दम पर बदली कृषि की तस्वीर
International Women’s Day 2026: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जानिए भारत की उन प्रेरणादायक महिलाओं के बारे में जिन्होंने विज्ञान और कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया. ई.के. जानकी अम्माल, अन्ना मणि और असिमा चटर्जी जैसी महिला वैज्ञानिकों से लेकर खेतों में मेहनत करने वाली महिला किसानों तक, इनकी मेहनत और उपलब्धियों ने देश के विकास को नई दिशा दी है.
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..तो खत्म हो जाएंगे महुआ लाटा-लड्डू और सदियों पुरानी बुंदेलखंडी स्वाद परंपरा? विलुप्त हो रहे महुआ के पेड़
रानी झांसी केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड में महुआ जैसे महत्वपूर्ण और विलुप्त हो रहे पेड़ों के पुर्नजीवन के लिए काम किया जा रहा है. इस ओर वैज्ञानिकों के प्रयासों से नई किस्में विकसित करने के साथ ही महुआ उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री के लिए मंच तैयार किए जा रहे हैं.
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खारे पानी से खराब होती मिट्टी और फसलों को बचाने वाला यंत्र बनाया, किसान दिलीप सिंह को मिला अवॉर्ड
पुरस्कार विजेता किसान दिलीप सिंह ने कहा कि यह बिल्कुल सिंपल यंत्र है. इसको इस्तेमाल करने में लाइट, सोलर, पेट्रोल, डीजल, ऑयल, किसी तरह का कोई यूज नहीं होता है. पाइप में लगे तांबे और चुंबकीय खिंचाव से यह यंत्र चलता है. इस यंत्र को किसान अपने एक खेत से दूसरे खेत में कभी भी उठाकर ले जा सकते हैं.
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अनपढ़ ग्रामीण महिलाओं का कमाल.. सब्जियों के पत्ते, हल्दी-फूल से गुलाल बनाकर आत्मनिर्भर बनीं, देशभर में बिक्री
Holi Herbal Gulal: परिवर्तन महिला स्वयं सहायता समूह की मुखिया गीता राजपूत ने किसान इंडिया को बताया कि महिलाएं फूल, पालक, हल्दी सहित अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर बड़ी मात्रा में हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं. मानव स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे इस हर्बल गुलाल की क्षेत्र के साथ ही देश के कई बड़े शहरों में अच्छी मांग है.
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किलो नहीं गिनती से बिकता है यह आम, 1500 रुपये दर्जन है रेट.. पूरी दुनिया में भारी डिमांड
हापुस आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीला होता है. इसमें फाइबर कम होता है, इसलिए इसका गूदा बहुत मुलायम लगता है. पकने पर इसका रंग सुनहरा पीला हो जाता है और ऊपर की तरफ हल्का लालपन भी दिख सकता है. यह आम आमतौर पर किलो के बजाय दर्जन के हिसाब से बेचा जाता है, इसलिए यह भारत के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है.








