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Agri Exports Opportunities: भारतीय खेतों से विदेशों की थाली तक, कैसे भारत बन रहा है ग्लोबल एग्री ब्रांड
Agri exports opportunities: धान, गेहूं, मक्का, दलहन और तेलहन लगभग हर प्रमुख फसल में रिकॉर्ड या उससे बेहतर पैदावार देखने को मिली. इसका सीधा असर अब कृषि निर्यात (Agri Exports) पर दिख रहा है, जहां भारत नए-नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है.
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Success Story: स्वीटकॉर्न की खेती ने बनाया लखपति, एक एकड़ में डेढ़ लाख का मुनाफा.. कुल कमाई 10 लाख रुपये
Sweet Corn Farming: पांढुर्णा जिले के प्रगतिशील किसान रमेश सातहाते आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर स्वीटकॉर्न की खेती से लाखों की कमाई कर रहे हैं. उन्होंने प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये का नेट प्रॉफिट हासिल कर पा रहे हैं. उनको देखकर पड़ोस के गांवों के किसानों ने भी स्वीटकॉर्न की खेती शुरू कर दी.
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पौष्टिक तत्वों से भरपूर है जलगांव का केला, 15 महीने में तैयार हो जाती है फसल.. विदेशों में भी भारी डिमांड
जलगांव महाराष्ट्र का प्रमुख केला उत्पादक केंद्र है. यहां 75,000 हेक्टेयर में GI प्रमाणित जलगांव केला उगता है. Grand Naine (G9) किस्म मीठा और पौष्टिक है. ड्रिप सिंचाई, काली मिट्टी और बेहतर मार्केट कनेक्टिविटी से उत्पादन बढ़ता है. यहां के किसान तूफान और मौसम चुनौतियों का सामना करते हैं.
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जी-9 केला की खेती का कमाल.. पथरीली जमीन उगल रही सोना, प्रति एकड़ 3 लाख प्रॉफिट बना रहे कैलाश पवार
कैलाश पवार अब अपनी पथरीली जमीन पर केला की उन्नत किस्म G-9 की खेती कर रहे हैं और प्रति एकड़ तीन लाख रुपये का प्रॉफिट हासिल कर पा रहे हैं. उन्होंने भुताई गांव में नवाचार से केला की खेती करके कृषि में मिसाल पेश की है. वह लगभग 18 एकड़ क्षेत्र में केले की उन्नत किस्म जी-9 की मुनाफेदार खेती कर रहे हैं.
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बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर चर्चा में आए किसान धनराज, अब खेत में लहलहा रही सरसों और जीरा की फसल
Dhaincha Convert Barren Land in to Fertile: किसान धनराज ने कहा कि मिट्टी सुधार के लिए रासायनिक खादों का इस्तेमाल किया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर उन्होंने प्राकृतिक व जैविक पद्धति अपनाई. अब उनकी उस बंजर जमीन पर सरसों और जीरा की फसल लहलहा रही है.
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Opinion: ग्रामीण पलायन का रास्ता हुआ संकरा, फिर भी नहीं पट रही गांव और शहर की खाई
सरकारें भले ही गांवों में कौशल विकास के कितने भी दावे कर लें, लेकिन सच्चाई यह है कि ज्यादातर कौशल केंद्र शहरों में ही संचालित हो रहे हैं. इतना ही नहीं, गांव से शहर की ओर हो रहे पलायन की अन्य वजहों में शुमार अच्छे स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी जरूरतें अभी भी गांवों से दूर ही हैं.








