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रूपाखेड़ा गांव बना खेती का ‘मिनी हॉलैंड’, पॉलीहाउस में खिल रहे विदेशी फूल बढ़ा रहे किसानों की आय
मध्य प्रदेश के छोटे से गांव के किसानों ने उद्यान विभाग की मदद से गेहूं, चना जैसी पारंपरिक फसलों की खेती छोड़ फूलों की खेती शुरू की है, जिससे उनकी कमाई बढ़ी है. जबकि, सरकार भी सब्सिडी किसानों को दे रही है.
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हरी की बजाय रेड-येलो शिमला मिर्च उगाई, पहले ही सीजन में किसान ने कमाए 3 लाख रुपये
Success Story: हरी शिमला मिर्च में कम मुनाफा मिलने के बाद मंडी के किसान लोकपाल ठाकुर ने दोस्त की सलाह पर रेड और येलो शिमला मिर्च की खेती शुरू की. पहले ही सीजन में 3 लाख रुपये का लाभ मिला. अब पूरे परिवार के साथ पॉलीहाउस खेती से शानदार कमाई कर रहे हैं.
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GI Tag Special Story: रसोई का स्वाद बढ़ाए, पेट भी रखे दुरुस्त! जानिए ऊंझा जीरे का कमाल
गुजरात में हर साल करीब 4 लाख टन जीरे का उत्पादन होता है. राज्य के बनासकांठा, पाटन, मेहसाणा, कच्छ और सुरेंद्रनगर जिले जीरे की खेती के प्रमुख केंद्र हैं, जहां बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है. ऐसे गुजरात का ऊंझा बाजार एशिया की सबसे बड़ी जीरा मंडी माना जाता है.
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आग की नहीं पड़ती जरूरत, ठंडे पानी में भिगोने पर ही तैयार हो जाता यह चावल.. नाम है मैजिक राइस
असम का प्रसिद्ध चोकुवा चावल, जिसे ‘मैजिक राइस’ कहा जाता है, अपनी अनोखी खूबियों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. GI टैग प्राप्त इस पारंपरिक चावल को पकाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि पानी में भिगोकर खाया जा सकता है. सांस्कृतिक महत्व, बेहतर मांग और खास स्वाद के कारण यह किसानों के लिए लाभदायक फसल बन रहा है.
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PF को लेकर बदल गए हैं नियम, क्या इससे नौकरी को लेकर भारतीयों का सपना भी बदलेगा…
नौकरी करने वालों के लिए पीएफ सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा कवच माना जाता है. अब केंद्र सरकार ने नई EPF Scheme, 2026 लागू कर दी है. योगदान की दर तो पहले जैसी ही रहेगी, लेकिन अब यह साफ कर दिया गया है कि कंपनी कब पीएफ देने के लिए बाध्य होगी और कब नहीं.
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परिवार नहीं, अब व्यक्ति के हिसाब से मिलेगा राशन… सरकार के प्रस्ताव से क्या उत्तर-दक्षिण ‘जंग’ छिड़ेगी?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव के प्रस्ताव ने नई बहस छेड़ दी है. सरकार परिवार की जगह प्रति व्यक्ति 7 किलो राशन देने की तैयारी में है. इससे बड़े परिवारों को फायदा मिल सकता है, लेकिन छोटे परिवारों और दक्षिणी राज्यों पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. क्या इससे राशन व्यवस्था कैसे बदल सकती है?








