फैक्ट्रियों के कचरे से कई हजार एकड़ खेती बर्बाद, 10 साल से संकट में किसान, नदियों का पानी भी दूषित हुआ

ग्राम प्रधान मुन्नालाल यादव ने कहा कि केमिकल युक्त कचरे और संक्रमित पानी में बहाव से रनिया इलाके की 1 हजार एकड़ से अधिक फसल योग्य भूमि खराब हो गई है. बीते कई सालों से लगातार किसानों की फसलों को नुकसान पहुंच रहा है. खेतों की मिट्टी खराब होने से बीजों का अंकुरण तक नहीं हो पा रहा है. नलों से निकलने वाला पानी भी प्रदूषित हो रहा है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 8 Jan, 2026 | 01:57 PM

फैक्ट्रियों के केमिकल युक्त कचरे और खराब पानी की वजह से खेती योग्य भूमि खराब हो रही है. उत्तर प्रदेश के कानपुर में फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा खुलेआम नालों, नदी और खेतों के किनारे डाले जाने से लगभग एक हजार एकड़ से ज्यादा फसल चौपट हो गई है. बीते 10 साल से किसान फैक्ट्रियों के कचरे का सही निस्तारण करने की मांग कर रहे हैं. लेकिन, कॉरपोरेट के आगे किसानों की सुनवाई नहीं की जा रही है. जबकि, कई बार प्रशासन से शिकायतें की जा चुकी हैं. कृषि विभाग का कहना है कि इसके लिए प्रदूषण विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए. जब ‘किसान इंडिया’ की टीम ने रनिया इलाके में ग्राउंड पर जाकर हालात देखे तो खेतों की स्थिति भयावह नजर आई. मिट्टी में कई पोषक तत्वों की कमी पाई गई और मिट्टी खराब होकर फफूंद में तब्दील हो चुकी है, जिससे उसमें बीजों का अंकुरण नहीं हो पा रहा है.

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में रनिया इंडस्ट्रियल बीते एक दशक में तेजी से अपने पैर पसार चुका है. कानपुर शहर के बीच दादा नगर में स्थापित ज्यादातर फैक्ट्रियों को जिला प्रशासन ने रनिया और रूमा इलाके में शिफ्ट किया गया है. रनिया राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के दोनों छोर पर बसा हुआ है. यह हाईवे सीधे पूरब में लखनऊ और इलाहाबाद को जाता और पश्चिम में झांसी से मध्य प्रदेश के सागर और इटावा, औरैया होते हुए दिल्ली को जोड़ता है. कनेक्टिविटी बेहतर होने की वजह से तेजी से यहां फैक्ट्रियां लगाई गई हैं. फैक्ट्रियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनसे निकलने वाला कचरा और खराब पानी की मात्रा भी बढ़ गई है. लेकिन, निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने से इलाके के किसानों के सामने खेती का संकट खड़ा हो गया है.

दो नदियों का पानी दूषित, 3 ब्लॉक के किसान प्रभावित

किसानों का कहना है कि फैक्ट्रियों का कचरा नजदीक से गुजरने वाले नाले और पांडु नदी और नोन नदी में बहा दिया जाता है, जिसका पानी किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए करते थे. लेकिन, खराब पानी से सिंचाई करने पर फसल बर्बाद होने लगी तो सिंचाई बंद कर दी. लेकिन, अब धीरे-धीरे 10 साल बाद कचरे की वजह से खेतों की मिट्टी भी खराब होने लगी है. जबकि, पेयजल के लिए नलों से निकलने वाला पानी भी दूषित हो गया है. यह हालात, रनिया, अमरौधा, सरवनेखेड़ा ब्लॉक के कई नजदीकी गांवों में देखे जा सकते हैं.

युवा किसानों ने कहा मिट्टी की जांच कराई तो कई हानिकारक तत्व मिले

रनिया इलाके के रहने वाले युवा किसान मोहम्मद साजिद और कानपुर देहात इलाके के राजेश कुमार ने अपने खेतों को दिखाया और बताया कि केमिकल कचरे की वजह से उनके खेतों की मिट्टी खराब हो रही है और उत्पादन में तेजी से गिरावट हुई है. खेतों की मिट्टी में नोना (फफूंद) लग गया है, जिससे उस हिस्से में फसल नहीं होती है. कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि जब मिट्टी में नमक या खारेपन की मात्रा अधिक हो जाती है तब मिट्टी में नोना लग जाता है. ऐसी स्थिति में फसल उग नहीं सकती है. युवा किसानों ने कहा कि उन लोगों ने मिट्टी की जांच कराई है तो उसमें सोडियम, क्लोराइड और सल्फेट की मात्रा अधिक पाई गई है.

ग्राम प्रधान बोले- कचरा बहने से 1 हजार एकड़ फसल खराब

अमरौधा ब्लॉक की ग्राम पंचायत कठरी के प्रधान मुन्नालाल यादव ने किसान इंडिया को बताया कि रनिया क्षेत्र में इंडस्ट्रियल एरिया है और यहां पर सैंकड़ों की संख्या में फैक्ट्रियां हैं, जिनका केमिकल युक्त कचरा पास से गुजरने वाले नाले और खेतों की तरफ डाला जा रहा है. जबकि, पास से गुजरने वाली पांडु नदी में भी फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त पानी बहकर पहुंच रहा है, जिससे नदी का पानी पूरी तरह काला हो गया है.

मुन्नालाल यादव ने कहा कि केमिकल युक्त कचरे और पानी में बहाव से रनिया इलाके की 1 हजार एकड़ से अधिक फसल योग्य भूमि खराब हो गई है. बीते कई सालों से लगातार किसानों की फसलों को नुकसान पहुंच रहा है. खेतों की मिट्टी खराब होने से बीजों का अंकुरण तक नहीं हो पा रहा है. यहां तक कि नलों से निकलने वाला पानी भी प्रदूषित हो रहा है. कई बार मिट्टी की जांच और पानी की जांच कराई जा चुकी है, लेकिन समाधान नहीं निकल पा रहा है. उन्होंने मामले पर सरकार से दखल देने और समाधान की अपील की है.

Factory chemical waste ruined thousand acres of farmland in rania kanpur farmers

किसान साजिद, राजेश और मुन्नालाल (बाएं से). मिट्टी खराब होने से खेत में जमा फंफूंद. (तस्वीरें- किसान इंडिया)

नोन नदी में केमिकल युक्त पानी बहने से पेयजल संकट

सरवनखेड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत विसलाय के दर्जन भर से ज्यादा किसानों ने कचरे के चलते खराब होती फसलों और पानी को बचाने के लिए नवंबर 2025 में प्रदर्शन भी किया था. किसानों का कहना है कि गांव के नजदीक से नाला बहता है जिसमें फैक्ट्रियों का कचरा और केमिकल युक्त पानी बहता है. विसलाय गांव में स्थिति गंभीर है. गांव के किसानों खुशी लाल, राम रतन, शिव लखन सिंह, शकील, खालिक, घनश्याम और अशोक ने कहा कि 10 साल से फैक्ट्रियों का केमकिल युक्त गंदा पानी खुले नाले में छोड़ा जा रहा है. इसके चलते सैकड़ों बीघा खेतों की फसलें बर्बाद हो रही हैं. फैक्ट्रियों का यह दूषित पानी सीधे नोन नदी में मिल रहा है. यदि पशु इस पानी को पीते हैं, तो उनके मरने का खतरा बना रहता है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल खानापूर्ति करके चले जाते हैं और कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता.

दो जिलों के बीच पिस रहे किसान

रनिया औद्योगिक क्षेत्र कानपुर नगर जिले में आता है और यह कानपुर देहात जिले की सीमा से बेहद नजदीक है. रनिया की फैक्ट्रियों का कचरा कानपुर देहात जिले से होकर बहने वाली पांडु नदी और नोन नदी में जाता है. इन नदियों के पानी का किसान सिंचाई और पशुओं को पिलाने के लिए करते रहे हैं. लेकिन, अब 10 सालों में पानी दूषित हो चुका है. किसान शिकायत करने कानपुर देहात के मुख्यालय अकबरपुर जाते हैं तो उन्हें रनिया कानपुर नगर में होने की बात कहकर टाल दिया जाता है. इसके चलते कृषि विभाग के अधिकारी भी प्रदूषण के लिए प्रदूषण विभाग को जिम्मेदार बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. कृषि विभाग के अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि कई बार फसलों को बचाने के लिए उपाय किए गए हैं, लेकिन नदियों का पानी दूषित होने से अब मिट्टी बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 8 Jan, 2026 | 01:40 PM

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है